राजनीति
हमारे बहुसंख्यक विरोधी और अल्प्संख्यक हितैषी शिक्षा कानूनों को बदलने का है समय
हमारे बहुसंख्यक विरोधी और अल्प्संख्यक हितैषी शिक्षा कानूनों को बदलने का है समय

प्रसंग
  • ‘स्वराज्य’ कुछ इस्लामिक देशों समेत 20 देशों के शिक्षा कानूनों पर एक नज़र डालता है और पाता है कि इन देशों में धर्म और जाति के आधार पर किसी भी समूह के खिलाफ भेदभाव के लिए कोई मंजूरी नहीं मिली है

पिछली पोस्टों की एक शुरुआती श्रृंखला में हमने शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के लिए अधिकारों के सन्दर्भ में भारतीय संविधान में विसंगतियों पर सम्मान के साथ विस्तार से नज़र डाली है। अनुच्छेद 30 के तहत ऐसा एक अधिकार केवल धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए मौजूद है न कि बहुसंख्यक समुदाय के लिए।

पिछले लेखों में अनुच्छेद 30 के इतिहास, क्रम-विकास और निहितार्थ पर व्यापक रूप से गौर किया गया है। यह लेख विभिन्न देशों के संविधानों में दिए गए प्रावधानों की जांच करेगा जो शिक्षण संस्थानों के लिए अपने “सभी” नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करते हैं।

ऐसे कुछ देश हैं जो शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए अपने अल्पसंख्यकों (जातीय समुदायों) को विशिष्ट अधिकार प्रदान करते हैं। हालाँकि इन प्रावधानों के साथ बहुसंख्यकों के अधिकारों को भी भली-भांति संरक्षित किया गया है, जिसका आगे उल्लेख किया गया है।

जर्मनी

फेडरल रिपब्लिक ऑफ़ जर्मनी के ‘मूल कानून’ में अपनी स्कूल प्रणाली के लिए एक विशेष अनुच्छेद है। यह अनुच्छेद 7, निजी स्कूलों की स्थापना के लिए अपने नागरिकों को स्पष्ट अधिकार देता है।

“अनुच्छेद 7(4)- निजी स्कूलों को स्थापित करने के अधिकार की गारंटी होगी। निजी स्कूल जो राज्य विद्यालयों के विकल्पों के रूप में कार्य करते हैं उन्हें राज्य की मंजूरी की आवश्यकता होगी और ‘वेलैंडर के नियमों’ के अधीन होंगे। ऐसी मंजूरी तब दी जाएगी जब निजी स्कूल अपने शैक्षणिक उद्देश्यों, अपनी सुविधाओं या अपने शिक्षकों के पेशेवर प्रशिक्षण के सन्दर्भ में राज्य स्कूलों की अपेक्षा दोयम दर्जे के न हों और तब जब विद्यार्थियों का उनके अभिभावकों के अनुसार  प्रथक्करण को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।”

यदि शिक्षण कर्मचारियों की आर्थिक और कानूनी स्थिति पर्याप्त विश्वस्त नहीं होती है तो मंजूरी रोक दी जाएगी।”

यह स्पष्ट है कि यह अधिकार सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं और इसमें कोई शर्तें लागू नहीं हैं। इसी दस्तावेज का अनुच्छेद 3 यह घोषणा करते हुए इस बिंदु को रेखांकित करता है कि किसी विशेष विशिष्टा के आधार पर किसी भी नागरिक का न तो पक्ष लिया जायेगा और न ही भेदभाव किया जायेगा।

“अनुच्छेद 3(3)- लिंग, पितृत्व, जाति, भाषा, मातृभूमि और उत्पत्ति, आस्था या धर्म या राजनीतिक मतों के कारण किसी भी व्यक्ति के साथ पक्षपात नहीं किया जायेगा। विकलांगता के कारण किसी भी व्यक्ति का अपमान नहीं किया जायेगा।”

स्पेन

स्पेनिश संविधान की धारा 27 शिक्षा से सम्बंधित अपने नागरिकों के अधिकारों के बारे में बात करती है। एक विशिष्ट प्रावधान है जो शिक्षण संस्थानों को स्थापित करने के अधिकार प्रदान करता है।

“धारा 26(6)– शिक्षण केन्द्रों की स्थापना के लिए व्यक्तियों और कानूनी संस्थाओं का अधिकार मान्य है बशर्ते वे संवैधानिक सिद्धांतों का सम्मान करें।”

देखें कि यह अधिकार धर्म, भाषा या किसी अन्य मापदंड के आधार पर किसी भी विचार से बंधा नहीं है। पुनः पुष्टि करने के लिए हम संविधान की धारा 14 पर भी नज़र डाल सकते हैं जो ऐसे मानकों के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाती है।

“धारा 14 कहती है कि कानून के समक्ष स्पेनिश लोग एक समान हैं और जन्म, जाति, धर्म, मत या किसी अन्य व्यक्तिगत या सामाजिक स्थिति या परिस्थिति के कारण किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार से भेदभाव नहीं किया जा सकता है।”

दक्षिण अफ्रीका

दक्षिण अफ्रीका का इतिहास नस्लीय भेदभाव (रंगभेद) भरा रहा है और इसलिए इसे अपने सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की आवश्यकता सर्वोपरि थी, जिसमें विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना था कि देशज समुदायों को कोई नुकसान न उठाना पड़े। उस सन्दर्भ को ध्यान में रखते हुए शिक्षण संस्थानों की स्थापना से सम्बंधित प्रावधान के लिए इसके संविधान पर एक नज़र डालते हैं ।

“धारा 29 (3) –प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वयं के व्यय पर आत्मनिर्भर शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने और उनका संरक्षण करने का अधिकार है जो – (ए) जाति के आधार पर भेदभाव न करते हों; (बी) राज्य के साथ पंजीकृत हों; और (सी) उन मानकों को कायम रखते हों जो तुलनीय सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों के मानकों से कमतर न हों।”

लेख में ‘प्रत्येक व्यक्ति’ शब्द पर ध्यान दीजिये। इसके नागरिकों के सभी वर्गों को समान अधिकार दिए गए हैं।

दक्षिण अफ़्रीकी शिक्षा नीति अधिनियम आगे इस संवैधानिक सिद्धांत को और मजबूत करता है जो इस प्रकार है:

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 4 के निदेशात्मक सिद्धांत। धारा 3 में निर्दिष्ट नीति को निम्न के प्रतिनिर्देशित किया जायेगा –(ए) संविधान के अध्याय 2 के सन्दर्भ में, और संसद द्वारा अनुमोदित अंतर्राष्ट्रीय संधियों के सन्दर्भ में, और विशेष रूप से अधिकार के सन्दर्भ में प्रत्याभूत प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की वृद्धि और सुरक्षा -……. (vii) हर व्यक्ति को स्थापित करने के लिए समान भाषा, संस्कृति या धर्म के आधार पर व्यावहारिक शिक्षण संस्थान जहां पर जाति के आधार पर  कोई भेदभाव नहीं हो;

इसलिए दक्षिण अफ्रीका शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए किसी भी समुदाय या व्यक्ति को विशेष रूप से कोई समर्थन नहीं देता है।

जॉर्डन

जॉर्डन में, राज्य का धर्म इस्लाम है। इसलिए निजी स्कूलों को नियंत्रित करने वाले उनके संवैधानिक प्रावधानों को देखना विशेष रूप से दिलचस्प हो जाता है।

“अनुच्छेद 19– धार्मिक समूहों को अपने स्वयं के सदस्यों की शिक्षा के लिए अपने स्वयं के स्कूल स्थापित करने और उनका पोषण करने का अधिकार होगा बशर्ते वे कानून के सामान्य प्रावधानों का पालन करें और अपने पाठ्यक्रम और अभिविन्यास से संबंधित मामलों में सरकार के नियंत्रण के अधीन रहें।”

जब इस अधिकार की बात आती है तो समुदायों के बीच कोई भेद नहीं होता है।आइए संविधान के अनुच्छेद 6(i) को देखें जो अनुच्छेद 19 के तहत दी गई समानता की हमारी समझ को मजबूत करता है।

“अनुच्छेद 6(i)– जॉर्डन निवासी कानून के समक्ष एकसमान होंगे। जाति, भाषा या धर्म के आधार पर उनके अधिकारों और कर्तव्यों के सम्बन्ध में उनके बीच कोई भेदभाव नहीं होगा।”

अधिकार और कर्तव्य दोनों के सम्बन्ध में जॉर्डन का संविधान धर्म या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करता है। इसलिए अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार सही मायने में इसके सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध है।

सिंगापुर

सिंगापुर के संविधान की धारा 16 शिक्षा से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने नागरिकों को अधिकार प्रदान करती है। यह धारा अपने सभी नागरिकों को धार्मिक शैक्षणिक संस्थानों सहित उनकी पसंद के संस्थानों की स्थापना के लिए समान अधिकारों की गारंटी देती है।

“16 – (1)अनुच्छेद 12 के सर्व-साधारण नियम के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, धर्म, जाति, वंश या जन्म स्थान के आधार पर सिंगापुर के किसी भी नागरिक से कोई भी भेदभाव नहीं होगा – (ए) सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा पोषित किसी भी शैक्षणिक संस्थान के प्रशासन में, और, विशेष रूप से, विद्यार्थियों या छात्रों के प्रवेश या शुल्क में; या (बी) किसी भी शैक्षणिक संस्थान (चाहे एक सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा संरक्षित हो या न हो और चाहे सिंगापुर के भीतर हो या बाहर) में विद्यार्थियों या छात्रों के संरक्षण या शिक्षा के लिए सार्वजानिक प्राधिकरण की वित्तीय सहायता से धन उपलब्ध कराने में। (2) प्रत्येक धार्मिक समूह को बच्चों की शिक्षा के लिए और स्वयं के धर्म के निर्देश देने के लिए संस्थान स्थापित करने और संरक्षित करने का अधिकार है, और इस तरह के संस्थानों से सम्बंधित किसी भी कानून में या ऐसे किसी भी कानून के प्रशासन में केवल धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।

अनुच्छेद का व्याख्यान यह बताता है कि इस क्षेत्र में समानता के प्रति सिंगापुर के दृष्टिकोण पर आगे और व्याख्या देना अनावश्यक है।

ब्राज़ील

ब्राज़ील के संविधान की धारा 29 निजी स्कूलों की स्थापना का अधिकार देती है। यह कहती है:

“अनुच्छेद 209 – शिक्षण निजी उद्यम के लिए खुला है बशर्ते निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाए: 1.– राष्ट्रीय शिक्षा के सामान्य नियमों का अनुपालन; 2 – सरकार द्वारा गुणवत्ता का प्रमाणीकरण और मूल्यांकन”

इसके नागरिकों के किसी भी वर्ग का कोई पक्ष नहीं लिया गया है और न ही कोई समुदाय इस अधिकार से वंचित है।

आयरलैंड

आयरिश संविधान के अनुच्छेद 42 की धारा 4 निजी शिक्षण संस्थानों की स्थापना का अधिकार प्रदान करती है। कोई भी विशेष प्रावधान किसी भी समुदाय का पक्ष नहीं लेता है और न ही किसी वर्ग को अधिकारों से वंचित किया गया है।

“अनुच्छेद 42 (4)– राज्य निःशुल्क शिक्षा प्रदान करेगा और निजी एवं कॉर्पोरेट शैक्षणिक पहल की पूर्ति के लिए और उचित सहायता देने के लिए प्रयास करेगा और जब जनता को इसकी ज़रुरत हो तब, अभिभावकों के अधिकारों, जो विशेष रूप से धार्मिक और नैतिक होंगे, दूसरे शैक्षणिक सुविधाओं या संस्थानों को उचित सम्मान के साथ प्रदान करेंगे।

आयरिश संविधान के अंतर्गत प्रावधान जो धर्म पर बात करते हैं, यह और भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी मामले में किसी भी धार्मिक समुदाय के साथ पक्षपात या भेदभाव नहीं किया जायेगा।

“अनुच्छेद 44 (2) उपधारा (3)– राज्य किसी अक्षमता को लागू नहीं करेगा या धार्मिक पेशे, विश्वास या स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा। उपधारा (4)– विद्यालयों के लिए राज्य सहायता प्रदान करने वाला कानून अलग-अलग धार्मिक सम्प्रदायों के प्रबंधन के तहत स्कूलों के बीच न ही भेदभाव करेगा और न ही किसी भी बच्चे को वित्तिय पोषित स्कूल में दाखिला करते समय उसके अधिकार के प्रतिकूल प्रभाव को प्रभावित करेगा।

पुर्तगाल

पुर्तगाली संविधान का अनुच्छेद 43 शिक्षण का अधिकार प्रदान करता है। यह किसी भी भेदभाव के बिना अपने सभी नागरिकों को आश्वस्त करता है।

“अनुच्छेद 43 – पढने और पढ़ाने की स्वतंत्रता 1. पढने और पढ़ाने की स्वतंत्रता की गारंटी होगी। 2. राज्य किसी भी दार्शनिक, सौन्दर्यात्मक, राजनीतिक, वैचारिक या धार्मिक निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम निर्धारित नहीं करेगा। 3. सार्वजनिक शिक्षा सांप्रदायिक नहीं होगी। निजी और सहकारी स्कूल बनाने के अधिकारों का होना सुनिश्चित होगा।”

समानता और गैर-भेदभाव से सम्बंधित संविधान के प्रावधान इसे और भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी समुदाय को किसी भी अधिकार या कर्तव्य से वंचित नहीं किया जायेगा।

“अनुच्छेद 13(2)– किसी भी व्यक्ति को वंश, लिंग, जाति, भाषा, जन्म स्थान, धर्म, राजनीतिक या विचारधारात्मक विश्वासों, शिक्षा, आर्थिक स्थिति, सामाजिक परिस्थितियों या यौन अभिविन्यास के आधार पर विशेषाधिकार नहीं दिया जायेगा, उसका पक्ष नहीं लिया जायेगा, पक्षपात नहीं होगा, किसी भी अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा या किसी भी कर्तव्य से छूट नहीं दी जाएगी।”

ग्रीस

ग्रीक संविधान की धारा 16 निजी शैक्षणिक संस्थानों को चलाने के अधिकार देती है और बिना किसी भेदभाव के।

“अनुच्छेद 16(8) – स्कूलों की स्थापना और संचालन के लिए लाइसेंस देने के नियम और शर्तें राज्य के स्वामित्व में नहीं हैं, इनका पर्यवेक्षण और शिक्षण कर्मचारियों की पेशेवर स्थिति कानून द्वारा निर्दिष्ट किया जायेगा।अनुच्छेद 13 (1)– धार्मिक विवेक की स्वतंत्रता अनुल्लंघनीय है। नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता का उपभोग व्यक्ति की धार्मिक मान्यताओं पर निर्भर नहीं है।”

अनुच्छेद 13 (1) यह व्यापक रूप से स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 16 (8) के तहत अधिकार किसी भी धार्मिक संबद्धता पर निर्भर नहीं है।

चिली

चिली का संविधान इस बात पर प्रकाश डालने के लिए दिलचस्प तरीकों का उपयोग करता है कि शिक्षण संस्थानों को खोलने का अधिकार विशेष रूप से किसी भी पक्षपात या पूर्वाग्रह से मुक्त है।

“अनुच्छेद 19 (11)– शिक्षा की स्वतंत्रता में शैक्षणिक संस्थानों को खोलने, व्यवस्थित करने और संरक्षित करने का अधिकार शामिल है। नैतिकता, अच्छी प्रथाओं, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा द्वारा निर्धारित सीमाओं के अलावा शिक्षा की स्वतंत्रता की अन्य कोई सीमा नहीं है”

मिस्र

मिस्र के संविधान में एक सरल प्रावधान है जो इसके शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता की गारंटी देता है। यह प्रावधान इसे कुछ एक समुदायों तक सीमित करने वाले या दूसरों को वंचित करने वाले किसी भी उपनियम या धारा से मुक्त है।

“अनुच्छेद 21 – राज्य विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक एवं भाषाई अकादमियों की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।यह वैश्विक गुणवत्ता मानदंडों के अनुसार विश्वविद्यालय शिक्षा प्रदान करने और कानून के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों में निःशुल्क विश्वविद्यालय शिक्षा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इटली

इटली के संविधान का अनुच्छेद 33 अपने नागरिकों को अपने स्वयं के शिक्षण संस्थान चलाने का एक गैर-भेदभावपूर्ण अधिकार प्रदान करता है। दरअसल, यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि ऐसे सभी संस्थानों को “पूर्ण स्वतंत्रता” दी जायेगी।

“अनुच्छेद 33 – संस्थाओं और व्यक्तियों को राज्य के हिस्से में बिना किसी व्यय के शिक्षा के स्कूलों और संस्थानों को स्थापित करने का अधिकार है। गैर राज्य स्कूलों, जो समानता का अनुरोध करते हैं, के लिए अधिकारों और दायित्वों को निर्धारित करते समय कानून यह सुनिश्चित करेगा कि इन स्कूलों को पूर्ण स्वतंत्रता मिले और अपने विद्यार्थियों को उसी स्तर की शिक्षा और योग्यता प्रदान करे जैसी राज्य स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है।”

दरअसल अनुच्छेद 3 यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालता है कि सभी नागरिकों की पूर्ण समानता के अवरोधों को हटाया जाए और देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संगठनों में एक समान व्यवहार किया जाए।

“अनुच्छेद 3 – लिंग, जाति, भाषा, धर्म, राजनीतिक मत, व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितियों के भेद के बिना सभी नागरिकों के पास कानून के समक्ष समान सामाजिक प्रतिष्ठा है। यह आर्थिक और सामाजिक प्रकृति की उन बाधाओं को दूर करने के लिए गणतंत्र का कर्तव्य है जो नागरिकों की स्वतंत्रता और समानता को बाधित करती हैं, जिससे मानव व्यक्ति के पूर्ण विकास और देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संगठन में सभी कार्यकर्ताओं की प्रभावी भागीदारी मेंअवरोध उत्पन्न होता है।”

जमैका

जमैका अपने सभी नागरिकों को धार्मिक या “कोई शिक्षा” प्रदान करने के लिए सभी धार्मिक समुदायों को समान अवसर प्रदान करता है। इसके संविधान का अनुच्छेद 17 ऐसा अधिकार प्रदान करता है।

“अनुच्छेद 17(3)– प्रत्येक धार्मिक निकाय या संप्रदाय के पास इसके द्वारा प्रदान की गयी शिक्षा के दौरान इस निकाय या संप्रदाय के व्यक्तियों को धार्मिक निर्देश प्रदान करने का अधिकार होगा, चाहे उस निकाय या संप्रदाय को शिक्षा के ऐसे पाठ्यक्रमों की लागत को पूर्ण या आंशिक रूप से पूरा करने के लिए रूपांकित किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी, अनुदान या अन्य प्रकार की वित्तीय सहायता मिलती हो या न मिलती हो।”

कजाखस्तान

कजाखस्तान का संविधान यह स्पष्ट करता है कि राज्य“समरूप” मानकों को लागू करेगा जिनका “किसी भी” शिक्षण संस्थान द्वारा अनुपालन किया जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो सभी प्रकार के निजी शिक्षण संस्थान समान नियमों और मानकों के अधीन हैं।

“अनुच्छेद 303 – नागरिकों के पास कानून द्वारा स्थापित आधार और शर्तों के आधार पर निजी शिक्षण संस्थानों में भुगतान और शिक्षा प्राप्ति का अधिकार होगा। 4. राज्य शिक्षा में एकसमान अनिवार्य मानकों को स्थापित करेगा। किसी भी शिक्षण संस्थान की गतिविधि को इन मानकों का पालन करना होगा।

मलेशिया

वर्तमान समय में मलेशिया एक उत्कृष्ट केस स्टडी है। मलेशिया का राज्य धर्म है इस्लाम। इसमें धार्मिक विविधता के अलावा जातीयता के आधार पर अल्पसंख्यक भी हैं। फिर भी, मलेशिया का संविधान शिक्षण संस्थानों की स्थापना में समानता की गारंटी देने वाले राज्य का एक उल्लेखनीय उदहारण है। संविधान का अनुच्छेद 12 कहता है:

“12. शिक्षा के सम्बन्ध में अधिकार: अनुच्छेद 8 की सामान्यता के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, धर्म, जाति, वंश या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी नागरिक के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं होगा (ए) सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा पोषित किसी भी शैक्षणिक संस्थान के प्रशासन में, और, विशेष रूप से, विद्यार्थियों या छात्रों के प्रवेश या शुल्क में; या(बी) किसी भी शैक्षणिक संस्थान (चाहे सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा संरक्षित हो या न हो और चाहे संघ के भीतर हो या बाहर) में विद्यार्थियों या छात्रों के संरक्षण या शिक्षा के लिए सार्वजानिक प्राधिकरण की वित्तीय सहायता से धन उपलब्ध कराने में। (2) प्रत्येक धार्मिक समूह को इसके स्वयं के धर्म में बच्चों की शिक्षा के लिए संस्थानों को स्थापित और संरक्षित करने का अधिकार है, और इस तरह के संस्थानों से सम्बंधित किसी भी कानून में या ऐसे किसी भी कानून के प्रशासन में केवल धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा; लेकिन यह संघ या एक राज्य के लिए विधिसम्मत होगा कि वह इस्लामी संस्थानों की स्थापना करने या संरक्षण करने में संस्थापनया संरक्षण या सहायता करे या इस्लाम धर्म में निर्देश प्रदान करने में सहायता करे और उद्देश्य के लिए आवश्यक ऐसे व्ययों का वहन करे।

एक इस्लामिक राज्य होने के बावजूद मलेशिया इस मामले में सभी धार्मिक समूहों को समान अधिकार प्रदान करता है।

मेक्सिको

मेक्सिको का संविधान भी शैक्षिक संस्थानों की स्थापना करने के लिए अपने सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है और यहाँ निजी संस्थाओं को भी एकमात्र प्रक्रिया जमीन संबंधी कानूनों का पालन करने की जरूरत होती है।

“अनुच्छेद 3(VI) निजी संस्थाएं सभी प्रकार की शिक्षा प्रदान कर सकती हैं। कानून के अनुसार, राज्य में निजी संस्थानों में किए गए अध्ययनों की आधिकारिक मान्यता प्रदान करने और रद्द करने की शक्तियां होंगी। पूर्वस्कूल में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के साथ ही साथ शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज, निजी स्कूलों के मामले में:(क) दूसरे भाग के  दूसरे अनुभाग में समाहित उद्देश्यों और मानदंडों के अनुसार शिक्षा प्रदान करें, साथ ही साथ अनुच्छेदI II में उल्लिखित पाठ्यक्रम का भी अनुपालन करने के लिए; और (ख)कानून द्वारा प्रदान की गई शर्तों के तहत अधिकारियों से पिछले और स्पष्ट अनुज्ञा प्राप्त करें।”

नीदरलैंड

नीदरलैंड का संविधान इस मामले में अपने सभी नागरिकों के लिए गैर-भेदभावपूर्ण अधिकार प्रदान करता है।

अनुच्छेद 23 (4) प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक नगर पालिका में पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक-प्राधिकरण स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा प्रदान की जाए।

अनुच्छेद 23 (4). अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर नगर पालिका में पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक-प्राधिकरण के स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा प्रदान की जाए। संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित नियमों के तहत इस प्रावधान से विचलन की अनुमति दी जा सकती है कि यह शिक्षा के ज्ञात रूप को प्राप्त करने का अवसर है चाहे इसको सार्वजनिक स्कूल में लिया जाए या किसी अन्य स्कूल में। 5. धार्मिक या अन्य मान्यताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान करने की स्वतंत्रता के लिए निजी स्कूलों को उचित सम्मान के साथ, सार्वजनिक रूप से या सार्वजनिक निधियों से पूरी तरह वित्त पोषित स्कूलों के मानकों को संसद के अधिनियम द्वारा विनियमित किया जाएगा। 6. प्राथमिक शिक्षा के लिए आवश्यकताएं ऐसी होंगी कि सार्वजनिक खर्च पर चलने वाले निजी स्कूल और सार्वजनिक प्राधिकरण पर चलने वाले स्कूल दोनों के मानक पूरी तरह से गारंटी हैं। प्रासंगिक प्रावधान विशेष रूप से निजी स्कूलों की स्वतंत्रता और उनके शिक्षण सहायक उपकरण चुनने और मनपसंद शिक्षकों को नियुक्त करने के लिए कोई रूकावट उत्पन्न नहीं करेंगे।

पोलैंड

पोलैंड का संविधान एक रोचक उदाहरण है। पिछली शताब्दी के इतिहास के प्रकाश में, जातीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा राज्य के लिए एक बड़ी चिंता है। इसलिए, इसके संविधान में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और अधिकार सहित शैक्षणिक गारंटी के लिए एक सुव्यक्त प्रावधान है।

अनुच्छेद 35 (2) राष्ट्रीय एवं जातीय अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों के स्थापन, धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए परिकल्पित संस्थानों के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मामलों के प्रस्ताव में हिस्सा लेने का अधिकार होगा।

हालांकि, सबसे दिलचस्प बात यह है कि गैर-अल्पसंख्यकों के लिए एक अलग अनुच्छेद के तहत समान अधिकार गारंटीकृत है, और समान अधिकार स्पष्टतया घोषित किए गए हैं।

अनुच्छेद 703. माता-पिता को अपने बच्चों के लिए सार्वजनिक स्कूलों के अलावा अन्य स्कूलों का चयन करने का अधिकार होगा। नागरिकों और संस्थानों को प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों एवं शैक्षिक विकास संस्थानों के स्थापन का अधिकार होगा। गैर-सार्वजनिक विद्यालयों के स्थापन और संचालन की शर्तों, उनके वित्तपोषण में सार्वजनिक प्राधिकरणों की भागीदारी, साथ ही साथ ऐसे स्कूलों और शैक्षिक विकास संस्थानों के शैक्षिक पर्यवेक्षण के सिद्धांतों को कानून द्वारा निर्दिष्ट किया जाएगा।

रोमानिया

रोमानियाई संविधान में, अल्पसंख्यकों और गैर-अल्पसंख्यकों के बीच अधिकारों और उनकी सापेक्ष स्थिति का मुद्दा उच्च स्तर पर संबोधित किया गया है, जो शिक्षा सहित सभी संस्कृतियों पर लागू होता है। यह एक अतिव्यापी ढाँचा प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत समाज के किसी भी विशेष वर्ग के खिलाफ भेदभाव करना या पक्षपात करना नामुमकिन हो जाता है। रोमानियाई संविधान का अनुच्छेद 6 इस सार को दर्शाता है।

अनुच्छेद 6. पहचान का अधिकार। राज्य राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के सदस्यों को उनकी जातीय, सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान को संरक्षित करने, विकसित करने और व्यक्त करने के अधिकार को पहचानता है, और गारंटी देता है। 2. राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के सदस्यों की पहचान को संरक्षित करने, विकसित करने और व्यक्त करने के लिए राज्य द्वारा उठाए गए सुरक्षा उपायों को अन्य रोमानियाई नागरिकों के संबंध में समानता और गैर-भेदभाव के सिद्धांतों के अनुसार किया जाएगा।

जबकि संविधान अल्पसंख्यकों की अपनी संस्कृति को संरक्षित करने की आवश्यकता को मान्यता देता है और इसलिए उन्हें सुव्यक्त अधिकार देने की आवश्यकता यह भी स्पष्ट करती है कि यह अन्य नागरिकों के विरुद्ध विपरीत भेदभाव में परिवर्तित नहीं होगा।

स्लोवाकिया

स्लोवाकिया के संविधान को भी अपनी जातीय और अन्य अल्पसंख्यकों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने वाला पाया गया। अन्य पूर्वी यूरोपीय राष्ट्रों की तरह स्लोवाकिया भी ऐसे अल्पसंख्यकों के अधिकार प्रदान करता है। हालांकि, यह साफ तौर पर जाहिर है कि ऐसा कोई भी अधिकार या संरक्षण गैर-अल्पसंख्यकों के अधिकारों को जोखिम में नहीं डालेगा।

अनुच्छेद 341. स्लोवाक गणराज्य में निवास करने वाले राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों या जातीय समूहों के नागरिकों के व्यापक विकास के लिए विशेष रूप से अल्पसंख्यक या जातीय समूह के अन्य सदस्यों के साथ अपनी संस्कृति को विकसित करने, अपनी मातृभाषा में जानकारी प्राप्त करने और उसे प्रसारित करने, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक संघों में सहयोग करने और शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक संस्थान स्थापित करने और उनको बनाए रखने के अधिकार की गारंटी देता है। विवरण का कानून द्वारा निर्धारण किया जाएगा। 2. मातृभाषा को सर्वोच्च बनाए रखने के अधिकार के अतिरिक्त, राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों या जातीय समूहों से संबंधित नागरिकों के पास कानून द्वारा परिभाषित शर्तों के तहत भी एक गारंटी हैः अ) अपनी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार, ब) आधिकारिक रूप से अपनी भाषा का उपयोग करने का अधिकार, स) राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों और जातीय समूहों से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार, 3. इस संविधान में गारंटीकृत राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों और जातीय समूहों से संबंधित नागरिकों के अधिकारों का अभ्यास, स्लोवाक गणराज्य की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और इसके अन्य निवासियों के खिलाफ भेदभाव को जोखिम में नहीं डाल सकता है।

इसलिए स्लोवाकिया में कोई भी कानून ऐसा नहीं है जिससे अल्पसंख्यकों को दिए जाने वाले किसी भी अधिकार से नागरिकों के एक वर्ग के साथ भेदभाव किया जाता हो। इस प्रकार वहाँ एक संतुलित और व्यावहारिक समानता व्याप्त है।

भारत

हमने इस आर्टिकल में 20 से ज्यादा देशों के संविधानों पर नजर डाली है। सभी संविधान शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन के लिए अपने नागरिकों को अधिकार देने के बारे में खुलकर बात करते हैं। हालांकि, उनमें से कोई भी इसे किसी एक वर्ग या नागरिकों के समूह को पूरी तरह से प्रदान नहीं करता है। अधिकार, अनिवार्य रूप प्रत्येक मामले में, सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं।

दूसरी ओर भारत में, केवल धर्म या भाषा से अल्पसंख्यकों को ऐसे अधिकार प्रदान किए गए हैं। दूसरी ओर, अनगिनत शिक्षा कानूनों और नियमों के बावजूद, देश यह सुनिश्चित करता है कि अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित शैक्षिक संस्थानों पर सरकार का कड़ा नियंत्रण रहे।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30(1) मौजूदा समय में इस प्रकार हैः

‘’ शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने और उनको प्रशासित करने के लिए अल्पसंख्यकों का अधिकार (1) सभी अल्पसंख्यकों, चाहे धर्म के आधार पर हों यो भाषा के आधार पर, के पास अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने और उनको प्रशासित करने का अधिकर होगा।

लोगों की माँग की अनुसार उपरोक्त अनुभाग को एक ऐसे तरीके से बदला जाना है जो सभी समुदायों को बराबर अधिकार प्रदान करता हो, इस प्रकार हैः

‘’ शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने और उनको प्रशासित करने के लिए अल्पसंख्यकों का अधिकार (1) सभी नागरिकों के पास अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने और उनको प्रशासित करने का अधिकार होगा।

जब संविधान में इस तरह के संशोधनों को प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाए केवल तभी हम एक गैर-भेदभावपूर्ण राष्ट्र होने का दावा कर सकते हैं जोकि विधि नियम द्वारा शासित होता है।