राजनीति
पंजाब विश्वविद्यालय में नहीं होगा हिंदी निदेशालय, समिति का निर्णय कि पंजाबी को मिले पहला अधिकार

पंजाब विश्वविद्यालय की प्रबंधक समिति द्वारा हिंदी निदेशालय की स्थापना को रद्द करने के निर्णय को माँ बोली चेतना मंच नामक छात्र संघ का समर्थन प्राप्त हुआ है, इंडियन एक्सप्रेस  ने बताया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 2015 की सलाह के अनुसार राजभाषा हिंदी के प्रचार के लिए यह निदेशालय स्थापित किया जाना था। इस योजना का उद्देश्य था कि शैक्षणिक संस्थान अपनी प्रशासनिक क्षमता के अनुसार हिंदी का प्रयोग करें जिससे इसका प्रचार-प्रसार किया जा सके।

चंडीगढ़ के पूर्व सांसद पवन कुमार बंसल, भारतीय जनता पार्टी के चंडीगढ़ अध्यक्ष संजय टंडन और रबींदरनाथ शर्मा समिति के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि संस्थान में पंजाबी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि अधिकांश छात्र और प्राध्यापक पंजाबी ही हैं। सदस्यों का कहना था कि इस कदम से मातृ भाषा की महत्ता कम होती जिसके कारण भाषाओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई होती।

कांग्रेस की नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया, वामपंथी स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया व ऑल इंडिया स्टूडेंट असोसिएशन ने प्रशासन के सामने माँग रखी थी कि पहला अधिकार पंजाबी भाषा को ही मिलना चाहिए।

छात्र संघों की माँग थी कि एक पंजाबी निदेशालय स्थापित किया जाए जो भाषा संबंधित प्रशासनिक गतिविधियों का आयोजन करे। उन्होंने यह भी माँग रखी कि विद्यार्थियों को उनकी सुविधानुसार अंग्रेज़ी, हिंदी अथवा पंजाबी में परीक्षा देने का अधिकार हो।