राजनीति
असली बाल दिवस- 51.5 प्रतिशत अधिक बाल श्रमिकों को बचाया गया, व्यवस्था तंत्र दुरुस्त

देशभर के शिकायत और निवारण व्यवस्था तंत्र में सुधार का लाभ अब आँकड़ों में भी देखा जा सकता है जहाँ प्राधिकारियों द्वारा बचाए गए बच्चों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना से 51.5 प्रतिशत बढ़ी है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डाटा के अनुसार 2017 में 29,979 बच्चों को बचाया गया था जिसकी संख्या 2018 में (1 सितंबर तक) बढ़कर 45,344 हो गई थी।

उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक बाल श्रमिक हैं लेकिन पिछले दो सालों में उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की गई थी। पाँच अन्य राज्य- छत्तीसगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उड़ीसा और उत्तराखंड में भी पिछले एक साल में एक भी बच्चे को नहीं बचाया गया है। हालाँकि बाल श्रम मामलों में दोषियों की संख्या घटी है, 2016 में 676 लोगों को दंड दिया गया था जबकि 2017 में 567 लोग ही दोषी पाए गए। सर्वाधिक दोषी उत्तर प्रदेश में पाए गए थे जहाँ इनकी संख्या 361 थी और इसके बाद पंजाब में 184 लोग दोषी पाए गए।

आकांक्षा फाउंडेशन की सपना शाह ने कहा, “यह पहली बार है जब सरकार सभी शिकायतों को एक मंच पर लेकर आई है। इससे प्राधिकारियों और आम जन के लिए भी इस परेशानी से लड़ने का रास्ता आसान हो गया है। लेकिन असली परिणाम तभी देखने को मिलेंगे जब प्रधिकारी इसे पूर्णतः लोगू करने में सफल होंगे।”, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस  ने बताया।

मंत्रालय के अधिकारी इस सफलता का श्रेय केंद्रीयकृत शिकायत केंद्र, बाल श्रम रोक के प्रभावशाली प्रवर्तन के प्लैटफॉर्म (पेंसिल) को देते हैं क्योंकि इन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में टास्क फोर्स को सम्मिलित कर अपनी दक्षता को बढ़ाया है।