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मित्र चीन से कोई सहायता नहीं? खैराती राशि के लिए पाकिस्तान का आई.एम.एफ. की ओर रुख

इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट केअनुसार पाकिस्तान की नई सरकार अपनी क्षीण होती अर्थव्यवस्था के लिए पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से सहायता राशि माँगने में संकोच कर रही थी लेकिन सोमवार को उन्होंने घोषणा की कि पाकिस्तान आई.एम.एफ. का दरवाज़ा खटखटाएगा।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पहले इस प्रकार के प्रयासों का विरोध करते नज़र आए थे लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे देश को बचाने के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने कहा कि बहुपक्षियों एजेंसियों से समझौता वार्ता जल्द ही शुरु होगी। उमर ने कहा- “आज यह निर्णय लिया गया कि पाकिस्तान की विकट आर्थिक स्थिति के स्थिरीकरण और सुधार के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से सहायता के लिए समझौता वार्ता शुरु की जाएगी।”

एक लेख्य के अनुसार, पाकिस्तान ने आई.एम.एफ. की ओर तभी रुख किया है जब वह अपने सभी मित्र देशों से सहायता माँगने और विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों से दान माँगने के विकल्पों का उपयोग करके देख चुका है।

पाकिस्तान को आई.एम.एफ. से कितनी सहायता मिलेगी यह अभी अज्ञात है लेकिन तत्कालीन आर्थिक स्थिति के अनुसार उसे 9 बिलियन डॉलर की आवश्यकता है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और वित्त मंत्रालय ने यह आंकलन किया है कि पाकिस्तान को अपने कर्ज़ चुकाने के लिए 11.7 बिलियन डॉलर की आवश्यकता है।

12 और 14 अक्टूबर के बीच पाकिस्तान के वित्त मंत्री आई.एम.एफ. और वर्ल्ड बैंक की एक बैठक में बाली जा सकते हैं जहाँ वे खैराती राशि के लिए वार्ता शुरु करेंगे।

इस निर्णय से आई.एम.एफ. की कड़ी शर्तों के कारण पाकिस्तान में महंगाई बढ़ सकती है। इससे इमरान खान के लिए एक असहज स्थिति उत्पन्न होगी।

1980 से पाकिस्तान ने आई.एम.एफ. से 12 बार खैरात माँगी है जिसमें आखिरी बार सितंबर, 2013 में 6.6 बिलियन डॉलर की खैराती राशि पाकिस्तान को प्राप्त हुई थी।