राजनीति
पाकिस्तान और पीओके में जैश अड्डों पर हवाई हमले में छिपे गूढ़ अर्थ

आशुचित्र- बालाकोट पर सर्जिकल स्ट्राइक और वायुसेना के हमले ने खेल परिवर्तित कर दिया है। अब चाल पाकिस्तान की है। ये पीछे हट सकता है या आगे बढ़ सकता है और हमें दोनों के लिए तैयार रहना है।

जैश-ए-मोहम्मद (जेम) के प्रशिक्षक शिविर पर आज (26 फरवरी को) भारतीय वायुसेना के हमले को कई तरह से डीकोड किया जाना आवश्यक है।

पहला, और सबसे स्वाभाविक यह है कि आतंक इन्फ्रास्ट्रक्चर को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) (मुज़फ्फराबाद और चकोठी) और पाकिस्तान के बीतर (बालाकोट) जोनों जगह निसाना बनाया गया है। इस तरह कारगिल के समय नियंत्रण रेखा को पार न करने के निर्णय को दरकिनार कर पाकिस्तान में घुसा गया। हम न सिर्फ भारतीय भूभाग या पीओके में आतंक को हरा रहे हैं, बल्कि हम पाकिस्तान तक चले गए हैं।

दूसरा, वायुसेना के उपयोग ने बता दिया है कि हमारी सर्जिकल स्ट्राइक सिर्फ ज़मीनी कार्यवाही तक ही सीमित नहीं है। आवश्यकतानुसार अन्य रास्तों का भी प्रयोग किया जाएगा।

तीसरा, जहाँ बालाकोट प्रशिक्षण शिविर पर हमला पुलवामा में जेम द्वारा केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर हमले की एक प्रतिक्रियात्मक कार्यवाही है, सरकार ने विदेश सचिव विजय गोखले से मीडिया को संबोधित करने के लिए कहा। वहीं उरी के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक पर सेना ने मीडिया को संबोधित किया था। इन दो संबोधनों में अंतर यह है कि जहाँ पहले में सैन्य प्रवृत्ति झलकती है वहीं वर्तमान कार्यवाही में राजनयिक दल की भूमिका झलकती है।

चौथा, गोखले के संबोधन में दो महत्त्वपूर्ण बातें थीं- यह स्ट्राइक गैर-सैन्य और पूर्व रिक्तिपूर्व थी। गैर-सैन्य का अर्थ है कि हम पाकिस्तान से युद्ध लड़ने नहीं जा रहा और न ही बात को और बढ़ाना चाहते हैं। हमारा निशाना केवल आतंकवादी हैं जो हमें निशाना बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य पाकिस्तान नहीं है।

पाँचवा, “पूर्व रिक्तिपूर्व” का अर्थ यह है कि यह 14 फरवरी के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले का बदला नहीं था। बल्कि यह भावी हमलों से रक्षा के लिए था। यह एक कोडेड संदेश है जिसके पाकिस्तान और वैश्विक दर्शक के लिए दोहरे अर्थ हैं- इसका अर्थ है कि भविष्य में हम प्रतिक्रियात्मक नहीं होंगे और पनपते खतरे को ही नष्ट करने के लिए कार्यवाही कर सकते हैं। यह इमरान खान को जवाब भी है जिन्होंने कहा था कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर वे कदम उठाएँँगे। जेम के प्रशिक्षण शिविर को बम से उड़ाकर जिसमें से एक का संबंध मसूद अज़हर के साले युसुफ अज़हर से था, वायुसेना ने इमरान खान को बालाकोट के मलबे में साक्ष्य ढूंढने का न्यौता दे दिया है।

एक दूसरे स्तर पर यह वैश्विक समुदाय को भी एक सौम्य संदेश भेजता है कि बारत वही कर रहा है जो कोई और देश भी आत्मरक्षा में करता। यदि तीन समेत वैश्विक समुदाय नहीं चाहता कि दो परमाणु राष्ट्रों के बीच तनाव बढ़े तो उन्हें जेम जैसे संगठनों का पाकिस्तान द्वारा भरन-पोषण किए जाने के विरोध में आगे आना चाहिए।

छठा, 1 जनवरी को एएनआई को दिए साक्षात्कार में मीडिया नरेंद्र मोदी के एक कथन पर ध्यान देने से चूक गई। उनसे पूछा गया था कि उरी के बाद हुई सर्जिक स्ट्राइक के बावजूद पाकिस्तान क्यों नहीं बदला, तब मोदी ने सरलता से कहा, “एक लड़ाई से पाकिस्तान सुधर जाएगा यह सोचना बहुत बड़ी गलती होगी। पाकिस्तान को सुधरने में अभी और समय लगेगा।”

इस अहानिकर कथन का अर्थ अब जाकर स्पष्ट हुआ है। इसका अर्थ है कि प्रधानमंत्री जानते थे कि और प्रयासों की आवश्यकता है और सरकार इन्हें क्रियान्वित करने के लिए सही समय की प्रतीक्षा कर रही थी। पुलवामा ने उकसाया और भारतीय वायुसेना ने अपना काम कर दिया।

हमने यह दिखा दिया है कि हम पाकिस्तान में घुसकर भी प्रहार कर सकते हैं जो अपने आप में एक संदेश है। लेकिन यह सोचना हमारी मूर्खता होगी कि पाकिस्तान कुछ नहीं करेगा। हमें दो संभावनाओं के लिए तैयार रहना चाहिए- कश्मीर और अन्य स्थानों पर आत्मघाती हमलों में बढ़ोतरी और दूसरा वैसा हो सकता है जो हमने बालाकोट में किया- भारत के किसी महत्त्वपूर्ण रणनीतिक बिंदू पर आक्रमण।

बालाकोट पर सर्जिकल स्ट्राइक और वायुसेना के हमले ने खेल परिवर्तित कर दिया है। अब चाल पाकिस्तान की है। ये पीछे हट सकता है या आगे बढ़ सकता है और हमें दोनों के लिए तैयार रहना है।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। उनका ट्वीटर हैंडल @TheJaggi है।