राजनीति
“पाकिस्तान होता तो घर से उठा ले जाते”- बिहार के बेगूसराय में नाबालिग का अपहरणकर्ता

बिहार के बेगूसराय जिले में एक व्यक्ति ने स्थानीय पुलिस को कल (30 जुलाई को) एक शिकायत की कि जब वह कहीं अपनी नाबालिग पुत्री के साथ जा रहा था तब कुछ मुस्लिम पुरुष बंदूक की नोक पर उसकी बेटी को उठा ले गए। शिकायत के अनुसार एक अपहरणकर्ता ने लड़की के पिता से कहा कि यदि यह पाकिस्तान होता तो वे उसकी पुत्री को घर से ही उठाकर ले जाते।

बछवाड़ा पुलिस थाना क्षेत्र में पड़ने वाले बेगूसराय के भिखमचक गाँव की यह घटना है। 42 वर्षीय दिनेश कुमार पंडित ने अपनी शिकायत में बताया कि 26 जुलाई को करीब शाम 5 बजे वह मनसूरचक बाज़ार से घरेलू सामान खरीदकर अपनी पुत्री के साथ पैदल घर लौट रहे थे, तब ही बिना नंबर प्लेट वाली एक बोलेरो उनके निकट आकर रुकी।

उस गाड़ी से तीन पुरुष और एक महिला निकली। आदमियों ने उसे कसकर पकड़ लिया जबकि महिला ने उसकी पुत्री को गाड़ी में धकेल दिया। जब दिनेश ने विरोध किया तो उन लोगों ने उसपर बंदूक तान दी। मोहम्मद नरूल अंसारी नामक व्यक्ति ने कहा कि अगर पाकिस्तान होता तो वे लोग उसकी पुत्री को घर से ही उठाकर ले जाते।

शिकायत में तीन अन्य नाम हैं- इज़मुल खान उर्फ नज़मुल उर्फ आर्यन, मोहम्मद मुनफ्फर अंजुम अंसारी उर्फ चांद और फरत। इन लोगों ने दिनेश को किसी को कुछ न बताने की धमकी दी और गाड़ी में सवार होकर भाग गए।

शिकायत में आगे लिखा है कि घटना के बाद दिनेश और उसकी पत्नी नज़मुल उर्फ आर्यन के घर गए जहाँ मेहरूम मिसार अहमद अंसारी की पत्नी और नज़मुल की माँ हसीना खातून थी। दंपति ने घटना बताकर अपनी पुत्री वापस करने की विनती की लेकिन हसीना ने चिल्लाकर भीड़ इकट्ठा कर ली जिसने दंपति के साथ गाली-गलौज और मार-पीट की।

हसीना ने उसकी पत्नी के गले से सोने का मंगलसूत्र छीन लिया। उसने यह भी कहा कि यदि वे तुरंत उसके घर से नहीं गए तो वह उनकी पुत्री को बांग्लादेश में बेच देगी और उससे ‘धंधा’ (वेश्यावृत्ति) करवाएगी। अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए दंपति घर लौट आया।

30 जुलाई को सुबह 10 बजे एक अनजान व्यक्ति उनके घर आया, शिकायत में आगे लिखा गया है। वह मोटरसाइकल पर आया था जिसपर भी नंबर प्लेट नहीं था। उसने कहा कि अगर वे अपनी बेटी को वापस चाहते हैं तो उसके साथ आएँ।

वह दिनेश को एक सुनसान जगह पर ले गया और कहा कि यदि वह अपनी पुत्री को वापस चाहता है तो हसीना खातून को दो दिनों के भीतर 2 लाख रुपये दे। उसने दिनेश को धमकी दी कि अगर वह ऐसा नहीं कर पाया तो उसकी बेटी को बांग्लादेश में बेच दिया जाएगा, शिकायत में कहा गया।

दूरभाष पर दिनेश ने संवाददाता को बताया कि मुख्य आरोपी नज़मुल उसकी पुत्री को विद्यालय आने-जाने के मार्ग में काफी समय से परेशान कर रहा था। उसने एक वर्ष पहले नज़मुल को धमकी दी थी और कहा था कि उसकी बेटी से दूर रहे। “थोड़े दिनों तक वह नियंत्रण में रहा लेकिन बाद में फिर से उसने पुत्री को परेशान करना शुरू कर दिया।”, दिनेश ने बताया।

दिनेश की तीनों बेटियों में से यह सबसे छोटी है। इस वर्ष उसने 10वीं की परीक्षाएँ दी थीं। बाकी दोनों बेटियों का विवाह हो चुका है। दिनेश का परिवार ‘कुम्हार पंडित’ जाति का है जो अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है। घटना के बाद से दिनेश को न उसकी पुत्री और न अपहरणकर्ताओं से कोई फोन आया है।

बछवाड़ा पुलिस थाने के एक पुलिसकर्मी ने संवाददाता को आज सुबह बताया कि कल देर रात को प्राथमिकी (क्रमांक 58/2020) दर्ज की गई है। आरोपियों पर अपहरण और नुकसान पहुँचाने समेत अन्य मुकदमे दर्ज किए गए हैं। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की 366, 323, 341, 379, 384 और 504 धाराएँ लगाई गई हैं।

पुलिस ने अभी तक पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज नहीं किया है। “हमने आगे की पूछताछ के लिए लड़की के पिता को कॉल किया है। बच्ची के उठाए जाने की सूचना उसने मौखिक रूप से 26 जुलाई को ही दे दी थी। हमारे दल लड़की को खोज रहे हैं।”, पुलिसकर्मी ने बताया।

उत्तरी बिहार में बजरंग दल के उप-संचालक शुभम भारद्वाज ने बताया कि आम तौर पर पुलिस ऐसे मामलों में कार्यवाही करने में संकोच करती है क्योंकि सांप्रदायिक दृष्टि से ऐसे मामले संवेदनशील होते हैं इसलिए 30 जुलाई को संगठन ने थाने के बाहर प्रदर्शन कर त्वरित कार्रवाई की माँग की।

उन्होंने इस मामले को “लव जिहाद” का मामला बताया और कहा कि बिहार सरकार इस सीमा तक मुस्लिम “तुष्टिकरण” कर रही है कि वे हिंदुओं के विरुद्ध निडर होकर अपराध कर रहे हैं।

स्वाति गोयल शर्मा स्वराज्य में वरिष्ठ संपादक हैं और वे @swati_gs के माध्यम से ट्वीट करती हैं।