राजनीति
फर्ज़ी हिंदू पहचान धर “सबक सिखाने” के लिए वसीम ने युवती के यौन वीडियो फैलाए

उत्तर प्रदेश में मेरठ पुलिस ने एक मामले को सुलझाया है जहाँ एक मुस्लिम पुरुष ने फर्ज़ी हिंदू पहचान का उपयोग करके हिंदू लड़की को प्रेम-पाश में फँसाया, उससे यौन संंबंध बनाए और उसके यौन वीडियो वायरल कर दिए।

प्राथमिकी में युवती के कथन अनुसार, युवक ने उससे कहा था, “तुम लोगों को मैं सबक सिखाना चाहता था।”

मामले की जाँच कर रहे एक अधिकारी ने स्वराज्य को बताया कि युवक ने पुलिस से कहा कि इस कृत्य के पीछे उसकी प्रेरणा हिंदू महिला को इंटरनेट पर लज्जित करने की थी।

यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है कि हिंदू पहचान का उपयोग करके मुस्लिम पुरुष का हिंदू महिला को फँसाकर उसके वीडियो वायरल करना, कई मामलों में देखा गया है।

व्यक्ति की पहचान 29 वर्षीय वसीम अहमद के रूप में हुई है जो मेरठ के मुंडाली थाना क्षेत्र में आने वाले अजराड़ा ग्राम का निवासी है। पुलिस का कहना है कि वह विवाहित है और उसके दो बच्चे हैं।

फर्ज़ी आधार कार्ड

पुलिस ने उसपर बलात्कार और जालसाज़ी का मामला दर्ज किया है। अहमद को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस को उसके पास से “फर्ज़ी” आधार कार्ड मिला जिसपर ‘दिनेश कुमार रावत’ का नाम लिखा है। आरोपी ‘दिनेश रावत’ नाम से फेसबुक खाता भी चलाता था। वसीम अहमद के नाम पर उसका ड्राइविंग लाइसेंस और मतदाता पहचान-पत्र मिले हैं।

उसके “फर्ज़ी” पहचान-पत्र में उसका पता ज़ाकिर हुसैन कॉलोनी, मेरठ बताया गया है जबकि वास्तविक पहचान-पत्र के अनुसार उसका घर अजराड़ा में है। सभी पहचान-पत्रों में जन्म तिथि एक ही है।

पुलिस को यह भी पता चला है कि दिनेश रावत की गलत पहचान पर वह एक वर्ष से एक स्थानीय अस्पताल में नर्सिंग कर्मचारी के रूप में कार्यरत था।

मुंडाली पुलिस थाने में 6 जून का दायर एफआईआर (क्रमांक 154/2000) महिला की शिकायत पर दर्ज की गई है। कथन के अनुसार मित्र बनने से पूर्व वसीम ने अपना नाम दिनेश रावत बताया था। एक दिन उसने युवती को घर बुलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब युवती ने उससे विवाह की बात की तब उसने अपना वास्तविक नाम बताकर विवाहित और दो बच्चों का पिता होने की बात कही।

“उसने कहा मैंने जान-बूझकर तुम लोगों को सबक सिखाने के लिए तुम्हें धोखा दिया है।”, युवती के बयान में रिकॉर्ड किया गया।

वसीम पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार), 323 (जान-बूझकर चोट पहुँचाने) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज करके जाँच की जा रही है।

वसीम अहमद के नाम से बने उसके वास्तविक फेसबुक खाते में उसने स्वयं को हिंदी दैनिक पंजाब केसरी का रिपोर्टर बताया है। हालाँकि जब पुलिस ने उससे पूछा तो वह समाचार-पत्र का कर्मचारी होने का कोई पहचान-पत्र नहीं दिखा सका।

उसके अकाउंट को देखें तो पाएँगे कि वह प्रतिदिन कुछ समाचार साझा करता था जिनकी बाइलाइन में ‘वसीम अहमद’ नाम रहता था। हालाँकि बाइलाइन की लिपि रिपोर्ट की लिपि से भिन्न प्रतीत होती है।

जब पूछा गया तो जाँच अधिकारी ने बताया कि उन लोगों ने केसरी के कार्यालय से इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वह वहाँ काम करता था अथवा नहीं।

पुलिस को उसके फोन में युवती के साथ यौन क्रीड़ा के वीडियो भी मिले जिसे उसने फैला दिया था।

अधिकारी ने संवाददाता को बताया कि पुलिस पूछताछ में वसीम ने बताया कि उसने ये सब इंटरनेट पर हिंदू महिला को लज्जित करने के लिए किया था। “हमने उससे पूछा कि क्या वह किसी संगठित गैंग के लिए काम करता है। उसने कहा वह अकेला है।”, अधिकारी ने कहा।

जाँच के बाद पुलिस ने वसीम पर दूसरा मामला (एफआईआर क्रमांक 153/2020) दर्ज किया है जिसमें आईपीसी की धारा 419 (वेष धर के धोखाधड़ी) और 420 (धोखा) व सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66 (धोखे जैसे सायबर फ्रॉड) उसपर लगाई गई है।

संवाददाता ने शिकायत करने वाली युवती से भी संपर्क का प्रयास किया था परंतु उसके भाई ने कहा कि वे इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।

स्वाति गोयल शर्मा स्वराज्य में वरिष्ठ संपादक हैं और वे @swati_gs के माध्यम से ट्वीट करती हैं।