राजनीति
भाजपा सांसद मनोज तिवारी की ओर से कहा गया, “न्यायाधीश अपने आराम क्षेत्र में रहते हैं जहाँ उनसे सवाल नहीं पूछे जाते”

भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने मंगलवार (30 अक्टूबर) को सर्वोच्च न्यायालय में कहाँ कि न्यायाधीशों को जनता का सामना नहीं करना पड़ता और उनके पास ऐसी विलासिता नहीं है।

सर्वोच्च न्यायालय में एक सुनवाई के दौरान सांसद का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, “न्यायाधीश अपने आरामदायक कक्ष में रहते हैं जहाँ उनपर सवाल उठाने के लिए कोई नहीं आता है। लोग मुझसे सवाल करते हैं, मैं उनके प्रति जवाबदेह हूँ।”

सुनवाई सितंबर 2018 के एक मामले से संबंधित है जिसमें मनोज तिवारी ने दिल्ली की एक अनाधिकृत कॉलोनी में एक सील बंद घर का ताला तोड़ दिया था। परिणाम स्वरूप उनके विरुद्ध एक अवमानना याचिका दर्ज की गई थी।

दिल्ली के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के गुकुलपुर नामक गाँव में 16 सितंबर को नगर निगम अधिकारियों की अनियमितताओं के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए तिवारी ने एक घर की सील तोड़ दी थी। कथित तौर पर निर्माण नियमों का उल्लंघन कर ज़मीन चुनी जा रही थी।

“सील बद्ध परिसर का ताला तोड़कर उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है जिससे न्यायालय की अवमानना होती है।”, तिवारी के सलाहकार ने उनकी ओर से कहा।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले पर अपना आदेश अलग रखा है और भाजपा सांसद को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने के लिए कहा है, तभी कोर्ट अपना निर्देश जारी करेगी।