राजनीति
बंगाल के रंग में रंगने के लिए भाजपा तैयार- पार्टी अधिक मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारेगी 2019 के चुनावों में

बंगाली मुस्लिम समुदाय में त्रिणमूल कांग्रेस के प्रति असंतोष देखते हुए भारतीय जनता पार्टी 2019 के चुनावों में पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों को खड़ा करने की योजना बना रही है, टाइम्स ऑफ़ इंडिया  ने रिपोर्ट किया।

2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 27.1 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। बांग्लादेशी प्रवासियों के विरोध में अपनी मुद्रा के बावजूद अगर भाजपा इस चुनाव-क्षेत्र में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो जाती है तो चुनावी लाभ में बढ़त बना सकती है।

2014 के चुनावों में बीरभूम में मुस्लिम-बहुल गाँव पनरुई में चुनाव जीतकर पार्टी एक बार इसे भेद चुकी है। बंगाल में भाजपा का अल्पसंख्यक मोर्चा भी चढ़ाव पर है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अली होसैन ने बताया कि 2014 में पार्टी में 50,000 कार्यकर्ता ते जो अब बढ़कर दो लाख हो गए हैं।

“लोक सभा चुनाव में पिछली बार दो मुस्लिम उम्मीदवार थे। इस बार यह संख्या संभावित रूप से बढ़ेगी।”, एक भाजपा नेता ने बताया। पिछली बार मोहम्मद आलम घटाल में 95,000 मतों से जीते थे और बादशा आलम ने तामलुक से 86,000 मत हासिल किए थे।

रथ यात्रा के बाद 5 दिसंबर से बंगाल की भाजपा शहर में अल्पसंख्यकों तक अपनी पहुँच बनाने की योजना बना रही है। चुनाव के लिए पार्टी एक महत्त्वपूर्ण मुस्लिम चेहरे को भी तलाश रही है, संभवतः पूर्व मंत्री जिससे यह स्पष्ट कर सके कि पार्टी मुस्लिमों के नहीं बल्कि अवैध प्रवासियों के विरुद्ध है।

“हमने लोगों के मन से यह डर हटाने का काम शुरू कर दिया है कि पार्टी समुदाय के विरुद्ध है। इसके अलावा मुस्लिम महिलाओं ने भी जाना है कि ट्रिपल तलाक के हटने से उनकी ज़िंदगी में कितना सुधार हुआ है।”, राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने गुरुवार को कहा।

“पार्टी ने 2018 के पंचायत चुनावों में भी 800 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। यह संख्या 2011 के ग्रामीण चुनावों में 100 से कम थी।”, उन्होंने कहा। उन्होंने दावा किया कि बंगाल के लोग भाजपा को त्रिणमूल से अच्छा विकल्प मानने लगे हैं। “हमारी बुनियाद कई जिलों में मज़बूत हुई है जहाँ अल्पसंख्यक अधिक संख्या में हैं।”, घोष ने जोड़ा।