राजनीति
क्यों 1984 दंगों में सज्जन कुमार की दोषसिद्धि के बाद कमल नाथ आ सकते हैं चपेट में

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार पर 1984 के सिख-विरोधी दंगों में शामिल होने का आरोप सिद्ध हुआ है। इससे दंगों में विवादास्पद भूमिका निभाने वाले कमल नाथ जो हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, पर भी ध्यान केंद्रित किया जाने लगा है।

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद अब कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जो लोग दंगों में मारे गए निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्होंने कमल नाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन लोगों ने कमल नाथ पर सिख-विरोधी दंगों में सम्मिलित होने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद दंगों में 3,000 सिखों का कत्लेआम हुआ था।

17 दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कुमार को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। यह फैसला निचली अदालत से विपरीत रहा। कुमार सहित पाँच अन्य लोगों पर एक ही परिवार के पाँच सिखों- केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुवेंदर सिंह, नरेंदर पाल सिंह तथा कुलदीप सिंह की हत्या का आरोप था। दिल्ली छावनी के राज नगर क्षेत्र में भीड़ द्वारा इनकी हत्या कर दी गई थी। इस भीड़ का नेतृत्व कुमार कर रहे थे।

दंगों के आरोपियों के खिलाफ़ कानूनी लड़ाई लड़ रहे वकील व सक्रिय कार्यकर्ता एचएस फुल्का ने दंगों में कमल नाथ की भूमिका भी बताई है।

पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए फुल्का ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। फुल्का पंजाब विधानसभा के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि अभी तक कुल 541 केस दर्ज किए गए हैं तथा अभी तक केवल 13 हत्याओं के केस में ही दोष सिद्ध हुए हैं। उनके अनुसार 186 मामलों की पुन: जाँच की जा रही है जिनमें से एक में कमल नाथ के खिलाफ ठोस सबूत हैं। फुल्का ने यह भी कहा कि उनके पास साक्ष्य हैं कि भीड़ का नेतृत्व कांग्रेस के नेता कर रहे थे, जिनके पास दिल्ली में सिख निवासों के पते की सूचियाँ भी थीं।

फुल्का ने कहा कि दंगों के आरोपियों को सज़ा दिलाने की बजाय कांग्रेस उनका कद बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, “उन्हें मंत्री बनाया गया, तथा ऊँचे पद दिए गए।” उन्होंने आगे कहा, “सिख-विरोधी दंगों में कमल नाथ के खिलाफ ठोस सबूत हैं और वह कानून से नहीं बच सकते। समय के कारण किसी को भी न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। अत: कमल नाथ को भी जल्द ही सजा मिलेगी।

नानावटी आयोग तथा न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग को दिया गया वरिष्ठ पत्रकार संजय सूरी का शपथ पत्र कमल नाथ की दंगों में भूमिका का एक प्रमुख सबूत है। संजय उस समय दिल्ली में द इंडियन एक्सप्रेस  में कार्यरत थे। सूरी ने कहा नाथ “खून की प्यासी” भीड़ को निर्देशित कर रहे थे तथा नई दिल्ली के रकाब गंज में स्थित गुरुद्वारे में सिखों पर हुए अत्याचार तथा नृशंसता को देख रहे थे। उन्होंने कहा कि पैरामिलिट्री फोर्स तथा पुलिस भी मूकदर्शक बनी हुई थी।

2017 में पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य में हाई कमान का प्रतिनिधित्व करने हेतु तथा कांग्रेस के प्रचार-प्रसार के प्रबंधन हेतु कमल नाथ नियुक्त किए गए थे। बाद में पंजाब कांग्रेस तथा अकाली दल-भाजपा गठबंधन के कड़े विरोध के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा था।

ब्राह्मण समुदाय के नाथ मूलत: कानपुर के हैं तथा एक संपन्न व्यवसायी घराने से संबंध रखते हैं। उन्हें कांग्रेस हाईकमान द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया गया था।

मध्य प्रदेश के राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार सिख विरोधी दंगों के आरोप होने के बाद भी कमल नाथ को पद देना ठीक नहीं है जबकि कांग्रेस के पास ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूप में बेहतर विक्लप उपस्थित था।

नाथ को राजनीति के क्षेत्र में धन की व्यवस्था करने वाले के रूप में जाना जाता है। उनके कई बड़े उद्योगपतियों तथा व्यवसायियों सहित अंबानी तथा अदाणी परिवार से गहरे संबंध हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को तैयार करने के लिए कमल नाथ बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। वे गाँधी परिवार की तीनों पीढ़ियों, इंदिरा, राजीव, सोनिया तथा राहुल के करीबी तथा विश्वासपात्र रहे हैं।

वहीं दिल्ली के भाजपा नेता ने कमल नाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध करते हुए तथा उन पर सिख विरोधी दंगों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए अनिश्चित्कालीन भूख हड़ताल आरंभ कर दी है।

शिरोमणी अकाली दल ने भी कमल नाथ को मुख्यमंत्री बनाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दल के अनुसार राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली पार्टी दंगे पीड़ितों के ज़ख्मों पर नमक छिड़क रही है।