राजनीति
अपराजिता सारंगी का भाजपा में प्रवेश ओडिशा की राजनीति में क्या रंग लाएगा?

आशुचित्र- एक राज्य जहाँ महिलाएँ वोट बैंक का अहम हिस्सा हैं, अपराजिता सारंगी की ग्रामीण व शहरी महिलाओं में लोकप्रियता भाजपा के भविष्य की निर्धारक बन सकती है।

भाजपा में एक नामी हस्ती के प्रवेश से ओडीशा राजनीति में नया मोड़ आ गया है। इस वर्ष जब एक लोकप्रिय भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस) अपराजिता सारंगी ने समय से पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वीकार कर ली तब राज्य में उन्हें लेकर अनेक बातें चल रही थीं। अंततः उन्हें प्रधानमंत्री से हरी झंडी मिली और वे आधिकारिक तौर पर पर पार्टी में सम्मिलित हो गईं। पार्टी में उनका स्वागत केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ओडीशा भाजपा के अध्यक्ष बसंत पांडा और राज्य प्रभारी अरुण सिंह की उपस्थित में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने किया।

सारंगी 1994 कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और बिना लाग-लपेट के सीधा काम करने के लिए ओडीशा में लोकप्रिय हैं। भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) की आयुक्त रहते हुए उन्होंने राजधानी के लिए जो कार्य किया, उसके लिए उन्हें भुवनेश्वर के रूपांतरण का श्रेय दिया जाता है। उनके द्वारा लाया गया परिवर्तन सड़क भूनिर्माण, स्वच्छता और लोगों को भीड़ से बचाने के लिए विशेष बिक्री ज़ोन की स्थापना में दृष्टिगोचर है। 2006 में उनके बीएमसी आयुक्त पद पर नियुक्त होने के बाद सर्वाधिक सौंदर्यीकरण अभियान चलाए गए। ये परिवर्तन इतने दृष्टिगोचर थे कि सारंगी भुवनेश्वर के घर-घर में जानी जाने लगीं।

सामूहिक शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग में निदेशिका के पद पर रहते हुए उन्होंने सर्वाधिक लोकप्रियता के साथ-साथ अनेक विवाद भी अपने हिस्से में बटोरे। बिहार के विद्यालय में शिक्षक माता-पिता के साथ बड़ी हुई सारंगी का मुख्य ध्यान स्कूली शिक्षा की ओर था। विद्यालय में शिक्षकों के लिए कड़े नियम और उनकी अनुपस्थिति के विरुद्ध कार्यवाही के कारण उन्हें अध्यापकों का आक्रोश भी झेलना पड़ा। वे स्कूली विभागों पर निगरानी रखने के प्रयासों के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए यूनिफॉर्म का प्रस्ताव भी लेकर आईं। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी इन पहलों और उदासीनता के प्रति शून्य सहनशीलता ने उन्हें ‘मैडम ऐंग्री’ (गुस्सैल अध्यापिका) की उपाधि दिलवाई। हालाँकि राज्य सरकार से किसी भी मनमुटाव की बात को सारंगी ने नकारा है लेकिन उनके कड़े प्रयासों के कारण 16 महीनों की अवधि में उनका तीन बार स्थानांतरण हुआ।

महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अंतर्गत मिशन शक्ति की निदेशिका रहते हुए उन्होंने स्व-सहायता समूहों और महिलाओं के सामूहिक संघों द्वारा महिलाओं के आर्थिक समावेश को संस्थानिक बनाया। मिशन शक्ति मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की घरेलु योजना थी और इसे एक सफल प्रयास बनाने के पीछे सारंगी की ही मुख्य भूमिका रही है। महिलाएँ नवीन पटनायक और बीजू जनता दल की वफादार मतदाता रही हैं और सारंगी ग्रामीण महिलाओं तक पहुँचने के लिए भाजपा का ब्रह्मास्त्र सिद्ध हो सकती हैं।

ओडीशा में अपराजिता सारंगी साफ छवि और निडर रवैये के लिए जानी जाती हैं। राज्य के राजनीतिक गलियारों में बात है कि सारंगी को भुवनेश्वर से सांसद की टिकट दिया जाएगा क्योंकि वहाँ उनकी अच्छी पकड़ है। इसके अलावा उनकी ईमानदारी और एक कर्त्तव्य-निष्ठ अधिकारी की उनकी छवि भाजपा को राज्य में अधिक विश्वसनीयता दिलाएगी। अंततः एक राज्य जहाँ महिलाओं का वोटबैंक अगले चुनावों को दिशा देता है, सारंगी की ग्रामीण और शहरी महिलाओं में लोकप्रियता भाजपा के चुनावी अभियान में दिलचस्प परिवर्तन लाएगी।