राजनीति
जलवायु परिवर्तन एक ओर, पटना की अव्यवस्था के प्रति उदासीनता बाढ़ का असल कारण

बिहार की राजधानी पटना में भयावह बाढ़ आई हुई है। बाढ़ के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। हालात को देखते हुए सरकार ने एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की 35 टीमें राहत बचाव के लिए तैनात की है।

1975 के बाद पहली बार बिहार की राजधानी में ऐसी स्थिति देखने को मिली है। 80 प्रतिशत घरों में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। स्थिति यह है कि सरकार के मंत्री और विधायकों के घर तक में बाढ़ का पानी जमा हुआ है। 45 साल बाद आए इस बाढ़ ने राजधानी को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

राज्य की सत्ता से लेकर अफसरशाही का केंद्र पटना है, लेकिन जहाँ पूरे बिहार की नीति बनें वहीं राज्य सरकार की नीति पंगु हो जाए तो ज़िम्मेदार किसे माना जाए?

पटना की अव्यवस्था इसके लिए सबसे ज्यादा ज़िम्मेदार है। पटना के अदूरदर्शी और अकुशल योजनाकार, वहाँ के लापरवाह नागरिक, बिल्डर और शहर की स्थलाकृति ही बाढ़ के लिए ज़िम्मेदार है‌।

शहर में गैर-कानूनी तरीके से खुले कोचिंग सेंटर और जगह-जगह छात्रों के लिए बने लॉज सरकार के अतिक्रमण के कानून को खुली चुनौती देते हैं, जिसके कारण शहर में मलजल उपचार और नाले का पानी निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है।

शहर के अधिकतर छोटे-छोटे तालाबों को भरकर भू-माफियाओं ने अवैध मकान बनाकर कब्जा कर लिया है। पिछले महीने ही अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर सरकार से मतभेद होने के बाद पटना नगर निगम आयुक्त ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

इसके अलावा, गंगा और पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर ने पटना की जल-निकासी को पूरी तरह से रोक दिया है, जिसके कारण शहर के निचले भाग में मकान के पहले तले तक पानी पहुँच चुका है।

राज्य सरकार ने पटना में बाढ़ आने के पीछे जलवायु परिवर्तन और अधिक वर्षा होने को जिम्मेदार माना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “बाढ़ आने के पीछे का कारण एक तो जलवायु परिवर्तन और दूसरा पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश है।”

पटना में आई इस बार की बाढ़ कई रिकॉर्ड ध्वस्त करने में लगी है। इस साल 28 सितंबर सुबह 8.30 बजे से 29 सितंबर सुबह 8.30 बजे (24 घंटे) तक 151. 9 मिलीमीटर बारिश रिकाॅर्ड की गई है। इस बारिश से तीन साल पहले 12 सितंबर 2016 को 24 घंटे में दर्ज 133.8 मिलीमीटर बारिश का रिकाॅर्ड पीछे छूट गया। यह पटना की सर्वकालीन बारिश के रिकार्ड 158 मिलीमीटर से केवल करीब 7 मिलीमीटर कम है।

सबसे अधिक बारिश का यह रिकाॅर्ड 3 सितंबर, 2013 काे दर्ज किया गया था, फिलहाल यह रिकॉर्ड नहीं टूटा है, लेकिन मौसम विभाग ने अनुमान व्यक्त किया है कि बारिश अगर आज भी होती रही तो यह रिकॉर्ड टूट सकता है।

जलवायु परिवर्तन के निदान को लेकर जुलाई में राज्य सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन यह बैठक बेनतीजा रहा। राज्य सरकार अपनी नाकामियों से बचने के लिए बार-बार अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को आगे कर देती है।

पटना में आई बाढ़ की इस विभीषिका पर जिला कलेक्टर से लेकर राज्य सरकार तक वर्षा छूटने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचने की बात कह रहे हैं, यानी पूरी सरकार भगवान भरोसे बैठी है।

सरकार और अखबार बाढ़ के लिएकिसी को भी ज़िम्मेदार ठहराएँ लेकिन इसकी सजा वहाँ की जनता ही भुगत रही है‌ अगर वर्षा अनुमान के अनुसार रुक भी गई तो पटना को सामान्य होने में काफी समय लगेगा।

शासन भले बरसात बंद होने के बाद नुकसान का आँकलन कर भरपाई की बात कह रहा हो, लेकिन पटना ने सरकारी लापरवाही, सत्ता माफियाओं के गठजोड़ और आम जनों के जन-जागरुकता के प्रति उदासीन रवैए का नुकसान झेल लिया है।

आने वाले समय में यह देखना होगा कि सरकार इससे स्थाई निदान के लिए क्या कार्ययोजना लाती है? या हमेशा प्राकृतिक के भरोसे ही रहेगी?