राजनीति
कमलेश तिवारी के पुत्र द्वारा योगी आदित्यनाथ के पाँव छूने का मुद्दा मात्र जातिगत राजनीति

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मारे गए हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी के परिजनों से रविवार (20 अक्टूबर) को भेंट की। कमलेश तिवारी की पत्नी किरण और बेटे सत्यम के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मामले की निष्पक्ष जाँच कराकर दोषियों को मृत्युदंड की सजा दिलाने का आश्वासन दिया।

पत्नी ने मुख्यमंत्री को महाराज जी के नाम से संबोधित करते हुए कहा, “हमलोग महराज जी के अनुयायी हैं। हमें भरोसा है कि वे न्याय दिलाएँगे। महाराज जी हम सबके पूज्य हैं।” योगी को गोरखापीठ संप्रदाय के पीठाधीश्वर होने के चलते महाराज जी कहा जाता है।

मुख्यमंत्री से मिलने के बाद समाचार एजेंसी एएनआई  से बात करते हुए किरण तिवारी ने कहा, “मुख्यमंत्री जी परिवार के सदस्य की तरह हैं। हम लोग इसलिए उनके पास अपनी मांग रखने के लिए गए थे।”

दूसरी ओर कमलेश तिवारी की माँ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात को मजबूरी बताया है। माँ ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “मुख्यमंत्री इसलिए मिले कयोंकि अधिकारी लोग दबाव बना रहे थे।”

इससे पहले, कमलेश तिवारी के पुत्र सत्यम तिवारी ने उत्तर प्रदेश पुलिस के बजाय राष्ट्रीय जाँच एजेंसी से जाँच कराने की माँग की थी, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलने के बाद उनके सुर बदले बदले से नजर आए।

मुलाकात के समय ली गई एक तस्वीर चर्चा का विषय बन चुकी है। तस्वीर में कमलेश तिवारी का पुत्र मुख्यमंत्री का पाँव छूते हुए नज़र आ रहा है। हिंदू धर्म में पाँव छूने का मतलब होता है कि आप सामने वाले का सम्मान करते हैं। शोक काल में भी सत्यम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पाँव छूकर यही संदेश दिया।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के समर्थकों को लगता है कि शोकाकुल परिवार के यहाँ न जाकर मुख्यमंत्री ने गलत संदेश दिया है। लोगों के अंदर यह धारणा बन गई कि मुख्यमंत्री एक असंवेदनशील इंसान हैं। विपक्ष आने वाले समय में इस मुद्दे को भी भुना सकता है।

सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के आलोचकों ने तस्वीर को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन सबके अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह तस्वीर खिंचाकर असंवेदनशीलता का परिचय दिया है। वहीं कुछ लोगों ने इसे जातीय नज़रिए से भी देखा है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह ने ट्वीट कर लिखा, “जानबूझकर स्व0 कमलेश तिवारी जी के परिवार को अपमानित करने के उद्देश्य से इस एंगल की फोटो सरकार ने जारी की। इनका #मकसद #सिर्फ #अपमानित #करना है ब्राहमण का बेटा कबसे पहाड़ी ठाकुर का पैर छूने लगा, हिन्दू धर्म में हर्गिश ऐसा वर्जित है।”

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण किस तरह जातिगत वर्चस्व के शिकार हो रहे हैं, यह सोशल मीडिया पर योगी आदित्यनाथ को लेकर की गई टिप्पणी से पता चलता है। अचानक से एक हिंदू कमलेश तिवारी ब्राह्मण हो जाता है और अचानक से कोई संन्यासी से पहाड़ी ठाकुर हो जाता है? ब्राह्मण जाति वर्तमान में भी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक केंद्र में है।

उत्तर प्रदेश की वंशावली राजनीति में पाँव छूना कोई नया उदाहरण नहीं है। राजनीतिक लाभ के लिए मंच कई बार एक-दूसरे का पाँव छूआ जाता है, लेकिन तब यह राजनीतिक मुद्दा नहीं बनता है । ना ही तब यह जातीय नज़रिए से देखा जाता है।

योगी आदित्यनाथ को उनके विरोधी अलग-अलग रूप में देखते हैं। कभी भगवान ब्रिगेड तो कभी ठाकुर के रूप में बताकर विरोध करते हैं। हालांकि राज्य के अधिकतर लोगों के लिए आदित्यनाथ एक संन्यासी का स्थान भी रखते हैं।

ये सभी योगी आदित्यनाथ से प्रशासक के तौर पर प्रश्न-उत्तर भी करते हैं। कई बार काम से नाराज़ भी होते हैं, लेकिन इनके मन में उनके प्रति आस्था कम नहीं होती है।

योगी आदित्यनाथ को मीडिया ने संन्यासी से अजय सिंह बिष्ट का नाम दे दिया है। हिंदू धर्म के अनुसार, एक संन्यासी का संबंध किसी परिवार या जाति से नहीं होता है। यह निश्चित रूप से भुला दिया गया है और योगी आदित्यनाथ को उनके पूर्व-संन्यासी नाम और जाति से संदर्भित करने की प्रवृत्ति पिछले दो दिनों के दौरान वापस आ गई है।