राजनीति
राम मंदिर को लिए सर्वोच्च न्यायालय तत्पर नहीं, शीघ्र सुनवाई की याचिका खारिज

सोमवार (12 नवंबर) को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश एस के कौल की बेंच ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले पर तुरंत सुनवाई के अनुरोध को अस्वीकृत कर दिया है, पी टी आई  ने रिपोर्ट किया।

अखिल भारत हिंदू महासभा की राम जन्मभूमि पर जल्दी सुनवाई की याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने, “हम पहले ही ऑर्डर निकाल चुके हैं। सुनवाई जनवरी में होगी। जल्दी सुनवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।”, कहकर नकार दिया।

प्रधान पब्लिक प्रॉसिक्युटर तुषार मेहता और वरिष्ठ प्रवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने मामले के लंबे समय से लंबित होने का हवाला देते हुए मामले को सुनवाई सूची में जल्दी लाने की माँग की थी।

यह भी बात गौर करने योग्य है कि आवश्यक नहीं कि जनवरी में ही सुनवाई हो। असल में जनवरी में सुनवाई की तारीख तय की जाएगी और बेंच के अनुसार सुनवाई जनवरी, फरवरी या मार्च में भी हो सकती है।

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य राकेश सिन्हा ने मामले को सुलझाने के लिए राज्य सभा में सांसदीय हस्तक्षेप का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने यह भी ट्वीट किया था, “अनुच्छेद 377, जल्लीकट्टू, सबरीमाला पर निर्णय लेने में सर्वोच्च न्यायालय को कितना समय लगा? लेकिन अयोध्या का मामला दशकों से लंबित है, यह न्यायालय की प्राथमिकता नहीं है। यह हिंदुओं की प्राथमिकता है।”