राजनीति
‘प्रार्थना के अधिकार’ को राज्य की आर्थिक सहायता? तृप्ति देसाई ने केरला सरकार से माँगा सबरीमाला जाने का खर्च

सर्वोच्च न्यायालय के 28 सितंबर के निर्णय जिसके अनुसार प्रजनन आयुवर्ग की महिलाएँ भी सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं, पर रोक न लगने की खबर से उत्साहित महाराष्ट्र की ‘प्रार्थना के अधिकार’ की सक्रिय कार्यकर्ता तृप्ती देसाई ने घोषणा की कि वे अपनी छः सहयोगियों के साथ “संविधान द्वारा दिए गए प्रारथना के अधिकार का प्रयोग” करने के लिए 17 नवंबर को केरला पहुँचेंगी, द इंडियन एक्सप्रेस  न रिपोर्ट किया।

“हम 17 नवंबर को सबरीमाला पहुँचेंगे और जब तक हमें प्रार्थना नहीं करने दिया जाता, तब तक हम केरला से नहीं जाएँगे।”, देसाई ने कहा। उसने दावा किया कि उसे धमकियाँ मिल रही हैं और सुरक्षा के लिए उसने प्रधानमंत्री, केरला के मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस प्रमुख को पत्र लिखा है।

“मुझे फेसबुक पर 300 से ज़्यादा धमकियाँ मिल रही हैं। संदशों में मुझे मारने और केरला पहुँचते ही मेरे टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी मिली है। मुझसे घृणा और अकथ्य भाषा में बात की गई है।”, उसने जोड़ा।

दिलचस्प बात है कि रिपोर्ट के अनुसार देसाई ने राज्य सरकार से सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि अपनी पूरी टीम के केरला में होने वाले खर्चों को उठाने की भी माँग की है। “हम अनुरोध करते हैं कि सुरक्षा के साथ-साथ केरला में लगने वाली व्यवस्थाओं का खर्च और वापस महाराष्ट्र लौटने के लिए हमें खर्चा दिया जाए।”, केरला मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उसने लिखा।

केरला पुलिस ने तृप्ति देसाई के लिए किसी विशेष प्रावधान की बात को नकार दिया है। “कोई विशेष सुरक्षा नहीं दी जाएगी, देसाई के आम तीर्थयात्री ही है।”, रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने कहा।

लेकिन 28 सितंबर के निर्णय के बाद अब तक कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई है और आगे की गतिविधियों पर चर्चा करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

सबरीमाला में तीर्थ अवधि शुक्रवार (16 नवंबर) की शाम से शुरू हो रही है जब मंदिर के द्वार मंडलम-मकरविलक्कु पर्व के लिए खुलेंगे। लाखों श्रद्धालु 41 दिनों के कड़े व्रत के बाद भगवान अयप्पा की पूजा करने के लिए तीर्थ स्थान पर आते हैं।