राजनीति
“टीपू ने हिंदुओं की हत्या की और मंदिरों को नष्ट किया”: संगठनों ने जयंती न मनाने के लिए सरकार को चेताया

सिद्दारमैया सरकार के टीपू जन्मोत्सव मनाने का निर्णय पूर्व कर्नाटका राज्य के सबसे विवादास्पद निर्णयों में से एक था। 2017 में सरकार के निर्णय के विरुद्ध प्रतिक्रिया में कई संगठन और राजनीतिक पार्टियों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया था और जन्मोत्सव न मनाने की माँग की थी।

इस वर्ष दो समूहों ने एक चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द से जल्द अपना निर्णय वापस नहीं लेती तो वे सरकार के विरुद्ध आंदोलन चलाएँगे। यह माँग इसलिए आ रही है क्योंकि समूह मानते हैं कि टीपू ने हिंदुओं का नरसंहार किया था और कई मंदिरों को नष्ट किया था। टीपू जयंती 10 नवंबर को मनाई जाती है। कुछ दिनों पहले कर्नाटका के उप-मुख्यमंत्री डॉ.जी.परमेश्वरा ने घोषणा की थी कि गत वर्षों की तरह ही जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

राजवीर मदकरीनायक गौरव संरक्षण वेदिके महंतेश नायक के संयोजक ने डेक्कन हेराल्ड में कहा था, “टीपू और उसके पिता हैदर अली ने चित्रदुर्ग में हज़ारों लोगों को मारा था। टीपू जयंती हमारे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का अपमान करती है लोकिन फिर भी कड़ी सुरक्षा के साथ सरकार इसे मनाती है। हम इस वर्ष एक आंदोलन छेड़ेंगे अगर सरकार अपने निर्णय के साथ आगे जाती है।”

दूसरा समूह जिसने टीपू जयंती का विरोध किया है, वह बैंगलुरु आधारित टीपू जयंती विरोधी समिति है।