राजनीति
जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक आग में भाजपा नेता राम माधव का बयान घी की तरह

बुधवार शाम (21 नवंबर) को पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। हालाँकि इस दावे के एक घंटे बाद ही राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधान सभी भंग कर दी है।

इस निर्णय को अलग-एलग प्रतिक्रियाएँ मिल रहीं हैं। जहाँ एक तरफ कांग्रेस इस फैसले को असंवैधानिक बता रही है, वहीं दूसरी ओर पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष हर्षदेव सिंह ने इस आदेश की सराहना की है।

इसी बीच भाजपा नेता राम माधव के बयान ने राजनीति में और गर्मी ला दी है। उन्होंने कहा, “पिछले महीने पीडीपी और एनसी ने स्थानीय चुनावों का बहिष्कार किया था क्योंकि उन्हें सीमा पार से निर्देश मिले थे। संभवतः उसी प्रकार अभी भी उन्हें मिलकर सरकार बनाने के लिए निर्देश मिले हों।”

उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने उन्हें उनके बयान को सिद्ध करने की चुनौती दी। और अगर वे सिद्ध करने में असमर्थ होते हैं तो माफी की भी माँग की।

चुनाव आयोग ने कहा है कि वे आचार-संहिता लागू करने के विषय में विचार करेंगे। यह भी हो सकता है कि लोक सभी चुनावों के साथ ही जम्मू-कश्मीर के चुनाव भी आयोजित किए जाएँ और तब तक राष्ट्रपति शासन बना रहे।