राजनीति
योगी ने इंसेफलाइटिस से निपटकर जो उदाहरण प्रस्तुत किया, उसे कोरोना में सुदृढ़ किया

“यूपी में दम तोड़ रहा कोरोना! 48 जिलों में एक भी नया मरीज़ नहीं”, “कोरोना टीकाकरण के मामले में पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश, दूसरे नंबर पर गुजरात”- ये आज हिंदी समाचार-पत्रों की सुर्खियाँ हैं जो व्यक्त कर रही हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोरोना महामारी से कैसे निपटे।

कोरोना काल में उत्तर प्रदेश द्वारा किए कार्य की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की है। योगी आदित्यनाथ अपने बेहतर प्रबंधन और प्रशासनिक कौशल का उदाहरण कोरोना महामारी से पूर्व इंसेफलाइटिस से निपटने में भी प्रस्तुत कर चुके हैं।

करीब चार दशकों तक उत्तर प्रदेश के लगभग 38 जिलों में सहस्रों बच्चों को निगलने वाले इंसेफलाइटिस को योगी सरकार ने मात्र अपने तीन वर्षों के कार्यकाल में ही अपनी धुरी पर समेट दिया था। साल 2017 में उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद ही उन्होंने इस महामारी के खिलाफ एक युद्ध छेड़ दिया था और अपने समन्वित प्रयासों से अनेक जागरूकता कार्यक्रम एवं स्वास्थ्य व उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ कर प्रदेश को इंसेफेलाइटिस मुक्त बनाने में 95 प्रतिशत सफलता भी प्राप्त कर ली है।

वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ जब योगी सरकार ने जंग छेड़ी तो उन्होंने न सिर्फ इसपर काबू पाया बल्कि कोरोना से लड़ने का देश को सबसे बेहतर मॉडल दिया जो अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन चुका है। उत्तर प्रदेश में कोरोना के कारण मौतों की संख्या राष्ट्रीय औसत से काफी कम रही है। राज्य में प्रति 10 लाख की जनसंख्या में 37 मौतें ही हुईं थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मौत का यह आँकड़ा 114 मौतों तक पहुँच गया था।

भारत में जब कोरोना की शुरुआत हुई तो सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश पर टिकी हुई थीं। करीब 24 करोड़ आबादी वाला देश का सबसे बड़ा राज्य, जो कई यूरोपीय देशों से बड़ी जनसंख्या वाला है, कोरोना के खतरे से अछूता नहीं रह सकता था। उत्तर प्रदेश में जब फरवरी 2020 में कोरोना का पहला पॉज़िटिव केस आया तो उस समय यहाँ टेस्टिंग की एक भी लैब नहीं थी मगर आज एक दिन में 1.5 लाख से अधिक सैम्पल्स का परीक्षण किया जा रहा है।

प्रदेश में अब तक 2.83 करोड़ से अधिक सैम्पल्स का परीक्षण किया जा चुका है। यह योगी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि है। योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में पॉज़िटिविटी दर 5 प्रतिशत से नीचे है। वहीं मृत्यु दर 1.3 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि कोरोना से रिकवरी की दर 90 प्रतिशत के करीब पहुँच गई है।

कोरोना को मात देने के लिए सीएम योगी ने बहुस्तरीय नीतियाँ बनाकर कार्य करना शुरू किया, स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत किया, बड़ी संख्या में सैम्पल्स की टेस्टिंग शुरू की गई, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और क्लोज़ सर्विलांस का कार्य शुरू किया। प्रदेश में कोविड दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करवाया गया।

जब कोविड टीका आया तो इसमें भी उत्तर प्रदेश आगे निकल गया। प्रदेश में अन्य राज्यों की अपेक्षा सर्वाधिक टीकाकरण किया गया है। पहले चरण में 6.43 लाख से अधिक स्वास्थ्य एवं फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण हो चुका है। लेकिन समझिए क्या है योगी का कोरोना मॉडल?

टीम-11 बनाकर नियमित मॉनिटरिंग

कोरोना के विरुद्ध बनाई गई रणनीति के क्रियान्वयन और जवाबदेही तय करने के लिए योगी ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम-11 का गठन किया। साथ ही जनपद स्तर पर भी जनपदीय अधिकारियों की एक टीम बनाने के निर्देश दिए गए ताकि ऊपर से नीचे तक सब की जिम्मेदारी तय हो सके। शासन स्तर पर गठित टीम-11 के प्रत्येक अधिकारी को अन्य अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए एक कार्य सौंपे गए, जिन्हें प्रतिदिन अपने कार्यों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देनी होती है।

मजबूत स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर

सीएम योगी ने कोरोना से लड़ने के लिए प्रदेश में त्रिस्तरीय अस्पताल की व्यवस्था की। उत्तर प्रदेश सर्वाधिक ‘कोविड बेड्स’ वाला प्रदेश बना। उत्तर प्रदेश में 674 कोविड अस्पताल बने जिनमें लेवल-1 के 571 लेवल-2 के 77 और लेवल-3 के 26 कोविड अस्पताल। कोविड अस्पतालों में बेड्स की कुल उपलब्धता 1.57 लाख हो गई। प्रदेश के सभी 75 जिलों में कम से कम एक या एक से अधिक लेवल-2 कोविड अस्पताल बनाए गए।

प्रभावी टेस्टिंग

पहले पॉज़िटिव केस के समय एक भी टेस्टिंग लैब न होने से लेकर प्रदेश में टेस्टिंग के क्षेत्र में अद्वितीय प्रगति योगी के नेतृत्व में देखने को मिली। आज यूपी में 131 सरकारी लैब्स सहित कुल 234 टेस्टिंग लैब्स मौजूद हैं, जिनमें हर दिन लगभग 1.75 लाख सैम्पल्स की टेस्टिंग की जा रही है। प्रदेश में अब तक 2.83 करोड़ से अधिक सैम्पल्स का रिकॉर्ड परीक्षण करने वाला उत्तर प्रदेश, देश का पहला राज्य बन गया है।

प्रवासियों की घर वापसी एवं रोजगार प्रबंधन

देश के कोने-कोने से उत्तर प्रदेश के कामगारों और श्रमिकों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुँचाने के लिए सीएम योगी ने 45 लाख प्रवासियों के लिए ऑपरेशन घर वापसी चलाया। सहस्रों की संख्या में क्वारंटीन केंद्र, आश्रय गृह और सामुदायिक रसोई तैयार करवाए गए। देश के अलग-अलग प्रदेशों से प्रवासियों को लाने के लिए 1,660 ट्रेनें चलाई गईं।

प्रदेश सरकार ने प्रवासियों को वापस लाने के लिए भोजन और पानी जैसी सभी बुनियादी चीजें सुनिश्चित की। लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रवासी मजदूरों और निराश्रितों को लगभग 6.75 करोड़ खाद्य पैकेट्स का वितरण किया गया। प्रवासियों को 30 दिन के राशन की किट और ₹1,000 का भत्ता देकर, चिकित्सा जाँच के बाद उन्हें होम क्वारन्टीन के लिए भेजा जाता था।

इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 53 लाख निर्माण मजदूरों, पटरी व्यवसायियों, गाड़ी खींचने वालों और दैनिक वेतनभोगियों को भी डीबीटी के माध्यम से ₹1,000 रुपये दिए गए। योगी सरकार ने प्रवासियों को रोजगार प्रदान करने के लिए उनकी स्किल मैपिंग की और उन्हें विभन्न औद्योगिक इकाइयों में रोजगार उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा प्रवासी श्रमिकों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम योजना के तहत रोजगार प्रदान किया गया।

आर्थिक मोर्चे पर भी डटे रहे योगी

एक तरफ कोरोना का प्रभावी प्रबंधन तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ावा, यह दोनों कार्य योगी ने बखूबी करके दिखाए। महामारी के दौर में भी योगी सरकार ने प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को लगातार रफ्तार दी। वित्तीय वर्ष पूरा होने से करीब दो महीने पहले ही योगी सरकार ने 92 फीसदी का अपना राजस्व का लक्ष्य हासिल कर लिया था।

योगी ने कोरोना काल में सभी आवश्यक औद्योगिक एवं कृषि संबंधी गतिविधियों को गतिमान रखा। कोरोना काल में 8 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को क्रियाशील किया गया, जिनमें 51 लाख से अधिक मजदूर कार्यरत हैं। आत्मनिर्भर योजना के अंतर्गत 4.35 लाख औद्योगिक इकाइयों को 10,744 करोड़ रुपये का ऋण का वितरण किया गया। मजदूरों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए एक श्रम रोजगार आयोग की भी स्थापना की गई है।

कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोपरि मानने वाले योगी अपने पूर्वजन्म के पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके थे। जिस वक्त योगी को अपने पिता की मृत्यु का समाचार मिला था वे उस वक्त कोविड नियंत्रण को लेकर बैठक कर रहे थे। उन्होंने निर्णय लिया कि वे लॉकडाउन के नियमों का पालन करेंगे और अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। योगी ने राजधर्म का पालन करते हुए पिता के अंतिम संस्कार में शामिल न होकर महामारी से लड़ने और अपने प्रदेशवासियों को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने का फैसला लिया था।

महेंद्र कुमार सिंह वरिष्ठ स्तंभकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं। समीर निगम वरिष्ठ पत्रकार हैं।