राजनीति
मोदी का वर्तमान कैबिनेट भावी प्रतिभा का भी कर रहा निर्माण

आशुचित्र- मोदी के अधीन भाजपा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति में क्षणिक नहीं है। कैबिनेट से यह संदेश मिलता है, साथ ही राज्यों और जातियों के प्रतिनिधित्व का भी संकेत मिलता है।

2014 में नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में कम मेधावी चेहरे देखने को मिले थे, इनमें से कुछ ही अनुभवी थे। लोगों ने उस समय पूछा कि ऐसी बहुमत के साथ उन्होंने इन लोगों में से क्यों चुना, अन्य लोगों को क्यों समावेशित नहीं किया? इसका उत्तर उनका नव मंत्रीमंडल ने दिया है जिसने कल (30 मई) को शपथ ग्रहण किया, जिसमें 23 पुराने व कई नए चेहरे देखने को मिले।

एक पंक्ति में कहा जाए तो नरेंद्र मोदी दीर्घकाल का सोचकर एक नई पीठ स्थापित कर रहे हैं और भूगोल के सभी हिस्सों से, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अच्छा प्रदर्शन किया, नई प्रतिभाओं को लेकर आए हैं। यदि नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भाजपा राजनीति का केंद्रबिंदू बनी रहे, तो उनकी विरासत सिर्फ उनके कार्यकाल के दौरान नहीं बल्कि उनके जाने के बाद पीछे रह गए कुशल मंत्रियों में भी झलकनी चाहिए।

हालाँकि कैबिनेट में अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे मेधावी व्यक्तित्वों का न होना खलेगा। सुरेश प्रभु, मेनका गांधी और जयंत सिन्हा की अनुपस्थिति अस्पष्ट है, शायद मोदी को उनका कार्य पसंद नहीं आया या शायद उनकी राजनीति।

अल्प मात्रा में मोदी लैटरल (पीछे से) प्रतिभाओं को लाना पसंद करते हैं। उनके पहले कार्यकाल में पूर्व नौकरशाह हरदीप पूरी और आर के सिंह व पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह थे। इस बार उन्होंने पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर, जो चीन (डोकलम संकट के समय) और यूएस के साथ काम कर चपके हैं, को मंत्रीमंडल में जगह दी है।

अब देखें उन्होंने किन लोगों को अनुभवी बनाया है और अगले पाँच साल में भी यही करेंगे। राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे अनुभवी नेताओं के अलावा उन्होंने पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान जैसे अत्यंत कुशल मंत्री अपने पहले कार्यकाल में दिए हैं। साथ ही स्मृति ईरानी, निर्मला सीतारमन, रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर जैसे लोग भी हैं जिनसे लोगों को बड़ी अपेक्षाएँ हैं।

इनके अलावा अमित शाह भी है जो सिर्फ उच्च श्रेणी के प्रबंधक नहीं बल्कि सरकार बनाने में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाले व्यक्ति भी हैं और हर किरदार में वे कुशल प्रदर्शन करेंगे इसकी अपेक्षा है।

मोदी के दूसरे कार्यकाल के अंत में बहुत कम लोग ही बचेंगे जो कहेंगे कि भाजपा में मेधा की कमी है। हम कहते हैं कि कांग्रेस में बहुत मेधावी व्यक्ति हैं, इसलिए नहीं क्योंकि वे सच में मेधावी हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें मंत्री के रूप में कार्य तरने का अवसर मिला है।

मंत्रालयों के निचले पदों पर नए लोगों को लाना एक ऐसा कदम है जो कोई पूंजीवादी उठाएगा। ह जानता है कि 10 लोगों पर निवेश करने से पाँच विफल होंगो, दो औसत रहेंगे, दो अच्छा प्रदर्शन करेंगे और एक कोई होगा जो धूम मचा देगा।

23 नए चेहरों के साथ कहा जा सकता है कि हमें दो उच्च पदों पर आसीन होने वाले व्यक्ति मिलेंगे और चार-पाँच अनुभवी मंत्री मिलेंगे। अन्य लोग यदि अपेक्षा से कम प्रदर्शन करते हैं तो अगले दो सालों में उन्हें बदल दिया जाएगा। मोदी काम करवाने वाले व्यक्ति हैं।

कुछ भावी मुख्यमंत्री भी हो सकते हैं। नवीन पटनायक के सेवानिवृत्त होने के बाद अवश्य ही धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा की बागडोर संभालेंगे। गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान में उच्च पद के लिए तैयार किया जा सकता है और किशन रेड्डी को तेलंगाना में बड़ी भूमिका निभाने को मिलेगी। किसी राज्य में स्मृति ईरानी भी मुख्य भूमिका में देखी जा सकती हैं, इसे नकारा नहीं जा सकता।

पिछले पाँच सालों में मोदी ने अप्रसिद्ध चेहरों को मुख्यमंत्री बनाया है, हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर, झारखंड में रघुबर दास और महाराष्ट्र में देवेंद्र फडनवीस। इन तीनों ने अपने-अपने राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया है और वह भी ऐसे राज्य में जहाँ पहले पार्टी शीर्ष स्तर पर नहीं थी।

इस पीठ में हमारे पास भावी प्रधानमंत्री भी हो सकते हैं जैसे अमित शाह, देवेंद्र फडनवीस, नितिन गडकरी, योगी आदित्यनाथ और अनुभवी शिवराज सिंह चौहान। भाजपा के पास पोषित करने के लिए अभी भी बहुत मेधा बची है जैसे हेमंता बिस्वा सरमा जो सिर्फ असम के बावी मुख्यमंत्री ही नहीं होंगे बल्कि केंद्रीय मंत्री भी होंगे।

मोदी के अधीन भाजपा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति में क्षणिक नहीं है। कैबिनेट से यह संदेश मिलता है, साथ ही राज्यों और जातियों के प्रतिनिधित्व का भी संकेत मिलता है।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।