राजनीति
क्यों तीखे हो रहे हैं राहुल गांधी के बयान, हेराल्ड मामले में उन्हें भय है

आशुचित्र-

  • राहुल गांधी के गुस्से का कारण उनका तथा उनकी माता का नेशनल हेराल्ड मुद्दे में फँस जाने का डर हो सकता है।
  • इसी कारण राफेल सहित मोदी सरकार से जुड़े अन्य प्रत्येक मुद्दे पर घोटाले तथा भ्रष्टाचार की बातें कहने की उन्हें ज़रूरत पड़ती है।

हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में मिली अनपेक्षित पराजय से भारतीय जनता पार्टी एक चिंतित राष्ट्रीय पार्टी बन गई है लेकिन कांग्रेस पार्टी में अधिक निराशा पसरी है। यह राहुल गांधी के बेतुके बयानों से स्पष्ट होता है।

कुछ दिनों पहले राहुल ने कहा था, जब तक वह सारे ऋण माफ़ न कर दें, “वह मोदी को सोने नहीं देंगे”। राहुल को पता होना चाहिए कि जब कई राज्यों ने छोटे किसानों के ऋण माफ़ कर दिए हैं तो प्रधानमंत्री शायद ही कभी सो पाते होंगे। इसके विपरीत उन्हें प्रधानमंत्री को अधिक सोने देना चाहिए जिससे वह 2019 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अधिक नुकसान न पहुँचा सकें।

राफेल सौदे में किसी भी प्रकार की अनियमितता को अस्वीकारते हुए कुछ दिनों पहले सर्वोच्च न्यायालय ने अपना निर्णय दिया था। उसके पहले के महीनों में तथा उसके बाद भी राहुल तथा उनकी पार्टी सभी पर असत्य कहने का आरोप लगा रही है। जब रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने गुप्तता का कारण बताकर कीमतों को उजागर करने से मना कर दिया था तब उन पर भी झूठ कहने के आरोप लगाए गए। उसके बाद कांग्रेस ने अनिल अंबानी के ऑफसेट सहयोगी बनने में भारतीय सरकार की भूमिका के विषय में डसॉल्ट के प्रमुख एरिक ट्रैपियर के बयान के भी झूठ होने का आरोप लगाया। जब एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने राफेल को एक अच्छा कदम बताया तब कांग्रेस के प्रवक्ता वीरप्पा मोइली ने उन पर भी झूठा होने का आरोप लगाया।

सर्वोच्च न्यायालय पर आरोप लगाने में राहुल गांधी ने कोई बेतुका कदम नहीं लिया लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह तथा उनकी पार्टी इस निर्णय से असंतुष्ट हैं। उन्होंने निर्णय की एक पंक्ति में दोष बताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक राफेल सौदे पर अपनी रिपोर्ट लोक लेखा समिति को भेज चुके हैं लेकिन यह सत्य नहीं है। लेकिन निर्णय इस बात पर आधारित नहीं था, जिसे सुधार की आवश्यकता हो तथा जिसके लिए सरकार अदालत गई हो। निर्णय में स्पष्ट कहा गया है कि इस सौदे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं है, ऐसे में तकनीकी विषयों पर निर्णय लेने के लिए अदालत सही संस्थान नहीं है। इस निर्णय का आधार लोक लेखा समिति को नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट न मिलना नहीं था।

कोई भी समझ सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहा। वहीं केंद्र से किसानों के ऋण माफ़ करने के साथ ही अन्य मुद्दों पर कांग्रेस का कड़ा रुख़ दर्शाता है कि राहुल चिंतित व्यक्ति हैं। राफेल मुद्दे को राजनीतिक मंच संयुक्त संसदीय समिति की माँग करते हुए जीवित रखा जा सकता है लेकिन राहुल का अतिशय कड़ा रुख़ क्या दर्शाता है?

यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए अगस्ता हेलीकॉप्टर सौदे में घोटाले के मामले में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल का प्रत्यर्पण तथा ऋण न चुकाने वाले और फरार विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर यूके की अदालत के निर्णय ने कांग्रेस द्वारा फुलाए गए दो अन्य गुब्बारे फोड़ दिए।

सीबीआई में अंदरूनी कलह के बाद भी इन दो कठिन प्रत्यर्पण मुद्दों पर मोदी सरकार की सफलता से नेशनल हेराल्ड मुद्दे को लेकर गांधी परिवार उत्तेजित हुआ होगा जिसमें वह भी आरोपी है।

सत्र 2011-12 के सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी के कर निर्धारण की पुन: जाँच करने की अनुमति आयकर विभाग को न देने के लिए इस महीने के आरंभ में सर्वोच्च न्यायालय ने मना कर दिया था। यह वही सत्र था जब नेशनल हेराल्ड से सम्बद्ध अख़बार, अधिक कीमत वाली बहादुर शाह ज़फ़र मार्ग पर स्थित हेराल्ड बिल्डिंग समेत नेशनल हेराल्ड के मालिक की संपत्ति एक ट्रस्ट को सौंप दी गई थी जिसका संचालन गांधी परिवार के जिम्मे है।

पिछले सप्ताह दिल्ली के उच्च न्यायालय ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) तथा नेशनल हेराल्ड के हेराल्ड हाउस से निष्कासन के आदेश दे दिए थे जब सरकार ने 56 वर्ष पुरानी लीज को यह बताते हुए समाप्त कर दिया था कि संपत्ति का उपयोग उस उद्देश्य से नहीं किया जा रहा जिसके लिए यह दी गई है। सरकार ने कहा था कि पिछले 10 वर्षों में एक भी प्रिंटिंग प्रेस का उपयोग नहीं किया गया।

अदालत ने पाया, “जिस उद्देश्य से संपत्ति लीज पर दी गई थी वह उद्देश्य अब नहीं बचा है।” साथ ही याचिकाकर्ताओं द्वारा अखबार तथा ऑनलाइन संस्करण का संचालन नहीं होना भी बताया गया है।

नेशनल हेराल्ड मुद्दा किसी भी रूप में देखने पर गांधी परिवार के लिए निष्कपट नहीं दिखेगा। यह 2008 में  एजेएल के बंद होने से आरंभ हुआ और कांग्रेस पार्टी द्वारा 90 करोड़ का ऋण देने में अटक गया तथा इसमें 2,000 करोड़ की संपत्ति का मुद्दा भी जुड़ा हुआ था।

वर्ष 2010 में सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी तथा दो अन्य कांग्रेसी नेताओं मोतीलाल वोरा तथा ऑस्कर फर्नांडीज की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले एक निजी ट्रस्ट ने 50 लाख की राशि के भुगतान के लिए कांग्रेस से 90 करोड़ का ऋण लिया तथा उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने जताया था कि यह ऋण वसूला नहीं जा सकता और इस तरह से 50 लाख का भुगतान कर गांधी परिवार के पास 2,000 करोड़ की संपत्ति का नियंत्रण हो गया। यह ट्रस्ट गैर लाभकारी है लेकिन संपत्ति पर कमाए गए पैसे उपयोग करने का अधिकार रखता है।

राहुल गांधी के गुस्से का कारण उनका तथा उनकी माता का नेशनल हेराल्ड मुद्दे में फँस जाने का डर हो सकता है।इसी कारण राफेल सहित मोदी सरकार से जुड़े अन्य प्रत्येक मुद्दे पर घोटाले तथा भ्रष्टाचार की बातें कहने की उन्हें ज़रूरत पड़ती है। गांधी परिवार अब जटिल मुश्किलों में फँस सकता है इसलिए किसी भी कीमत पर उनका सत्ता में आना बहुत आवश्यक है।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।