राजनीति
राफेल- क्यों राहुल, चिदंबरम, क्विक्सोट और पांजा को धन्यवाद ज्ञापित करें मोदी

आशुचित्र- भाजपा को अपने भाग्यवान सितारों को धन्यवाद देना चाहिए कि उनके खिलाफ राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेता हैं। इस राफेल सौदे को विश्वसनीय बनने में मदद करने के लिए डॉन क्विक्सोट और सांचो पांजा को धन्यवाद नोट भेजना चाहिए।

राफेल सौदे पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट को देखा जाए तो इस रिपोर्ट ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की काफी मदद की है और एनडीए द्वारा किया गया सौदा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की वार्ता द्वारा की गई तुलना में 2.86 प्रतिशत सस्ता था।

लेकिन कैग की रिपोर्ट सरकार द्वारा राफेल के माध्यम से अपनी गरिमा बरकरार रखने का असली कारण नहीं है मगर कांग्रेस के राहुलडॉन क्विक्सोटगांधी और उनकीचौकीदार चोर हैकहने वाले नेताओं की टीम द्वारा किए गए बकवास दावे ने मोदी सरकार की ज़्यादा मदद की। यह पूरी तरह से अलगअलग अवसरों पर वंशवाद द्वारा किए गए विरोधाभासी दावे थे जो वास्तव में राफेल पर उनके बयान से सरकार के अच्छे प्रदर्शन को दर्शा रही थी।

कैग की रिपोर्ट समझौते के ऑफसेट भाग को करीब से देखेगी और सरकार को खुद को साबित करने के लिए एक अच्छी हेडलाइन संख्या दी (कुल मिलाकर 2.86 प्रतिशत कम कीमत) लेकिन मध्यपट में कई अन्य अड़चनो का सामना करना पड़ा और इस बात को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता। मूल्य निर्धारण पर राफेल सौदे के मूल्यांकन में कैग ने जिन बातों पर ध्यान दिया उनमें पाया गया कि एनडीए का सौदा 11 में से तीन मापदंडों पर बेहतर था बल्कि यूपीए का 11 में से चार मापदंडों में बेहतर था और बाकी मापदंडों में कोई अंतर नहीं दिखा। विमान वितरण कार्यक्रम के लिए एनडीए का सौदा केवल सीमांत तौर पर बेहतर था।

इसके अलावा एनडीए को फ्रांस सरकार से केवल आश्वासन पत्र मिला मगर इस सौदे में संप्रभु या बैंक की गारंटी नहीं थी जहाँ डसॉल्ट को 36 विमानों को उड़ान भरने की स्थिति में पहुँचाना है और ऑफसेट क्लॉज़ पर एक अलग रिपोर्ट प्रगति में है जिसमें कथित तौर पर अनिल अंबानी को फायदा पहुँचा है

हालाँकि यह राहुल गांधी और उनके वित्तीय सांचो पांजा, पी चिदंबरम द्वारा लगाए गए आरोप थे, जिन्होंने स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया कि कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सौदे पर राजनीति से ज्यादा कुछ नहीं कर रही थी।

कांग्रेस केडॉन क्विक्सोटके आँकड़ों के प्रकार पर सविस्तार करें। इंडिया टुडे  द्वारा एक सावधानीपूर्वक किए गए तथ्यजाँच के अनुसार, राहुल गांधी ने अप्रैल 2018 में एक सार्वजनिक रैली में दावा किया कि राफेल के लिए यूपीए की कीमत 700 करोड़ रुपये थी जबकि एनडीए की कीमत दोगुनी से अधिक 1,500 करोड़ रुपये थी।

तीन महीने बाद, संसद में एनडीए के खिलाफ अविश्वास मत के दौरान गांधी ने अचानक यूपीए द्वारा बातचीत की जा रही कीमत को घटाकर 520 करोड़ रुपये प्रति विमान कर दिया जबकि नरेंद्र मोदी ने सौदे पर हस्ताक्षर करने के लिए 2015 में अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान कीमत 1,600 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया था जो कि तीन गुना अधिक था और गांधी के स्वयं के दावे से 100 करोड़ रुपये ज़्यादा था

एक महीने से भी कम समय के बाद गांधी ने फिर से यूपीए की कीमत 540 करोड़ रुपये (जुलाई में संसद द्वारा बताई गई राशि से 20 करोड़ रुपये अधिक) का उल्लेख किया और अगस्त में उन्होंने 526 करोड़ रुपये की कीमत की बात की जो कि जुलाई में किए गए दावे से 14 करोड़ रुपये कम थी।

इस बीचसांचो पांजाअपनी खुद की संख्या के साथ रहे थे। इस जनवरी में एक संवाददाता सम्मेलन में चिदंबरम ने दावा किया किडसॉल्ट बैंक तक पहुँचने तक हँस रहा थाऔर उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए ने राफेल के लिए (यूरो विनिमय दर $ 256 मिलियन) यूपीए से 186 करोड़ रुपये ज़्यादा भुगतान किया था।

कांग्रेस केडॉन क्विक्सोटऔरसांचो पांजाके बीच प्रति माह हो रही बातचीत की वजह से कुछ ही महीनों में कीमत 1,000 करोड़ रुपये से लेकर 186 करोड़ रुपये तक उतर गई। कैग ने अब कांग्रेस द्वारा दिए नवीनतम आंकड़ों  को भी ठुकरा दिया है और यह सब तब हुआ जब कांग्रेस के अनुचर प्रेस कॉन्फ्रेंस, टीवी शो और जनसभाओं मेंचौकीदार चोर हैचिल्ला रहे थे।

सरकार की ओर से बस यह करने की आवश्यकता थी कि कांग्रेस के सभी दावों को प्रभावी रूप से खंडन किया जाए और बताया जाए कि सौदा कैसे किया गया था और बातचीत के तहत यूपीए सौदे की एनडीए से तुलना क्यों नहीं की जा सकती है। जब राफेल के लिए भुगतान की जा रही वास्तविक कीमत का खुलासा करने का कोई इरादा नहीं था, तो यह दावा करने की कोई आवश्यकता नहीं थी कि सौदा 9 प्रतिशत सस्ता था

कल (13 फरवरी) को संसद में पेश की गई कैग रिपोर्ट में सरकार के कुछ स्वयंभू जख्मों को उजागर किया गया है और यह सोचने वाली बात है कि जनता के बीच इसका संचार इतना अयोग्य क्यों था जिससे स्वविरोधाभासी कांग्रेस के दावों को बल मिला।

भाजपा को पार्टी के बाहर स्वतंत्र पत्रकारों द्वारा (यहाँ, यहाँ और यहाँ देखें) और सर्वोच्च न्यायालय के दिसंबर के फैसले ने बेहतर तरीके से समर्थन किया मगर इसके प्रवक्ताओं ने कोई  प्रबंध नहीं किए  थे।

इससे भी बुरी बात यह है कि अपनी रिपोर्ट बाहर होने से पहले ही कांग्रेस कैग को बदनाम करने की कोशिश कर रही थी जबकि राहुल गांधी ने सरकार के लिए इस्तेमाल होने वाले समान नारे (“चौकीदार ऑडिटर जनरल“) के साथ वैधानिक ऑडिटर को टारगेट करने की कोशिश की।

भाजपा को अपने भाग्यवान सितारों को धन्यवाद देना चाहिए कि उनके खिलाफ राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेता हैं। इस राफेल सौदे को विश्वसनीय बनने में मदद करने के लिए डॉन क्विक्सोट और सांचो पांजा को धन्यवाद नोट भेजना चाहिए।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।