राजनीति
जानिए जामिया इस्लामिया और एएमयू में सीएए के विरुद्ध हिंसक प्रदर्शन का घटनाक्रम

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ हफ्ते भर से जारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन रविवार (15 दिसंबर) रात को तब हिंसक हो गया जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों ने दिल्ली में जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में पुलिस की कथित कार्रवाई से उत्तेजित होकर विश्वविद्यालय परिसर से बाहर जाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने छात्रों को बाहर निकालने से रोका जिसके बाद प्रदर्शन हिंसा की ओर अग्रसर हो गया।

विश्वविद्यालय परिसर के बाहर ना निकल पाने के कारण छात्रों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में आँसू गैस के गोले छोड़े और साथ ही पानी के गोले भी दागे ताकि प्रदर्शनकारी छात्रों को शांत किया जा सके।

एएमयू के प्रवक्ता शफी किदवई ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सभी परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है और विश्वविद्यालय को 5 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है।

इस प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के विश्वविद्यालय में दाखिल होने के बाद कुछ छात्रों को गिरफ्तार भी किया गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई हिंसा का विरोध करने पर पुलिस द्वारा उनपर लाठीचार्ज किया गया।

अलीगढ़ के डीएम चंद्र भूषण सिंह ने एएमयू में हुई हिंसा के मद्देनज़र रविवार रात 10 बजे से सोमवार रात 10 बजे तक अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है।

वहीं रविवार रात को दिल्ली के जामिया इस्लामिया स्थित जामिया नगर इलाके में प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया जिसमें दिल्ली परिवहन निगम की तीन बसों समेत आसपास से गुज़र रही गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया।

प्रदर्शन इतना उग्र हो चुका था कि मौके पर मौजूद दमकल की चार गाड़ियों में से एक गाड़ी से प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की जिसमें मौजूद फायरमैन को काफी चोट आईं हैं। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने यहाँ तक बताया कि जिस वक्त आगजनी हुई उस समय गाड़ियों में सवारियाँ मौजूद थीं।

एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (एएनआई) की खबर के अनुसार जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की कुलपति, नज़मा अख्तर ने रविवार की रात को खुलासा किया कि विश्वविद्यालय के छात्रों ने संशोधित नागरिकता अधिनियम के खिलाफ किसी को भी विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं बुलाया था।

नज़मा अख्तर ने बताया कि विरोध प्रदर्शन का आह्वान विश्वविद्यालय के आसपास की कॉलोनियों के सदस्यों ने किया था। इसके बाद, संशोधित कानून का विरोध करने वाले बाहरी लोगों ने दिल्ली पुलिस के साथ झड़प के बाद विश्वविद्यालय के परिसर, हॉस्टल और पुस्तकालय में प्रवेश किया।

अख्तर ने यह भी कहा कि जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र पहले से ही पुस्तकालय में बैठे थे जब बाहरी लोग पुस्तकालय में घुसे तो पुलिस बल समझ नहीं पाई कि असली अपराधी कौन है और कुछ छात्र घायल हो गए।