राजनीति
एनआईए ने सिपाही विनायक शिंदे के घर से जब्त किया धमकी भरा पत्र छापने वाला प्रिंटर

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने कलवा में गिरफ्तार सिपाही विनायक शिंदे के फ्लैट से एक प्रिंटर जब्त किया। कहा जा रहा कि 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियो से बरामद धमकी भरा पत्र छापने के लिए उस प्रिंटर का उपयोग किया गया था। अधिकारियों ने गिरफ्तार किए गए सचिन वाझे के पुलिस मुख्यालय स्थित कार्यालय से वित्तीय लेन-देन के विवरण वाला एक रजिस्टर भी जब्त किया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2007 में लखन भैया मुठभेड़ मामले में अपनी भूमिका के लिए कारावास में रह चुके सिपाही विनायक शिंदे को बुकी नरेश गौर के साथ गिरफ्तार किया गया था।

सूत्रों की मानें तो एनआईए की टीम ने सोमवार (22 मार्च) को एक पाँच सितारा होटल का दौरा किया और सीसीटीवी फुटेज एकत्रित किए। वहाँ पर सचिन वाझे लंबे समय से एक कमरे में रह रहा था। आरोपी अभी कार में विस्फोटक लगाने के आरोप में एनआईए की हिरासत में भी है।

सीसीटीवी फुटेज में सचिन वाझे दो बैग के साथ जाते हुए दिखाई दिया था। अधिकारियों का मानना है कि उसमें नकदी थी। महाराष्ट्र का आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) सोमवार को गुजरात के कच्छ से एक व्यापारी को भी लाया था, जिसने कथित तौर पर ठाणे के व्यापारी मनसुख हिरेन हत्या मामले में गिरफ्तार गैर को 14 सिम कार्ड दिए थे। व्यवसायी ने यह कहते हुए सिम कार्ड खरीदे थे कि वह अपने व्यापार के लिए इनका उपयोग करना चाहता था लेकिन उसने सिम विनायक शिंदे को दे दिए थे।

एटीएस ने कहा, “पहले भी व्यापारी ने गैर को पाँच सिम कार्ड दिए थे, जो इसे जुए के लिए उपयोग करना चाहता था। हम उनका बयान दर्ज कर रहे हैं।”

यही नहीं, शनिवार को पूर्व पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख को सचिन वाझे को उनके सरकारी आवास पर बुलाने और उन्हें हर माह 100 करोड़ रुपये उगाही करके धन एकत्रित करने के निर्देश देने की बात कही थी। देशमुख ने इन आरोपों को झूठा बताया है। अब एनआईए इस मामले को ईडी के हवाले कर सकता है।

इसके बाद शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में विपक्ष पर निशाना साधते हुए लिखा गया, “कल तक भाजपा कह रही थी कि परम बीर सिंह विश्वास के लायक नहीं हैं। आज वही उन्हें सिर पर बैठा रही है। अब उन्हें परम बीर पर इतना प्यार कैसे आ रहा है। मुखपत्र में सवाल उठाया गया कि महाराष्ट्र सरकार को मुश्किल में डालने के लिए ही तो परम बीर का उपयोग नहीं किया जा रहा है। हालाँकि, विपक्ष यह यह ध्यान में रखे कि किसी अधिकारी के कारण सरकार बनती या बिगड़ती नहीं है।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अनिल देशमुख के धन उगाही करवाने के मामले में शरद पवार के बचाव पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “एनसीपी ने सही जानकारियाँ न देकर सबको उलझाया है। पवार बचाव में जो तर्क दे रहे हैं, वे सब झूठे हैं। 15 से 27 फरवरी के बीच अनिल देशमुख क्वारंटीन नहीं थे।”

संजय राउत ने भी प्रेसवार्ता करके कहा, “केंद्रीय एजेंसियों का गलत प्रयोग करके भाजपा महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश कर रही है। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। अगर ऐसा सोचा तो मैं उन्हें चेतावनी देता हूँ कि यह आग उन्हें भी जला देगी। सरकार सही जाँच के लिए तैयार है तो बार-बार देशमुख के पद त्यागने की बात क्यों हो रही है। अगर हम त्याग-पत्र ही लेते रहेंगे तो सरकार चलाना मुश्किल हो जाएगा।”