राजनीति
नरेंद्र मोदी की उज्ज्वला योजना का हर प्रयास कैसे सिद्ध हुआ सटीक

घरेलू उपयोग में प्राथमिक ईंधन के रूप में एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल राजनीतिक और आर्थिक योजनाओं में से एक है। इकोनॉमिक टाइम्स  की एक रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के अंतर्गत साढ़े तीन वर्षों में शासकीय तेल कम्पनियों की पहुँच 90 प्रतिशत घरों तक बढ़ी है।

वर्तमान में अनुमानित 25 करोड़ परिवारों के सम्मुख लगभग 25 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं जिनमें से 13.6 करोड़ शहरी और 11.3 करोड़ ग्रामीण कनेक्शन हैं। यदि दोहरे कनेक्शनों को हटा दिया जाए तो 90 प्रति शत का आंकड़ा अधिक होगा लेकिन फिर भी 75 या 80 प्रति शत की उपलब्धि भी महत्वपूर्ण है।

इस सफलता के प्रमुख कारणों में से एक है “उज्ज्वला  अनुदान योजना” जिसके अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे आने वाले प्रत्येक परिवार को तीन वर्षों तक 1600 रुपये प्रति गैस कनेक्शन प्रदान किया जाता है। इस योजना के लिए कुल अनुदान व्यय 8000 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है जो कि कई कारणों से सार्थक है।

पहला, एलपीजी का उपयोग बढ़ने से कोयला, लकड़ी और अन्य कच्चे ईंधन का उपयोग कम हुआ है जिससे धुएँ से होनी वाली पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है।

दूसरा, लगभग प्रत्येक एलपीजी उपभोक्ता वह परिवार है जो पहले केरोसिन अनुदान का लाभार्थी था। एलपीजी के बढ़ते उपयोग के कारण पिछले वित्तीय वर्ष में केरोसीन अनुदान में लगभग 3000 करोड़ रूपये की कमी आई है। यह तो तय है कि आने वाले वर्षों में एलपीजी अनुदान बढ़ेगा जिससे यह अनुमान है कि 2020 तक केरोसीन अनुदान लगभग पूर्णतः समाप्त हो जाएगा।

तीसरा, इस योजना की लाभार्थी सूची में गरीब राज्यों की संख्या अधिक है जिससे यह ज्ञात होता है कि इस योजना का क्रियान्वयन काफ़ी सही है। उत्तर प्रदेश (98.6 लाख गैस कनेक्शन), बिहार (69.4 लाख), पश्चिम बंगाल (67.8 लाख), मध्य प्रदेश (52.2 लाख), राजस्थान (43 लाख), ओडिशा (35.1 लाख), छत्तीसगढ़ (26.4 लाख) और झारखंड (25.4 लाख) प्रमुख लाभार्थी राज्य हैं। भाजपा इस योजना से सियासी फायदा भी चाहती है चूँकि पार्टी पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में अपना राजनीतिक भविष्य भी देख रही है और दोनों ही राज्य इस योजना के प्रमुख लाभार्थी भी हैं।

चौथा, आने वाले तीन वर्षों में शासन द्वारा गैस पाइपलाइन के द्वारा  400 से अधिक जिलों में घरों तक पाइप के माध्यम से एलपीजी पहुँचाने का लक्ष्य है जिससे एलपीजी के अनुदान में कमी आएगी क्योंकि गैस चाल द्वारा पहुँचाई गई एलपीजी अनुदानित नहीं होगी।

इतने अधिक जिलों तक गैस को पाइप के माध्यम से पहुँचाने के लिए अत्यधिक व्यय की आवश्यकता है लेकिन यह एक दूरदर्शी योजना होगी।नएलपीजी को लोगों के घर तक पहुँचाने की यह योजना प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अभी तक की सर्वश्रेष्ठ योजना होगी। पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से भी यह एक सही और लोकप्रिय प्रस्ताव होगा। गरीबों के लाभ हेतु अत्यल्प अनुदान भी योजना बजट द्वारा वहन किया जा सकता है।

यदि चुनाव के बीच में भाजपा तीन हिन्दी राज्यों में चल रही विरोधी लहर पर काबू कर पाती है तो इस योजना का उसकी इस जीत में बहुत बड़ा योगदान होगा और पार्टी महिलाओं तक अपनी योजनाओं को ले जाने में भी सफल होगी।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।