राजनीति
‘दंड’ में हारी सी.पी.एम. की अब ‘भेद’ की पारी- सरकार ने कहा कि सबरीमाला में कम्युनिस्ट कर्मचारी ही हों नियुक्त

कम्युनिस्ट नेतृत्व वाली केरला के लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एल.डी.एफ.) ने कथित तौर पर त्रवणकोर देवास्वोम बोर्ड (टी.डी.बी.) को निर्देश दिया है कि वह मंडलकाल-मकरविलक्कू तीर्थ अवधि जो 15 नवंबर से शुरु हो रही है में काम करने के लिए दैनिक पगार पर सी.पी.एम. के समर्थक कर्मचारियों को रखे।

मलयालम मनोरमा ने रिपोर्ट किया कि हाल ही में जब राज्य पुलिस अयप्पा भक्तों के प्रदर्शन को रोकने में असफल हुई, उसके बाद यह कदम उठाया गया। 17 से 22 अक्टूबर को हुए मलयालम तुलम के मासिक संस्कार के समय पुलिस को कोई बाहरी समर्थन नहीं मिला था।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद पुलिस ने प्रजनन आयुवर्ग की कुछ महिलाओं का मंदिर में प्रवेश कराने का प्रयास किया था लेकिन भक्तों की ओर से इसका प्रबल विरोध हुआ जिनके लिए पुलिस ने कहा कि यह प्रदर्शनकारी संघ परिवार के हैं।

रिपोर्ट ने कहा कि इस घटना की समीक्षा की गई थी, जिसमें पाया गया था कि पंपा से मंदिर तक एल.डी.एफ. के समर्थक उपस्थित नहीं थे जिससे पुलिस अकेली पड़ गई। इसलिए केरला सरकार ने टी.बी.डी. को निर्देश दिए हैं कि उस स्थान पर कार्य करने के लिए सी.पी.एम. के कैडर नियुक्त किए जाएँ।

बोर्ड 1,680 अस्थायी कर्मचारियों को नियुक्त करेगा जो दैनिक आधार पर मंदिर प्रांगण के विभिन्न कार्य करेंगे। इनमें से 1,650 को सन्निधाम पर नियुक्त किया जाएगा और 30 को मंदिर के तल स्थल में निलक्कल पर।

खाने और पानी के वितरण व कार्यालय, अतिथि गृह और विश्राम स्थलों की व्यवस्था जैसे कार्यों के लिए ये अस्थायी कर्मचारी होंगे। कर्मचारी इस अवधि के अंत तक सबरीमाला में रह सकते हैं।