राजनीति
स्वच्छता स्वयंसेवकों का यह समूह स्वच्छ भारत मिशन से आगरा में ला रहा है बदलाव
स्वच्छ भारत मिशन आगरा

प्रसंग
  • स्वच्छ भारत अभियान के लिए प्रतिबद्ध स्वयंसेवकों के एक समूह द्वारा आगरा में एक प्रेरणादायक सफाई अभियान संचालित किया जा रहा है।

सुबह 7 बजे, जब हम में से कई लोग अपनी रविवार की सुबह की नींद का आनंद ले रहे थे, तब आगरा में राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (एनएच 19) की सुल्तानगंज क्रॉसिंग पर लगभग 50 लोगों का एक समूह एकत्र होता है। इस समूह में पुरुष, महिलाएं, युवा, मध्यम आयु वर्ग के लोग और किशोर शामिल हैं। समूह की ऊर्जा बढ़ाते हुए आठ से नौ बच्चे हैं, जो अपने माता-पिता के साथ लगे हुए हैं। गहरे नीले रंग की टी-शर्ट पहने हुए “इंडिया राइजिंग” के स्वयंसेवक फुर्ती से कार्य कर रहे हैं। पेंट की बाल्टियों और ब्रशों को एक पुरानी टूटी-फूटी मारुति 800 कार, जो समूह की एकमात्र संपत्ति है और समूह को दान स्वरूप मिली थी, से उत्साहपूर्वक निकाला जाता है।

एक ऐसे शहर के लिए, जो देश की पर्यटक राजधानी के रूप में अपने महत्व के बावजूद अपनी धूल-धक्कड़ और गंदगी की वजह से आगंतुकों से तिरस्कार प्राप्त करता है, वहां इंडिया राइजिंग द्वारा स्वच्छता के लिए आगरा के धर्मयुद्ध का अच्छा प्रदर्शन हो रहा है। समूह के उत्साह ने शहर के कई प्रमुख स्थलों का चेहरा बदल दिया है।

हर रविवार, स्वयंसेवक एक जगह पर इकट्ठे होते हैं। रविवार को, राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर नव निर्मित फ्लाईओवर की बारी थी। समूह के बुजुर्ग जहाँ अपने शहर को साफ-सुथरा देखने की इच्छा से प्रेरित हैं, वहीं बच्चों के लिए यह एक मनोरंजक कार्य है। नौ वर्षीय साची, जिसे पेंटिंग से प्यार है, को एक बड़े कैनवास का आकर्षण और भी रोमांचक लगता है। जहाँ साची के पिता अंकित गर्ग ने इंडिया राइजिंग के साथ साची को जोड़ा था वहीं साची अब उन पर रविवार की सुबह जल्दी उठने और इंडिया राइजिंग टीम में शामिल होने पर जोर देती हैं।

जब तक सदस्य अपना काम करते हैं, मैं एक अनौपचारिक बातचीत शुरू करता हूँ। कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाने वाले नवीन नोहबर को पर्यटन मंत्री के. जे. अल्फॉन्स द्वारा आगरा के झोपड़-पट्टी होने के बारे में की गई एक हफ्ते पुरानी टिप्पणी से चोट पहुँची है। वह मंत्री को गलत साबित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। कर वकील नितिन जोहरी अधिक समझदार हैं। चार वर्ष पुराने संगठन का मुख्य आधार रह चुके व्यक्ति के रूप में वह आरोप को कुछ हद तक उचित पाते हैं। जोहरी दुःख प्रकट करते हैं कि नगर निगम के अधिकारियों की उपेक्षा और नागरिकों की उदासीनता, वर्तमान गड़बड़ी के लिए दोनों जिम्मेदार हैं। पेशे से एक सॉफ्टवेयर डेवलपर अमित गुप्ता सकारात्मक हैं कि आगरा जल्द ही सर्वश्रेष्ठ भारतीय शहरों की तरह स्वच्छ हो जाएगा। समूह के सदस्यों का उत्साह उल्लेखनीय है।

स्वच्छ भारत मिशन आगरा

इंडिया राइजिंग के अध्यछ संदीप अग्रवाल इस मिशन के कर्ता-धर्ता हैं। वह हमेशा अपने वाहन में एक स्क्रबर, वाइपर, डस्टर, साबुन, और विभिन्न सफाई उपकरण रखते हैं। वह उन लोगों का पीछा करते हैं और उन लोगों से मुकाबला करते हैं जो दीवारों पर पोस्टर चिपकाते हैं और जहां भी बन पड़ता है वे इन पोस्टरों को हटाना शुरू कर देते हैं। वह नासमझ स्थानीय लोगों को स्वच्छ भारत के गुणों के बारे में समझाते हैं। संदीप समूह की भावनाओं को दोहराते हैं जब वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत के संदेश ने न सिर्फ लोगों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूक किया है बल्कि नागरिकों को इसके लिए आगे आने के लिए प्रेरित भी किया है। अग्रवाल ने स्वच्छता शब्द को फैलाने के लिए स्वच्छता सन्देश को अपनी बेटी की शादी में भी सामने रखा था।

स्वच्छ भारत मिशन आगरा

मार्च 2014 में चार स्वयंसेवकों द्वारा शुरू किया गया इंडिया राइजिंग अब 70 सदस्यों तक पहुंच गया है। अपनी स्थापना के दिन से, समूह के पास एक अनिश्चित स्वच्छता अभियान था, जिसमें रविवार को भी शेड्यूल से बाहर नहीं रखा गया। न तो खराब मौसम और न ही त्यौहारों ने कभी भी इस अभियान को नहीं रोका। अब तक अपने 236 अभियानो में, समूह ने शहर में 103 जगहों को कवर किया है, जिसमें कई स्थानों को कई बार साफ़ करना पड़ा है। सदस्यों का उत्साह बढ़ता चला जाता है और यह उत्साह देखने वालों और पास से गुजरने वाले लोगों को आकर्षित करता है, और फिर वे उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों में शामिल हो जाते हैं। उनके काम से उन्हें विभिन्न नागरिक और सरकारी निकायों से प्रशंसा और सम्मान प्राप्त हुआ है। नगरपालिका अधिकारी भी उनके अनुरोधों पर जल्दी ही कार्यवाही करने की कोशिश करते हैं। पहले दिन से पूरी लगन से सेवा कर रहे एक स्वयंसेवक अमिताभ गुप्ता का मानना है कि स्वच्छ भारत केवल तब सफल हो सकता है जब यह मिशन सिर्फ फोटो खिचाने से परे हो जाएगा।

ढाई घंटे और सौ मीटर लंबी दीवार के बाद, कार्य समाप्त होता है। सदस्य कचौड़ियों, जो शहर का पारंपरिक नाश्ता है, का अपने श्रमदान के बदले प्रसाद के रूप में आनंद लेते हैं। दिन के अपने काम से संतुष्ट होकर और अपने चेहरे पर एक गर्व महसूस करते हुए, ये स्वछता के सिपाही आगे बढ़ जाते हैं और अगले रविवार का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

जबकि एक तरफ संशयवादी लोग स्वच्छ भारत अभियान को कमजोर करने में लगे हैं और नगर पालिका के अधिकारी संतोषजनक स्तर पर कार्य नहीं कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इंडिया राइजिंग जैसे संगठन साबित करते हैं कि स्वच्छ भारत अब एक जन आंदोलन है।