राजनीति
अमेठी की ‘स्मृति’ में उतरने के लिए भाजपा का प्रयास कितना प्रभावशाली

2004 में राजनीति में प्रवेश करने वाले राहुल गांधी लगभग 15 वर्षों से अमेठी के सांसद रहे हैं। 2004 में वे 3,90,179 मतों से विजयी हुए थे, 2009 में 4,64,195 मतों से और 2014 में 4,08,651 मतों से। सिर्फ इन आँकड़ों को देखा जाए तो राहुल का प्रदर्शन स्थिर दिखता है।

लेकिन जब मत प्रतिशत पर नज़र डालते हैं तो स्थिति भिन्न नज़र आती है। राहुल गांधी को 2004 में 66.18 प्रतिशत मत और 2009 में 71.78 प्रतिशत मत मिले थे। लेकिन 2014 में मात्र 46.71 प्रतिशत मत ही उन्हें प्राप्त हुए थे और उनकी प्रबल विरोधी स्मृति ईरानी को 34.38 प्रतिशत मिले थे।

अब देखते हैं 2014 और 2019 में अमेठी में क्या बदला है। कुछ लोगों का मानना है कि 2014 में स्मृति ईरानी मोदी की लहर के कारण इतने मत जीत पाई थीं और ऐसी लहर अभी तक देखने को नहीं मिल रही जो स्मृति के लिए हानिकारक हो सकती है। वहीं दूसरी ओर ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बार सपा और बसपा अमेठी से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, इसका मतलब यह है कि सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होगा।

अभी तक लोकसभा टिकट की घोषणा नहीं की गई है लेकिन अमेठी में स्मृति के अनेक दौरों को देखकर लगता है कि संभवतः भाजपा राहुल के विरुद्ध स्मृति ईरानी को ही अमेठी में उतारेगी। स्मृति पर भाजपा का विश्वास तब देखने को मिला जब 2014 में मंत्री बनने वालों की सूची में स्मृति सबसे युवा मंत्री थीं। स्मृति के रूप में उभरते हुए खतरे को कांग्रेस पार्टी ने भाँपते हुए उनपर निशाना साधना शुरू कर दिया था।

मानव विकास मंत्री के रूप में दो साल के कार्यकाल में स्मृति पर कई सवाल उठाए गए। पहला विवाद उनकी डिग्री को लेकर हुआ, उसके बाद रोहित वेमुला आत्महत्या पर, फिर जेएनयू में दुर्गा माता को लेकर विवाद, जर्मन के स्थान पर संस्कृत, आईआईटी में शाकाहार और मांसाहार के लिए अलग मेस, आदि। इन विवादों से परेशान होकर भाजपा ने स्मृति को कपड़ा मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया।

अप्रधान समझे जाने वाले इस मंत्रालय को भी स्मृति ईरानी अपने समर्पण से मुख्यधारा में लेकर आईं। उत्तर-पूर्वी राज्यों पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने वहाँ रेशम के कारखानों पर 690 करोड़ रुपयों का निवेश किया। कुछ डाटाओं की तुलना करके प्रतीत होता है कि एक साल में कपड़ा उद्योग से 80 लाख लोगों को रोज़गार मिला।

स्मृति ईरानी अमेठी से अपना लगाव प्रदर्शित करती रही हैं। सितंबर 2018 में ही उन्होंने अमेठी के दो दौरे किए थे। 1 सितंबर को उन्होंने अमेठी के पहले डिजिटल गाँव पिंडारा ठाकुर का उद्घाटन किया था और 7 सितंबर को राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हुई थीं। दिसंबर 2018 में ग्रामोद्योग और खादी आयोग के एक समारोह के लिए भी अमेठी गई थीं।

दोनों ही नेताओं की समय-सारिणी में 4 जनवरी 2019 अमेठी के लिए निर्धारित था। एक तरफ स्मृति दोपहर ही व्यापारिक विमान से अमेठी पहुँची तो दूसरी ओर राहुल चार्टर्ड विमान से अपने संवैधानिक क्षेत्र पहुँचेंगे। कमल नाथ को कांग्रेस के समर्थन पर वार करते हुए स्मृति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बावजूद पार्टी अध्यक्ष चुप्पी साधने के बाद यहाँ के लोगों से आँख कैसे मिला पाएँगे। स्मृति एक अस्पताल के उद्घाटन के लिए अमेठी गई हैं, वहीं राहुल गांधी अधिवक्ता भवन के उद्घाटन के लिए जा रहे हैं।

लोकसभा चुनावों के पहले इन दौरों का दौर चलता रहेगा और आशा करते हैं कि यह चुनावी मुकाबला जनता का मनोरंजन करने के साथ उनके लिए हितकारी भी सिद्ध हो।