राजनीति
चिन्मयानंद ने स्वीकारे अधिकांश अपराध, जानिए आरोप-प्रत्यारोपों का पूरा घटनाक्रम

एसआईटी की टीम ने आज (20 सितंबर) को स्वामी चिन्मयानंद को उनके शाहजहाँपुर के मुमुक्षु आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद न्यायालय ने उन्हें 14 दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

इस मामले पर एसआईटी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी देते हुए कहा है कि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। शुक्रवार को एसआईटी की पूछताछ में चिन्मयानंद ने माना कि उससे गलती हो गई कि उसने मालिश के लिए छात्रा को अपने कमरे में बुलाया था। इस दौरान चिन्मयानंद ने कहा कि वह अपने किए पर शर्मिंदा है और उससे बड़ी भूल हुई है।

स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली एलएलएम की एक छात्रा ने 24 अगस्त को एक वीडियो जारी कर स्वामी चिन्मयानंद पर शारीरिक शोषण और कई लड़कियों की ज़िंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया था।

एसआईटी ने यह भी बताया कि पीड़ित छात्रा के दो चचेरे भाइयों और उसके एक दोस्त को भी गिरफ्तार किया है। इन तीनों पर चिन्मयानंद को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पाँच करोड़ रुपये मांगने का आरोप है। एसआईटी की पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्होंने चिन्मयानंद से वीडियो के एवज में 5 करोड़ रुपये की मांग की थी।

वीडियो वायरल होने के कुछ ही देर बाद लड़की लापता हो गई थी, जिसके बाद लड़की के घरवालों ने थाने में अपहरण का मामला दर्ज करवाया था। 28 अगस्त को लड़की अपने दोस्त के साथ राजस्थान से पकड़ी गई। इस मामले की जाँच को सर्वोच्च न्यायालय ने लड़की के पत्र को संज्ञान में लेते हुए एसआईटी को सौंप दिया है।

इससे पहले, एसआईटी द्वारा धारा 164 के तहत पीड़िता के बयान दर्ज होने के बाद भी तीन दिन तक स्वामी की गिरफ्तारी नहीं होने पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए थे, जिसके बाद पीड़िता ने आत्मदाह करने की धमकी दी थी। पीड़िता का कहना था कि प्रशासन सरकार के साथ मिलकर स्वामी को बचाने का प्रयत्न कर रही है।

गिरफ्तारी के बाद पीड़ित लड़की ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अब बाबा किसी से मालिश नहीं करवा पाएँगे। लड़की ने लंबी लड़ाई की बात करते हुए कहा, “मैं उनसे डरूँगी नहीं, मेरे पास सबूत हैं। उन्होंने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी। उन्होंने कई लोगों की जिंदगी बर्बाद की है। लेकिन अब वे किसी की जिंदगी बर्बाद नहीं कर पाएँगे।“ इस पूरे केस की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर रही है।

स्वामी चिन्मयानंद पर इससे पहले भी 2011 में उनके आश्रम की ही एक सहायिका ने बालात्कार का आरोप लगाया था, जिसे कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वापस लेने की घोषणा की थी। पीड़िता ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है।

राम मंदिर आंदोलन से राजनीति में आए स्वामी चिन्मयानंद तीन बार सांसद और एक बार केंद्रीय राज्यमंत्री रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि महंत अवैद्यनाथ से नज़दीकी के कारण ही चिन्मयानंद पर उत्तर प्रदेश पुलिस और योगी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी, जिससे पीड़िता को मीडिया के सामने आना पड़ा।