राजनीति
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अचानक बढ़े अपराधों में दोष किसका

प्रदेश में लगातार बढ़ रहे अपराध के बीच उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने लखनऊ क्षेत्र के सभी अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह ने सितंबर महीने में बढ़े अपराध पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया। राज्य के पुलिस महानिदेशक ने अधिकारियों की समीक्षा बैठक में अपराधियों के बढ़ रहे हौसले पर चिंता जताई।

उत्तर प्रदेश में अपराध मुक्त के सरकारी दावों पर राजधानी लखनऊ में हुई वारदातों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक बढ़े इन अपराधों ने राज्य की कानून व्यवस्था को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

सितंबर महीने के 22 दिन में ही 12 से अधिक सार्वजनिक जगहों पर गोलीबारी हुई, जिसमें चार लोगों की हत्या कर दी गई। उक्त सभी घटनाएँ अकेले राजधानी लखनऊ की हैं, जिसके बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है।

राज्य में जहाँ संगठित अपराधों पर नियंत्रण लगा है, वहीं छिटपुट अपराध की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे कई कारण है।

राजधानी लखनऊ में हुए सितंबर महीने के 12 गोलीकांड में से पुलिस ने सात की फाइल बंद कर दी है। पुलिस के अनुसार ये सभी मामले आपसी लड़ाई के हैं, लेकिन गोलीबारी के दौरान उपयोग हुए हथियार पर पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।

यह पुलिस व्यवस्था और उसके जाँच पर बड़ा सवाल उठाता है कि आखिर अपराध के लिए उपयोग किए गए हथियार कहाँ से आए? पुलिस छापेमारी में पकड़े गए सभी हथियार एमआई-9 श्रेणी के थे, जो बिहार के मुंगेर में बने थे।

सातों गोलीबारी मामले की बात करें तो उसमें उपयोग होने वाले हथियार देशी थे, जिनकी आपूर्ति बिहार के मुंगेर से हुई थी। पुलिस अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुँच पाई है कि आखिर ये हथियार बिहार से उत्तर प्रदेश कैसे आए? ना ही पुलिस अभी-तक किसी बड़े हथियार तस्कर को पकड़ पाई है।

मुंगेर से लखनऊ में होने वाले हथियार आपूर्ति का इतिहास पुराना है। योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद इसपर नकेल कसने की बात गया था, लेकिन फिर से हथियार आपूर्ति ने पुलिस के कार्यप्रणाली के दावे पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

इसके साथ ही राज्य में हो रहे लगातार पुलिस के स्थानांतरण भी इसके लिए जिम्मेदार है। लगातार हो रहे बड़े से छोटे अधिकारियों के स्थानांतरण ने पुलिस महकमे को स्थिर कर दिया है। चुनाव के बाद ही राजधानी लखनऊ के सभी थानेदार का स्थानांतरण सरकार ने कर दिया था। इसके कारण कई बार पुलिस अधिकारी से लेकर थानेदार तक अपने क्षेत्र को समझ नहीं पाते हैं और जब तक समझते हैं, तब तक वारदात हो जाती है।

लखनऊ पुलिस ने अपराध रोकथाम पर अमल के लिए काम करना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने नई पुलिसिंग व्यवस्था की बात कही है। पुलिस अधीक्षक ने कहा, “लखनऊ में पिछले दिनों बढ़े अपराध के पीछे चल आबादी एक बड़ा कारण है। लखनऊ पुलिस इसपर से निदान पाने के लिए काम शुरू कर दिया है।”

रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2019 के बीच लखनऊ में चल आबादी की संख्या दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है। 2011 में जहाँ यह संख्या 29.6 प्रतिशत था, वहीं 2019 में 54 प्रतिशत पर जा पहुँची है।

उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के साथ-साथ अगर छिटपुट अपराध पर भी रोक नहीं लगाई गई तो अपराध मुक्त प्रदेश की बात अखबार के विज्ञापन पर ही सिमटकर रह जाएगी। छिटपुट अपराध के साथ अपराधियों का हौसला बढ़ता जाएगा और फिर यह संगठित अपराध में बदल सकता है।