राजनीति
नेताजी की सही तस्वीर को गलत बताने पर राष्ट्रपति भवन की इंडिया टुडे ग्रुप को फटकार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक तस्वीर का अनावरण किया था। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे बंगाली फिल्म अभिनेता की तस्वीर बताया था। इसको लेकर इंडिया टुडे मीडिया समूह के वरिष्ठ पत्रकारों के एक वर्ग समेत कुछ लोगों ने भी ऐसे ही दावे कर दिए थे। इसके बाद राष्ट्रपति भवन ने एक पत्र जारी कर समूह के अध्यक्ष अरुण पुरी को फटकार लगाई है।

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया, “एक सही तथ्य को गलत ठहराकर अनावश्यक और शर्मनाक तरीके से विवाद को उत्पन्न किया गया। इसमें राष्ट्रपति भवन की मंशा को ठेस पहुँचाई गई, जिसमें इंडिया टुडे ग्रुप के कुछ लोगों सहित आपके यहाँ के पत्रकारों का एक वर्ग भी शामिल रहा। उन उद्देश्यों के लिए राष्ट्रपति भवन को घसीटा गया, जिसके लिए हमारी मंशा बिल्कुल साफ थी। ”

पत्र में लिखा गया, “23 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नेताजी की 125वीं जयंती पर हुए समारोह में उनकी एक तस्वीर का अनावरण किया था। इंडिया टुडे के एक प्रमुख प्रतिनिधि राजदीप सरदेसाई सहित पत्रकारों के एक वर्ग और आपके नेतृत्व वाले समूह के कई और लोगों ने ट्विटर पर इस घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह चित्र नेताजी का नहीं बल्कि अभिनेता प्रोसनजीत चटर्जी का है।”

आगे कहा गया कि अफसोसजनक बात यह है, “आपके समूह के वरिष्ठ पत्रकारों ने तथ्यों की जाँच करना तक उचित नहीं समझा। इस तरह का गंभीर दावा करने से पहले वे नेताजी के परिवार के किसी भी सदस्य से बात करके इसकी जाँच कर सकते थे। उन्होंने कोई बुनियादी तथ्य की जाँच नहीं की और उन लोगों के समूह में शामिल हो गए, जो अनावश्यक रूप से गलत आरोप लगा रहे थे।”

समूह को फटकार लगाते हुए कहा गया, ” इस तरह आपने न सिर्फ उच्च संवैधानिक कार्यालय का उपहास बनाया बल्कि अपने पेशे को भी बदनाम किया है। आपने राष्ट्रपति भवन की छवि भी धूमिल की है। आप इस तरह के गैर-ज़िम्मेदाराना और लड़कपन वाली हरकतों से राष्ट्रपति भवन की गरिमा के साथ समझौता नहीं कर सकते हैं।”

अंत में कहा गया कि जब इस बात की पुष्टि हो गई, “तस्वीर नेताजी की है तो उन्होंने क्षमा मांगने की बजाय अपने ट्वीट डिलीट कर दिए। इस प्रकरण ने राष्ट्रपति भवन की गरिमा को भेदा है और हम इंडिया टुडे समूह के साथ अपनी व्यस्तताओं की समीक्षा करने के लिए मजबूर हैं।”