राजनीति
अरुणाचल के 1959 से नियंत्रण वाले हिस्से में चीन ने बनाया गाँव, उपग्रह चित्र में दिखा

नवीनतम उपग्रह के चित्र से पता चलता है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में 100 से अधिक घरों के निर्माण के साथ एक नया गाँव बना लिया है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2020 तक के उपग्रह चित्र बताते हैं कि त्सारी चू नदी के किनारे एक पूर्ण विकसित गाँव बनाया गया है। ऐसा लगता है कि गाँव गत एक वर्ष में अस्तित्व में आया है क्योंकि अगस्त 2019 में उपग्रह चित्र ने किसी भी निर्माण गतिविधि को नहीं दिखाया था।

हालाँकि, अरुणाचल प्रदेश के जिस क्षेत्र में नया गाँव स्थित है, वह वर्ष 1959 से चीन के नियंत्रण में है।

1950 के पहले भारतीय और चीनी सेना इस क्षेत्र में भिड़ चुकी थी। अगस्त 1959 में भारतीय राजदूत द्वारा चीन के विदेश कार्यालय को दिए गए एक नोट में कहा गया था कि इस क्षेत्र में एक सशक्त चीनी टुकड़ी भारतीय सीमा को पार करके आ गई है। उसने अग्रिम सैन्य दल पर बिना किसी सूचना के गोलीबारी भी की।

नोट में आगे कहा गया था कि उन्होंने पूरे सैन्य दल को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें 12 जवान थे। हालाँकि, आठ भारतीय जवान वहाँ से किसी तरह बच निकलने में समर्थ रहे थे।

रिपोर्ट में कहा गया कि गाँव नया है और एक चीनी सैन्य पोस्ट इस क्षेत्र में दशकों से मौजूद है। गत दो दशक में अरुणाचल की सीमा के साथ चीन द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे के विकास से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपस्थिति बनाए रखी हुई है।

वास्तव में चीन द्वारा निर्मित नया गाँव इस क्षेत्र में मौजूद बड़ी चीनी सैन्य चौकी से लगभग 1 किलोमीटर उत्तर पर स्थित है।

उधर, कांग्रेस क्षेत्र में चीनी सैन्य उपस्थिति के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि चौकोर आकार के चीनी सैन्य ढाँचे को गूगल अर्थ द्वारा एक दशक पहले एक छवि के रूप में लिया गया था।”

एक प्रमुख सैन्य विश्लेषक सिम टैक कहते हैं, “चित्र साफ दिखाता है कि चीनी निर्माण भारत के दावे वाली सीमा के भीतर किया गया है। यह देखना जरूरी है कि चीनी सेना ने इस घाटी में वर्ष 2000 से ही कम ही सही लेकिन अपनी आगे की स्थिति बना रखी है। इसके चलते चीन को वर्षों से घाटी में नजर रखने में मदद मिली है। उसे अपेक्षा के अनुरूप विरोध देखने को नहीं मिला है। इसी वजह से धीरे-धीरे वह घाटी में अपनी क्षमता बढ़ाता रहा है, जो आखिरकार अब एक गाँव के रूप में देखने को मिल रही है।”

भारत-चीन के संबंधों के विशेषज्ञ क्लॉद आर्पी का कहना है, “यह ऐतिहासिक रूप से एक विवादित क्षेत्र रहा है। यह पहली बार नहीं है, जब ऊपरी सुबनसिरी जिले में चीनी सैनिकों की उपस्थिति की सूचना मिली है।”

नवंबर 2020 में अरुणाचल प्रदेश के भाजपा सांसद तापिर गाओ ने इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था, “1980 के दशक से आज तक वे (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) इस क्षेत्र पर कब्जा किए हुए हैं। गाँवों का निर्माण कोई नई बात नहीं है। यह सब कांग्रेस से विरासत में मिला है।”

सांसद ने कहा, “यह कोई नया मुद्दा नहीं है। गाँव का निर्माण भले ही नया किया गया हो लेकिन कांग्रेस के शासनकाल के दौरान भूमि पर कब्जा कर लिया गया था।”