राजनीति
धान खरीद में विसंगतियों पर कैसे नज़र रख रहे हैं उत्तर प्रदेश के ये मंत्री

उत्तर प्रदेश के राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि धान खरीद में विसंगतियों के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर सरकार ने लगाम लगाई है। फोन पर स्वराज्य से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के कारण यह संभव हो पाया है।

“विसंगतियों में लिप्त लोगों पर बड़ी कार्रवाइयाँ की गई हैं- स्वतंत्रता से अब तक सबसे बड़ी।”, उन्होंने कहा। सिंह ने बताया कि योगी ने राज्य में धान खरीद पर नज़र रखने का निर्देश दिया था। इसके फलस्वरूप नोडल अधिकारियों को सक्रिय किया गया जिससे वे बिचौलियों पर नज़र रख सकें और धान खरीद के केंद्रों को उनसे मुक्त कर सकें।

“उसी के तहत सभी नोडल अधिकारी लाए गए थे।” सिंह ने बताया, “उत्तर प्रदेश में धान खरीद में विसंगतियों और अनियमितताओं पर यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। अब तक का सबसे बड़ा। विभागीय कार्रवाई की गई है इन लोगों के खिलाफ।”

सिंह ने बताया कि राज्य भर में अभी तक 1,200 से अधिक लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है और प्रयास किया जा रहा है कि किसानों से सीधी खरीद की प्रक्रिया को बाधारहित बनाया जा सके।

पिछले वर्ष योगी ने उत्तर प्रदेश में निर्विघ्न धान खरीद का निर्देश दिया था। उनका कहना था कि धान और गन्ना खरीद के मौसम में किसानों को किसी समस्या का सामना न करना पड़े।

राज्य में धान खरीद की विसंगतियों पर योगी सरकार की कार्रवाइयों में सिंह प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में उन्होंने औचक निरीक्षण किया है जिससे वे स्वयं ज़मीनी स्थिति को समझ सकें। ये दौरे आने वाले अगले कुछ दिनों में भी जारी रहेंगे।

प्रयागराज में औचक निरीक्षण पर सिंह

इन दौरों के तहत हाल ही में उन्होंने बाराबंकी जिले के धान खरीद केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। वे अपना अनुभव बताते हुए कहते हैं, “वो भ्रष्ट से ज़्यादा भ्रष्ट केंद्र है… और उनके खिलाफ हमने कार्रवाई भी करवाई है।”

धान खरीद में भ्रष्टाचार पर बात करते हुए लेखिका को सिंह ने बताया, “बाराबंकी में मैंने देखा कि किसान यूनियन जो हैं वो थोड़ा… दलाली के माध्यम से हो रही थी खरीद, और कुछ और लोग थे जिनके माध्यम से हो रही थी, तो उसी पर यह कार्रवाई की गई है।”

बाराबंकी के इस खरीद केंद्र पर उन्होंने वह रजिस्टर देखा जिसमें अपना उत्पाद बेचने वाले किसानों का डाटा था। इस रजिस्टर से उन्होंने मिलान किया कि “जिन किसानों का नाम और विवरण लिखा गया है, वह वैध है या नहीं।”

इस रजिस्टर में लिखे गए नाम, जिनके लिए कहा जा रहा था कि वे किसानों के हैं, के साथ उन्होंने संपर्क निकाला। कुछ नंबर उन्होंने ऐसे ही चुने और उनपर फोन लगाया। लेकिन ये नंबर दूसरों के निकले, किसानों के नहीं।

एक वीडियो भी इस वार्ता का आया था जिसें वे फोन लगाकर पूछते हैं, “आपने धान-वान कुछ बेचा था?” दूसरी ओर से कुछ प्रतिक्रिया पाकर वे कुछ देर के लिए रुकते हैं और फिर कहते हैं, “आपने धान नहीं बेचा है।…” वे फोन को अपने से दूर करके अपने सहयोगी को देते हैं ताकि वह उस कॉल से अन्य जानकारी ले ले।

फिरे वे कहते हैं, “मोबाइल नंबर भी सही है, नाम भी सही है, इन्होंने धान नहीं बेचा है… ठीक है, थैंक यू।” केंद्र पर रखे हुए रजिस्टर की विसंगतियाँ पूछताछ से सामने आईं। लोगों से बात करने के दौरान सिंह को विसंगतियों का पता चला क्योंकि जिन लोगों से उन्होंने कॉल पर बात की उनमें से दर्जन भर से अधिक लोगों ने मंत्री का नाम सुनते ही कॉल काट दिया।

केंद्र पर उपस्थित अधिकारियों को झाड़ते हुए सिंह ने कहा, “अगर यहाँ दो बोरी चली (खो) जाएगी किसान की, चार बोरी चली जाएगी तो कौन ज़िम्मेदार होगा?” कई रिपोर्ट सामने आईं हैं जिनमें किसान आरोप लगाते हैं कि खरीद केंद्र पर नियमों का उल्लंघन होता है।

वीडियो में देखा जाने वाला एक व्यक्ति, संभवतः किसान, आरोप लगाता है कि नियमों के विरुद्ध किसानों का उत्पाद तौला जाता है जो कि किसी किसान के प्रभाव पर निर्भर करता है।

वह पूछता है कि क्यों 80-90-150 क्विंटल वाले कट्टे (प्रति की 1 क्विटल की क्षमता) उस दिन तौले जाते हैं जो दिन किसानों की सुविधा के लिए एसडीएम द्वारा छोटे किसानों के उत्पाद की तौल के लिए तय किया जाता है।

वह आगे कहता है कि उसके जैसे छोटे किसानों के लिए निर्धारित दिन पर वह अपना 30 क्विंटल उत्पाद लेकर केंद्र पर पहुँचा। “जो दबंद होते हैं, उनकी तौल होती है, जो दबंद नहीं हैं, उनकी तौल नहीं होती है।”, वह नियम विरुद्ध, प्रभाव के आधार पर होने वाली तौल पर खेद प्रकट करता है।

कुछ रिपोर्ट ऐसी भी आती हैं जिसमें किसान आरोप लगाते हैं कि उन्हें उनकी उपज को बेचने नहीं दिया जाता है और “बिचौलिए कम मूल्य पर उनसे उपज खरीद लेते हैं जिसे खरीद केंद्र पर तय एमएसपी पर बेचकर वे लाभ कमा लेते हैं।”

आश्चर्य की एक और बात है। सिंह द्वारा फोन लगाए जाने पर एक व्यक्ति ने यह भी कहा कि उसकी कोई कृषि भूमि ही नहीं है। खाद्य मंत्री का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताहों में 11-12 जिलों के जिन 50 केंद्रों पर वे गए हैं, “इतना भ्रष्ट” उनमें से कोई नहीं था।

उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है और किसानों को संतोष दिलाया है कि परिस्थिति उसी दिन से बदलने लगेगी और स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वे व्यवस्थाएँ करेंगे।

ध्यान देने वाली बात यह है कि दिसंबर 2020 में “धीमी” धान खरीद के कारण बाराबंकी समाचारों में था। रिपोर्ट का कहना है कि बाराबंकी के सांसद उपेंद्र सिंह रावत ने इस मुद्दे को उठाया था।

बाराबंकी के किसान सम्मान निधि कार्यक्रम में रावत

रावत और स्थानीय विधायक परिस्थिति को समझने के लिए बाज़ार भी गए थे। उसके बाद योगी के सामने यह मामला आया था। जब संवाददाता ने सिंब से बात की थी, तब वे आज़मगढ़ और बस्ती जिलों के दौरे से लौटे थे।

उन्होंने स्वराज्य को बताया कि उन्हें यह जानकर शांति मिली कि आज़मगढ़ और बस्ती के किसानों में जागरूकता का स्तर अच्छा है। “किसान बहुत जागरूक है पूर्वांचल का, मुझे ऐसा लगा बस्ती और आज़मगढ़ में। वो अपना किसी तरह से नुकसान बर्दाश्त नहीं करता, मुझे देखकर अच्छा लगा।”, सिंह ने कहा।

एक रिपोर्ट में सिंह कहते हैं कि उन्हें लगता था कि लखनऊ के निकट होने के कारण बाराबंकी में धान खरीद सही से हो रही होगी लेकिन उनका यह विचार गलता निकला। उन्होंने एसडीएम से फर्जी खरीद का मामला रजिस्टर करने को कहा।

वे सफदरगंज बाज़ार क्षेत्र के रानी सती उद्योग मिल गए और वहाँ भी उन्हें विसंगतियाँ दिखीं। विशेष समिति के अधीन उन्होंने वहाँ पूछताछ का आदेश दिया है और कहा है कि इस मामले को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के समक्ष भी उठाया जाएगा।

धान खरीद का मौसम समाप्ति की ओर है। सिंह ने बताया कि पूर्वांतल के जिलों में फरवरी के महीने में यह समाप्त हो जाएगा। उसके बाद सिंह बुंदेलखंड जाएँगे। “इस वर्ष बुंदेलखंड में धान की स्थिति बेहतर हुई है।” उन्होंने कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि बुंदेलखंड के किसानों के लिए धान खरीद का मौसम सकुशल समाप्त हो।

सुमति महर्षि स्वराज्य में वरिष्ठ संपादक हैं। वे @sumati_mehrishi के द्वारा ट्वीट करती हैं।