राजनीति
बंगाल बचाओ अभियान- किस तरह से ममता को बेनकाब करने की तैयारी में है भाजपा

प्रसंग
  • बंगाल बचाओ अभियान का उद्देश्य देश के बाकी हिस्सों में बनर्जी के असली चेहरे को सामने लाना है ताकि उन्हें राज्य में सत्ता से बेदखल कर बंगाल को बचाने के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाया जा सके।

भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में “बंगाल की खेदजनक स्थिति का खुलासा करने” और “लोकतंत्र के पूर्ण विचलन” के लिए एक 360-डिग्री देशव्यापी अभियान शुरू किया है। शनिवार की शाम को नई दिल्ली में संविधान क्लब में आयोजित एक औपचारिक बैठक में इस अभियान को शुरू किया गया। इस अभियान का उद्देश्य बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन के ट्रैक रिकॉर्ड को “बेनकाब” करके, राष्ट्रीय स्तर के नेता के रूप में पेश करने की उनकी महत्वाकांक्षाओं को और प्रधानमंत्री पद के लिए उनकी लालसा को खत्म करना है।

‘बंगाल बचाओ‘ नामक इस अभियान में बंगाल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए देश के बाकी हिस्सों में बंगाली प्रवासियों को संगठित करना तथा, इस तरह से, राज्य के विकास के बारे में तृणमूल कांग्रेस की झूठी बातों का पर्दाफाश करना शामिल है। भाजपा के नीति अनुसंधान सेल के सदस्य और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक अनिर्बान गांगुली ने कहा कि “ममता बनर्जी जनता के बीच चीख-चीख कर कह रही हैं कि एनडीए सरकार ने लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थानों का सत्यानाश कर दिया है, और विपक्षी दलों के साथ अपवित्र गठबंधन बनाने के लिए उनकी पूरी कोशिश इसी झूठे आधार पर केन्द्रित है। वह प्रधानमंत्री बनने की इच्छा रखती हैं लेकिन शासन में उनका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ही खराब है और राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में वह बंगाल के लिए कुछ भी करने में पूरी तरह से नाकाम रही हैं। दुर्भाग्यवश, बंगाल के बाहर कुछ लोग ही इस बारे में और ‘बंगाल बचाओ अभियान’ के बारे में जानते हैं।”

बंगाल में पार्टी मामलों के प्रभारी भाजपा के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव, शिवप्रकाश ने कहा, “बंगाल के बाहर रहने वाले बंगालियों की यह सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी है कि  बंगाल में चीजें बदलें। प्रवासी बंगाली देश और दुनिया के दूसरे हिस्सों में बहुत अच्छा कर रहे हैं और भले ही वे बंगाल में मतदान नहीं करते हैं, लेकिन वे यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से खुद को अलग नहीं कर सकते हैं कि उनका गृह राज्य देश के दूसरे राज्यों की तरह विकास करे। इसी वजह से इस अभियान का उद्देश्य बंगाल के बारे में जागरूकता फैलाने में उन्हें एक प्रमुख तरीके से शामिल करना और उनके अपने गृह राज्य के लिए उन्हें बदलाव का एजेंट बनाने का है।”

शनिवार को बंगाल बचाओ अभियान के शुरू होने के मौके पर यहाँ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में रहने वाले बंगालियों की बड़ी तादाद में उत्साहजनक भागीदारी देखी गई, कई लोगों ने इस अभियान के लिए काम करने की प्रतिज्ञा ली। भाजपा के राज्यसभा सदस्य स्वप्न दासगुप्ता ने तृणमूल कांग्रेस और इसके नेताओं पर जमकर हमला बोला और बंगाल को एक इकाई के रूप में देश के बाकी हिस्सों के साथ अलग रूप में पेश करने की कोशिशों की भी निंदा की। अभियान की शुरूआत के मौके पर दासगुप्ता ने कहा कि “वे (तृणमूल के लोग) अपने संकीर्ण राजनीतिक फायदे के लिए एक खतरनाक खेल खेल रहे हैं। असम में तृणमूल बंगालियों और असमियों के बीच फूट डाल रही है और देश के बाकी हिस्सों में भी बंगालियों और दूसरे समुदायों के बीच ऐसा ही करने की कोशिश कर रही है। इस तरह की भयावह कोशिशों को हराना ही होगा।” उन्होंने कहा कि तृणमूल बंगालियों के बीच आतंकी संकीर्णता को बढ़ावा दे रही है और समुदाय को देश के दूसरे हिस्सों से अलग कर रही है, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की बुरी कार्यनीति देश और बंगाल पर खतरनाक प्रभाव डालती है।

गांगुली ने अपनी शुरुआती टिप्पणियों में बंगाल में प्रगति के लिए आक्रामक अरुचि पर जोर देते हुए कहा कि राजनीतिक हिंसा जो राज्य का जख्म है, निवेश और नौकरी के अवसरों की कमी, कानून और व्यवस्था की खराब हालत तथा पुलिस का सत्तारूढ़ दल के एक छोटे सहयोगी या सहायक मात्र की तरह सिमट कर रह जाना, शैक्षिक संस्थानों के ख़राब मानक, शिक्षा का राजनीतिकरण, नौकरशाही और सभी संस्थान, राज्य में खतरनाक जनसांख्यिकी परिवर्तन और ममता की तुष्टीकरण की राजनीति ने राज्य में सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुँचाया है। ये गंभीर मुद्दे – बढ़ती बेरोजगारी, गुंडागर्दी और बांग्लादेश से अनियंत्रित अवैध प्रवासन तथा इसकी गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्याएँ – ‘बंगाल बचाओ’ अभियान के मुख्य बिंदु होंगे।

भाजपा के बंगाल राज्य अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी अभियान शुरू होने पर बात की और राज्य में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति और लोकतंत्र की हत्या, जैसा कि इस साल की शुरुआत में राज्य के पंचायत चुनावों के दौरान और बाद में देखा गया, का जिक्र किया। घोष ने कहा, “तृणमूल ने हमारे उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया, उन्होंने हमें आंदोलन करने की इजाज़त नहीं दी, वे धमकी और हिंसा में शामिल हो गए और चुनाव में पूरी तरह से हेर फेर किया। लेकिन फिर भी हमने काफी सीटें जीतीं। पंचायत चुनाव के बाद हमारे 37 पार्टी कार्यकर्ताओं को तृणमूल द्वारा निर्दयतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया गया। और फिर भी वे आरोप लगाते हैं कि भारत में भाजपा लोकतंत्र को चोट पहुँचा रही है। इस झूठ का अब खुलासा किया जाना चाहिए और देश के बाकी हिस्सों में भी तृणमूल का असली चेहरा सामने लाया जाना चाहिए। ममता ने झूठा आरोप लगाया कि देश में भाजपा द्वारा लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, जबकि ममता स्वयं देश में सबसे अधिक सत्तावादी और अजनतंत्रवादी नेता हैं। लेकिन शेष भारत इस बात को अच्छी तरह से नहीं जानता है। ममता के असली व्यक्तित्व को देश के बाकी हिस्सों में पेश करना महत्त्वपूर्ण है ताकि राज्य में सत्ता से ममता को हटाकर बंगाल को बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया जा सके।”

एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) ए. के. मुखोपाध्याय और मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) पी. के. मलिक ने अभियान का समर्थन किया और बंगाल में मामलों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। मलिक ने कहा, “बंगाल में जनसांख्यिकीय परिवर्तन को गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे के रूप में चिह्नित किया जाना चाहिए। बांग्लादेश से आए हुए अवैध प्रवासियों का कट्टरपंथी और उग्र इस्लामवादी प्रचारकों द्वारा आसानी से ब्रेनवाश किया जाता है और कट्टरपंथ अपनाने को मजबूर किया जाता है। वे हमारे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।” मुखोपाध्याय ने कहा कि यह देखना कितने दुख की बात है कि जहाँ देश के अन्य राज्यों में विकास हुआ है, वहीं बंगाल में वास्तव में पतन हुआ है। मुखोपाध्याय ने कहा, “अन्य राज्यों की तुलना में, बंगाल बहुत पिछड़ा है और गैर जिम्मेदार राजनेताओं, जिन्होंने चार दशकों से भी अधिक समय तक राज्य पर शासन किया है, के कारण बंगाल पिछड़ता रहा है।”

वक्ताओं ने अधिक लोगों तक पहुंचने और बंगाल में आधारभूत वास्तविकताओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए एक वेबसाइट और एक ट्विटर हैंडल भी लॉन्च किया। एनसीआर और कुछ अन्य राज्यों में अभियान के लिए समन्वयकों की नियुक्ति की गई है। गांगुली ने कहा, “अगले एक महीने में अन्य शहरों और राज्यों के लिए अधिक समन्वयक नियुक्त किए जाएँगे और ‘बंगाल बचाओ’ अभियान को गति मिलेगी। बंगाल के निरंतर पतन को देखते हुए यह अभियान एक योजनाबद्ध चर्चा शुरू करेगा जो अब तक नहीं होती थी। इसमें देश के विभिन्न भागों में निवास करने वाले प्रवासी बंगाली बड़े पैमाने पर शामिल हो रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि जिन राज्यों में वे रह रहे हैं उनमें इतना विकास क्यों हुआ है और बंगाल क्यों पिछड़ गया है।”

यह अभियान अगले महीने पूरे राज्य में यात्राओं की श्रृंखला की शुरुआत करेगा। पहली यात्रा का शुभारंभ 7 दिसंबर को अमित शाह द्वारा कूचबिहार से किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ताओं का एक अतिथि समूह यात्रा में भाग लेगा और 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र पूरे राज्य में सार्वजनिक बैठकों को संबोधित करेगा।