राजनीति
सीबीआई द्वारा पोंज़ी घोटाले में बढ़ती जाँच की गति से बंगाल में राजनीतिक कोलाहल

आशुचित्र- लोक सभा चुनावों से पहले सीबीआई जाँच की बढ़ती गति से क्रोधित तृणमूल, भाजपा से प्रतिकार करने के लिए राज्य पुलिस का प्रयोग करेगी।

शारदा व अन्य चिट फंड घोटालों, जिनमें लाखों निवेशकों को ठगा गया था व बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा से कुल 50,000 करोड़ रुपए की ठगी हुई थी, पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) सर्वोच्च न्यायालय से मई 2014 में मिले आदेशानुसार जाँच कर रहा है। अब इस जाँच की गति बढ़ा दी गई है व अगले कुछ महानों के भीतर चार्जशीट दायर की जाने की अपेक्षा है। इससे बंगाल में राजनीतिक कोलाहल होगा क्योंकि संभवतः कई तृणमूल नेताओं का नाम इस चार्जशीट में आएगा।

पिछले सप्ताह दागी व्यापारियों, जिनके त्रिणमूल से घनिष्ठ संबंध हैं, से बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 17 असामान्य चित्र मिलने से साढ़े चार साल से चल रही इस जाँच का अंत करने के लिए सीबीआई प्रतिबद्ध हो गया है। सीबीआई ने तृणमूल के महासचिव सुब्रता बक़्शी व राज्य सभा सदस्य डेरेक ओ-ब्रायन को बुलावा भी भेजा है। कथित तौर पर सीबीआई को लगता है कि ये चित्र चिट फंड कंपनियों द्वारा ममता बनर्जी को खुश करने के लिए निवेशकों के पैसों से खरीदे गए थे।

इन चित्रों के जब्त किए जाने से तृणमूल को झटका लगा है। ममता बनर्जी ने इस बात को खुद स्वीकार किया है कि तीन प्रदर्शनियों के माध्यम से उनके 300 चित्र बिके थे जिनकी कुल कीमत 9 करोड़ रुपए थी। ऐसी अफवाह थी कि एक चित्र शारदा के प्रमुख सुदीप्ता सेन ने 1.2 करोड़ में एक चित्र खरीदा था। सीबीआई का मानना है कि ममता जानती थीं कि उनके चित्र निवेशकों के पैसों से खरीदे जा रहे हैं।

2011 से 2013 के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बंगाल की मुख्यमंत्री को शारदा और रोज़ वैली जैसी चिट फंड कंपनियों की धोखाधड़ी और ठगी के संबंध में कई चेतावनियाँ दी गई थीं। सीबीआई चार्जशीट में संभवतः इस बात का उल्लेख होगा कि चेतावनियों और पोंज़ी घोटाले की जानकारी होने के बावजूद घोटाला करने वालों को बनर्जी के चित्र खरीदने की छूट व तृणमूल सरकार का संरक्षण प्राप्त था। सीबीआई को लगता है कि चित्रों से हुई कमाई का प्रयोग किसी आपराधिक कार्य के लिए किया गया था। सीबीआई के पास ठोस साक्ष्य हैं जिससे तृणमूल नेताओं और घोटालेबाज़ों के मध्य संबंध सिद्ध किया जा सके।

सीबीआई ने इस वर्ष जुलाई में सर्वोच्च न्यायालय को शिकायत की थी कि बंगाल पुलिस उसके कार्यों में अटकलें डाल रही है और अगस्त में चार पुलिस अधिकारियों को बुलावा भी भेजा था जिसमें कोलकाता के पुलिस कमिशनर राजीव कुमार भी सम्मिलित थे जिन्होंने तत्कालीन सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के मुख्य जाँच अधिकारी के विरुद्ध शिकायत भी की थी। इन चार में केवल एक अधिकारी ही सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत हुए जिसके बाद सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के माध्यम से बंगाल पुलिस का सहयोग पाने और सीबीआई के बुलावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने पर विचार कर रही थी।

इस मामले में राज्य पुलिस का नेतृत्व कुमार कर रहे थे जो ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने साक्ष्यों को नष्ट करके सेन और कुंडु जैसे तृणमूल के नेताओं को बचाने का प्रयास किया है। एक वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी ने बताया कि एक पेन ड्राइव और कुछ दस्तावेज़ जो सुदीप्ता सेन के कार्यालय से जब्त किए गए थे, वे पुलिस की साक्ष्य सूची में थे ही नहीं। कथित तौर पर सीबीआई कुमार से इन लापता साक्ष्यों के विषय में पूछताछ करेगा। इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी राजीव कुमार पर साक्ष्य मिटाने के आरोप लगाए थे।

अपने साथियों पर आरोप की सुई आते हुए देखकर ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि उनकी पार्टी के विरुद्ध सीबीआई का प्रयोग किया जा रहा है। नवंबर मध्य में उन्होंने बंगाल में सीबीआई जाँच की अनुमति को वापस ले लिया था। पहले भी बंगाल सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि वह सीबीआई के कार्य में खलल डाल रही है।

तृणमूल प्रमुख सीबीआई जाँच की बढ़ती गति को देखकर झूठे आरोप लगाएँगी क्योंकि इससे तृणमूल के कई नेता व उनके करीबी पुलिस अधिकारी जाँच के घेरे में आ जाएँगे। इसके प्रतिकार स्वरूप राज्य पुलिस भाजपा नेताओं के विरुद्ध कार्यवाही करेगी। “हमें आशंका है कि ममता बनर्जी जाँच पर से ध्यान हटाने के लिए हमारी पार्टी के पदाधिकारियों व नेताओं पर झूठे केस बनवाएँगी। त्रिणमूल के प्रभाव में राज्य पुलिस द्वारा हमारे कार्यकर्ताओं पर धोखाधड़ी, राजमार्ग घेरने, धमकियाँ देने और यहाँ तक कि ड्रग्स रखने के झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। हमें लगता है कि इस प्रकार के केसों की संख्या में और वृद्धि होगी। लेकिन हम इससे डरते नहीं हैं और वैधानिक तरीके से इसके विरुद्ध लड़ेंगे। फर्ज़ी केस दर्ज करके त्रिणमूल हमें दबा नहीं सकती।”, राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा।

लोक सभा चुनावों से पहले सीबीआई जाँच की बढ़ती गति से क्रोधित त्रिणमूल, भाजपा से प्रतिकार करने के लिए राज्य पुलिस का प्रयोग करेगी। इससे आने वाले महीनों में राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ेगा।