राजनीति
योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कैसे पाया ‘ईज़ ऑफ़ डुइंग बिज़नेस’ में दूसरा स्थान

उत्तर प्रदेश ने राज्य व्यापार सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) 2019 – ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग’ (ईओडीबी) में एक बड़ी छलांग लगाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उत्तर प्रदेश 2017-18 में 12वें स्थान पर था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने इस रैंकिंग में महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना जैसे कई राज्य जो अग्रणी थे, उन्हें पीछे छोड़ यह उपलब्धि प्राप्त की है। यूपी अब केवल आंध्र प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है।

मुख्यमंत्री योगी की यह उपलब्धि उन पूर्वाग्रह से ग्रसित आलोचकों को करारा जबाब है जो कहते नहीं थकते कि उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं बदला। बदला बहुत कुछ है, लेकिन शायद कुछ लोग जान-बूझकर आँखे बंद कर लेना चाहते हैं। योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में व्यापार के प्रति मित्रवत् माहौल बना है, प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है, लालफीताशाही को खत्म करने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी हैं।

राज्य में देश-विदेश के छोटे-बड़े सभी उद्योगपति निवेश कर रहे हैं या करने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं। यह मार्च 2017 से सत्ता में आने के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘नए उत्तर प्रदेश’ के विज़न तथा सही नीयत और पारदर्शी नीति से काम करने का ही परिणाम है कि करीब तीन वर्ष पहले असंभव दिखने वाली उपलब्धि प्रदेश ने हासिल की है।

यूपी के मुख्यमंत्री ने कहा “उत्तर प्रदेश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए पूर्ण प्रयास कर रहा है। ईओडीबी रैंकिंग में दूसरी स्थान हासिल करना इसका प्रमाण है”।

यह अपने आप संभव नहीं हुआ। रैंकिंग में इस उल्लेखनीय, अद्भुत उपलब्धि के पीछे है डीपीआईआईटी के सुझाए गए 187 सुधारों में से 186 को योगी सरकार द्वारा लागू किया जाना। इस तेज़ उछाल के लिए मुख्य उत्प्रेरकों में से एक रहा ‘निवेश मित्र’ सिंगल विंडो पोर्टल द्वारा पिछले दो वर्षों में प्राप्त लगभग 2.3 लाख प्राप्त अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) में से 94 प्रतिशत का निस्तारण किया जाना।

इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश ने मई 2020 से ही अपने 75 जिलों को जिलावार ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ की रैंकिंग में रैंक देना शुरू कर दिया है। एक अग्रणी के रूप में, यूपी ने पहले ही राज्य बीआरएपी 20-21 सुधारों को लागू करना शुरू कर दिया है, जिसमें प्रस्तावित 301 सुधारों में से 170 सुधारों को लागू किया जा चुका है।

गौरतलब है कि बीआरएपी का इस साल का प्रयास पूरी तरह से ‘यूज़र फीडबैक’ यानी उद्यमियों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित था, ऐसे में देश भर में दूसरी रैंक प्राप्त करना यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व की सरकार द्वारा इन कार्यान्वित सुधारों का सही लाभ उद्यमियों तक पहुँचा रहा है।

ये सुधार श्रम विनियमन, ऑनलाइन सिंगल विंडो, सूचना और पारदर्शिता, भूमि प्रशासन, निर्माण अनुमति, वाणिज्यिक विवाद और निरीक्षण समर्थन जैसे कई क्षेत्रों में फैले हुए थे। 20 से अधिक विभागों ने इस तरह के सुधारों को लागू किया। इन कड़े आर्थिक सुधारों को लागू करना कोई आसान काम नहीं था। इसके लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता थी जो योगी आदित्यनाथ ने दिखाई।

तकनीक के उपयोग से योगी ने ‘व्यापार और सरकार’ (बी2जी) के मध्य परस्पर संवाद प्रक्रियाओं के लिए पारदर्शिता और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को लागू करने पर ज़ोर दिया। राज्य में निवेश, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा बेहतर कारोबार के उद्देश्य से योगी सरकार ने 2018 और 2019 में दो निवेशक समिट आयोजित कर लाखों करोड़ रुपये के निवेश के समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जो ज़मीन पर परियोजनाओं के रूप में उतरते नज़र आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारे पर काम शुरू हो गया जिससे एयरोस्पेस तथा रक्षा क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता में कमी होगी। इसके साथ ही बुंदेलखंड से गुज़र रहे इस गलियारे से इस पिछड़े क्षेत्र का विकास होगा, औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और लोगों को रोजगार मिलेगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण तेज़ी से हो रहा है जिससे प्रदेश का पिछड़ा पूर्वी क्षेत्र प्रदेश की राजधानी के साथ-साथ अन्य एक्सप्रेसवे के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी से भी जुड़ जाएगा। पूर्वी क्षेत्र के पर्यटन, कृषि, औद्योगिक तथा वाणिज्यिक विकास में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण मील का पत्थर साबित होगा।

मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना का निर्माण कार्य अगले साल जनवरी में शुरू हो जाएगा। 628 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा। इसके पूरा होने पर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का ऐसा संजाल बिछ जाएगा जिससे कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में आने वाले इस राज्य को सामाजिक और आर्थिक विकास को और गति मिलेगी।

एक्सप्रेसवे का नेटवर्क, यूपी के शहरों को एयर कनेक्टिविटी के साथ-साथ ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ मापदंडों पर प्रदेश के सभी 75 जिलों की मासिक रैंकिंग जैसी पहल आगे चलकर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में यूपी के लिए कई और ऊँचाइयों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

ईओडीबी रैंकिंग में दूसरा स्थान पाना यह दर्शाता है कि योगी का ‘नए उत्तर प्रदेश’, ऐसा उत्तर प्रदेश जो बिज़नेस-फ्रेंडली हो, जो इन्वेस्टर-फ्रेंडली हो की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

महेंद्र कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं और वर्तमान में दी.द.उ. गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में सहायक आचार्य हैं, दीपेंद्र मोहन सिंह समाजशास्त्र विभाग में सहायक आचार्य हैं।