राजनीति
एनसीआरबी के अपराध आँकड़े हत्याओं की संख्या में कमी के बावजूद क्यों हैं चिंताजनक

लंबी प्रतीक्षा के बाद राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने वर्ष 2017 में हुए सभी तरह के अपराधों की रिपोर्ट जारी कर दी है। दो साल बाद जारी हुई इस रिपोर्ट में कई सकारात्मक पहलू हैं, तो कई नकरात्मक पहलू भी हैं।

2016 की तुलना में वर्ष 2017 में हत्या के मुकदमों की संख्या में कमी आई है। 2017 में हत्या के मामलों में 5.7 प्रतिशत की कमी आई है। जहाँ 2016 में देशभर में इसकी संख्या 30,450 दर्ज की गई थी, वहीं 2017 में यह कम होकर 28,653 हो गई है।

अधिकतर हत्या के मामलों में आपसी रंजिश और भूमि विवाद को कारण माना गया है। हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। हालांकि 2016 की तुलना में 2017 में प्रदेश में हत्या के आँकड़ों में गिरावट देखी गई। जहाँ उत्तर प्रदेश में साल 2016 में हत्या के 4,889 मामले दर्ज हुए थे वहीं 2017 में यह घटकर 4,324 हो गए।

थाने में एफआईआर दर्ज करने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अपराध ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 की तुलना में वर्ष 2017 में 3.8 प्रतिशत अपराध के ज्यादा मामले दर्ज किए गए। बिहार में वर्ष 2016 की तुलना में हत्या के मामलों के दर्ज होने में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा में भी दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। 2017 में आईपीसी के तहत दर्ज मुकदमों में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, स्थानीय कानून के तहत होने वाले मुकदमों में भी 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

  • अपहरण जैसे गंभीर अपराध में बढ़ोतरी एक चिंताजनक स्थिति है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, अपहरण के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है। 2016 की तुलना में 2017 में अपहरण के मामलों में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

अपहरण रोकने के मामले में कई राज्यों की सरकार विफल रही है। अपहरण के मामले में बिहार और उत्तर प्रदेश शीर्ष पर हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री अपराध पर लगाम कसने की बात कहते रहते हैं, लेकिन यहाँ स्थिति कुछ और ही है।

  • इसके साथ ही गंभीर अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। 2016 में जहाँ गंभीर अपराध के मुकदमों की संख्या 48 लाख थी, वहीं 2017 में यह बढ़कर 50 लाख हो गई है।
  • बात करें दुष्कर्म कि तो 2012 में निर्भया कानून लगने के बाद भी इसकी संख्या में कोई कमी नहीं आई है। देशभर में 2016 की तुलना में 2017 में बलात्कार के मामले में बढ़ोतरी हुई है। 2017 में बलात्कार के 32,599 मामले दर्ज किए गए हैं।

दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। यहाँ दुष्कर्म के 5,500 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने इसपर रोक के लिए कई कानून बनाए, लेकिन आँकड़े अभी भी डरावने हैं।

  • महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को रोकने में भी सरकार असफल रही है। महिलाओं के खिलाफ अपराध में सबसे आगे उत्तर प्रदेश है। वहीं दहेज उत्पीड़न में ओडिशा शीर्ष स्थान पर है।
  • राजनीतिक हत्या के मामले में झारखंड सबसे आगे है, 2017 में झारखंड में 42 राजनीतिक हत्याएँ हुई है। बिहार राजनीतिक हत्या मामले में दूसरे स्थान पर है।
  • पानी को लेकर हुए विवाद में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है। 2017 में पानी को लेकर हुए विवाद के कारण राज्य में 14 लोगों की जान चली गई। इस श्रेणी में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है।

एनसीआरबी ने भीड़ द्वारा हत्या और धर्म परिवर्तन या धार्मिक आधार पर हुई हत्या का आँकड़ा जारी नहीं किया है। एनसीआरबी ने कहा है कि गणना के समय इस तरह की कोई श्रेणी नहीं थी।

राजधानी दिल्ली में लगातार तीसरे साल भी अपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में अवैध संबंधों में होने वाली घटनाओं में भी वृद्धि देखी गई है।

वहीं, इस बार डिजिटल मामलों की मुकदमा संख्या में वृद्धि देखी गई है। क्रेडिट कार्ड और बैंक धोखाधड़ी के मामले की संख्या में तीव्रता से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साइबर सुरक्षा के लिए सख्त कानून न होने के कारण सोशल नेटवर्किंग साइट पर बढ़े हैं।