राजनीति
आँकड़े: शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने कैसे हटाया ‘बीमारू’ राज्य का टैग

प्रसंग
  • 15 साल पहले का मध्य प्रदेश। आज का मध्य प्रदेश। आँकड़ों में यह रही है इसकी यात्रा।

पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के तहत एक ‘बीमारू’ राज्य का दर्जा होने से लेकर, भाजपा की अगुवाई वाली शिवराज सिंह चौहान सरकार के तहत 2017-18 में वर्तमान कीमतों पर 7.07 लाख करोड़ की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अंकित करने के बाद 2018-19 में लगभग 8.26 लाख करोड़ की जीडीपी के साथ, जीएसडीपी के सन्दर्भ में भारत का 8वाँ सबसे बड़ा राज्य बनने तक, मध्य प्रदेश अच्छी अर्थव्यवस्था की एक अच्छी राजनीतिक कहानी बनकर सामने आया है।

2017-18 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 79,907 रुपए हो गई है, जो 2016-17 में 73,268 रुपये थी, जो कि 9.06 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।

मध्य प्रदेश की शानदार सफलता की कहानी इस तथ्य से साफ जाहिर होती है कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (एमवाईएसवाई), जो उभरते उद्यमियों को बिना किसी संपार्श्विक संपत्ति के ऋण और सक्षम व्यावसायिक वातावरण प्रदान करती है, के शुभारंभ के बाद 2014 से नए स्टार्टअप उद्योग बहुतायत मात्रा में फले-फूले हैं।

पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश में 600+ स्टार्टअप उभरे हैं।

मध्य प्रदेश में विटीफीड (इन्टरनेट मीडिया कंपनी), बैग2बैग (ऑनलाइन होटल्स), रैकबैंक (डाटा सेण्टर), मालगाड़ी (अंतर-शहर परिवहन), माय सानिका (कैंसर केयर सोसाइटी), ओये24 (ऑनलाइन फूड डिलीवरी), टुकटुक (ऑटोरिक्शा) एवं अन्य कई शीर्ष स्टार्टअप हैं।

ताज़ा सब्जियों, लांड्री सेवाओं, यूटिलिटी सेवाओं, तैयार भोजन से लेकर शहर परिवहन, ई-कॉमर्स और जैविक खेती तक ये स्टार्टअप सब कुछ लोगों के दरवाज़े तक लेकर आये हैं।

जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दक्ष नेतृत्व में स्टार्टअप में उछाल सराहनीय है, वहीं इस कृषि प्रधान राज्य ने 2011-12 से 2016 तक लगातार पाँच वर्षों तक “कृषि कर्मन पुरस्कार” सगर्व प्राप्त किया है क्योंकि इसने पिछले पाँच वर्षों में 18 प्रतिशत की औसत वार्षिक कृषि वृद्धि दर्ज की है। राज्य में कृषि अर्थव्यवस्था जीएसडीपी का 34 प्रतिशत हिस्सा है और राज्य की कामकाजी उम्र की आबादी में 62 प्रतिशत को आजीविका प्रदान करती है।

2017 में आठ फसलों (तिलहन और दलहन) के लिए शुरू हुई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक और प्रमुख योजना, भावांतर भुगतान योजना, जो 2018 में 13 खरीफ़ की फसलों तक विस्तारित कर दी गई, ने किसानों के लिए चमत्कार किया है।

इस योजना के तहत, जब भी कृषि उत्पाद की बाजार कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे गिरती हैं, तब शिवराज सिंह चौहान की सरकार किसानों को इस अंतर का भुगतान करती है। इस तरह से सरकार सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की सीमाओं से निपटने में सक्षम है और बड़ी संख्या में किसानों को मजबूरन बिक्री की स्थिति से बचाती है।

पंजाब के विपरीत, मध्य प्रदेश ने आढ़तियों के बजाय ई-उपार्जन के माध्यम से सहकारी समितियों के जरिए खरीद का विकल्प चुनते हुए अपनी खरीद प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत किया। उच्चतर खरीद को कृषि के मशीनीकरण और कृषि ऋणों की सरल उपलब्धता के कारण बढ़ी उत्पादकता से सहायता मिली है।

इससे पहले, शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 2007-08 और 2012-13 के बीच केंद्र के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 100 रुपए प्रति क्विन्टल का बोनस भी दिया था जिसे 2013-14 और 2014-15 के बीच बढ़ाकर 150 रुपए प्रति क्विन्टल कर दिया था।

उच्च मूल्य वाली फसलों और पशुधन के लिए अनाज और दलहन से विविधीकरण राज्य की एक और उपलब्धि है। पाँच वर्षों (2012-17) में, पशुपालन में मध्य प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 8,976 करोड़ रुपये से चार गुना बढ़कर 33,751 करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि के दौरान मत्स्यपालन में जीएसडीपी में तीन गुना वृद्धि – 650 करोड़ रुपए से 1805 करोड़ रुपए – हुई है।

इसके अलावा दुग्ध उत्पादन में 2006-07 में 6.4 मिलियन टन से 2014-15 में 10.8 मिलियन टन की वृद्धि दर्ज हुई और सब्जी उत्पादन ने 2010-11 में 3.6 मिलियन टन से 2013-14 में 14.2 मिलियन टन की वृद्धि दर्ज की, जिससे राज्य ने देश के सबसे बड़े सब्जी उत्पादकों की सूची में 13 वें स्थान से चौथे स्थान की छलांग लगाई।

किसानों के पारिश्रमिक के सम्बन्ध में एक अच्छी सरकारी नीति बुनियादी ढाँचे के विकास से मेल खाती है। सिंचाई में तेजी से निर्णायक कदम उठाए गए हैं, जिससे सकल सिंचित क्षेत्र 2000-01 में महज 4.3 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 2014-15 में अच्छा खासा 10.3 मिलियन हेक्टेयर होकर दोगुने से भी अधिक हो गया।

2000-01 में, मध्य प्रदेश में सिंचाई अनुपात 24 प्रतिशत था, जो प्रभावशाली ढंग से 2013-14 में 41.2 प्रतिशत और 2014-15 में 42.8 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार सार्वजनिक निवेश और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के माध्यम से सिंचाई के बुनियादी ढांचे का एक प्रभावशाली नेटवर्क स्थापित करने में कामयाब रही है, जिसमें पारंपरिक कुएँ, ट्यूबवेल, टैंक/तालाब और सरकारी नहरें शामिल हैं।

ट्यूबवेल के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र 2000-01 में 0.9 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 2013-14 में 3.2 मिलियन हेक्टेयर हो गया, पारंपरिक कुओं के लिए यह क्षेत्र 1.9 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 3.3 मिलियन हेक्टेयर हो गया, सरकारी नहरों के जरिये सिंचाई सुविधा का दायरा 2000-01 में 0.9 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 2013-14 में 1.8 मिलियन हेक्टेयर हो गया और टैंकों के माध्यम से सिंचाई का यह क्षेत्र 0.1 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 0.3 मिलियन हेक्टेयर तक पहुँच गया।

मध्य प्रदेश का 16 वाँ सबसे बड़ा राज्य सागर एक साक्ष्य है कि राज्य के निवासियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कृषि और प्रौद्योगिकी के मेल ने किस प्रकार कार्य किया है और इसका श्रेय सुशासन को जाता है।

शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने राज्य में 24 घंटे की बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की, जिसमें से आठ घंटे की आपूर्ति विशेष रूप से कृषि उद्देश्यों के लिए थी। यह दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना को आक्रामक रूप से कार्यान्वित करने और कृषि के लिए अलग-अलग ग्रामीण फीडर प्रदान करने के अतिरिक्त था। 43,517 गाँवों को 71,688 किलोमीटर लम्बी 11 किलोवाट लाइन का एक अलग फीडर दिया गया है।

मध्य प्रदेश में सड़क घनत्व भी 2000-01 में 526.8 प्रति हजार वर्ग किमी से बढ़कर 2012-13 में 742.3 प्रति हजार वर्ग किमी हो गया है। इसी अवधि के दौरान डामर वाले रास्ते भी 49 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत तक पहुँचे हैं जिससे किसानों को कम जोखिम पर बड़े बाजारों तक पहुँचने में मदद मिली है। 19,386 किलोमीटर सड़क का निर्माण करने के लिए 2013 में शुरू की गयी मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना राज्य में भाजपा के मजबूत नेतृत्व के तहत बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन में एक केस स्टडी है।

सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि राज्य के किसानों के बेटों और बेटियों के लिए पिछले साल शुरू हुई कृषक उद्यमी ऋण योजना का लाभ कई शिक्षित ग्रामीण युवाओं ने उठाया है। इस योजना के तहत 40 प्रतिशत के अनुदान, यदि ऋण राशि 25 लाख या उससे ज्यादा है, के साथ 1000 प्रसंस्करण केन्द्रों के माध्यम 10 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपए तक का ऋण लिया जा सकता है।

यह सच है कि बच्चियों का कल्याण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विकास मंत्र में हमेशा सबसे आगे रहा है और यह 2017 में शुरू की गयी लक्ष्मी लाडली योजना द्वारा सत्यापित भी होता है।

इस योजना के तहत, सरकार प्रत्येक वर्ष 6,000 रुपये के राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र को कुल पाँच वर्षों के लिए खरीदती है और इन्हें समय-समय पर नवीनीकृत किया जाता है। छठी कक्षा में लड़की के प्रवेश के समय 2000 रुपए और नौवीं कक्षा में प्रवेश पर लड़की को 4000 रुपए का भुगतान किया जाता है। जब वह कक्षा 11 में प्रवेश लेती है तब उसे 7500 रुपए दिए जाते हैं। उसकी उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के दौरान उसे प्रति महीने 200 रुपए दिए जाते हैं। 21 वर्ष पूरा होने पर उसे शेष राशि दे दी जाएगी, जो 1 लाख रुपए से अधिक होगी।

इसी तरह, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना नव विवाहित जोड़ों, विधवाओं और तलाकशुदा व्यक्तियों की पर्याप्त मदद कर रही है।

कृषि के अलावा, राज्य में एमएसएमई इकाइयों की संख्या 2012-13 से लगातार बढ़ रही है। 2012-13 में पंजीकृत सूक्ष्म, लघु, और माध्यम उद्योगों की संख्या 19,894 से बढ़कर 2016-17 में 87,071 हो गयी जिससे 36 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला।

रसायन, कपड़ा और विनिर्माण का गढ़ ग्वालियर, जो नई दिल्ली-चेन्नई रेलमार्ग पर एक मुख्य जंक्शन होने के कारण महत्त्व पाता है, राष्ट्रीय राजमार्ग 3, राष्ट्रीय राजमार्ग 75 और राष्ट्रीय राजमार्ग 92 पर सिथोली, बनमोर और मालनपुर के तीन औद्योगिक क्षेत्रों से घिरा है। इंदौर निश्चित रूप से ऑटोमोबाइल, खुदरा और रियल एस्टेट का गढ़ है और यह मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी भी है जो प्रसिद्ध पीथमपुर विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और सनवर औद्योगिक बेल्ट का घर है।

वर्ल्डपे, इम्पेटस, आईबीएम और कंप्यूटर साइंस कॉर्पोरेशन (सीएससी) सॉफ्टवेयर कंपनियाँ हैं जो एक सॉफ्टवेयर हब के रूप में इंदौर के उदय में योगदान दे रही हैं। 2011 में टीसीएस के आगमन अलावा, इन्फोसिस द्वारा स्थापित डेवलपमेंट सेंटर और पीथमपुर में सिप्ला, इप्का, लूपिन, ग्लेनमार्क और यूनिकैम जैसी फार्मा कंपनियों की उत्पादन इकाइयों ने इंदौर को एक उभरता हुआ औद्योगिक क्षेत्र बना दिया है।

रतलाम भी ऐसा ही एक शहर है जो जेवीएल, हाइटेक, शबा केमिकल्स, बोर्डिया केमिकल्स, सुजान केमिकल्स जैसे कृषि आधारित और रसायन कारखानों का गढ़ है।

विश्व प्रसिद्ध “मोजरी” फुटवियर का स्रोत-क्षेत्र होने के साथ मध्य प्रदेश की सोयाबीन बेल्ट देवास और बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और कैल्साइट के समृद्ध भंडारों के साथ खनन बेल्ट रीवा हर तरीके से मध्य प्रदेश की समृद्ध औद्योगिक विवधता का प्रदर्शन करते हैं।

जबलपुर का उल्लेख किए बिना मध्यप्रदेश में औद्योगिकीकरण पर कोई चर्चा पूर्ण नहीं होती है। जबलपुर न केवल गेहूँ, चावल, चारा, बाजरा, कपास, तिलहन, दलहन और गन्ना उगाने वाला महत्त्वपूर्ण जिला है बल्कि फर्नीचर निर्माण, आराघर, शीशे का समान, इस्पात संरचनाओं, लकड़ी की कटाई, तम्बाकू, सीमेंट और निश्चित रूप से कोका कोला और पार्ले जैसे विविध क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों का गढ़ होने के अलावा कच्चे लोहे को ढालने और गन कैरिज फैक्टरी का घर भी है।

हालाँकि भोपाल दिसम्बर 1984 में गैस त्रासदी से डर गया था तथा एक अक्षम और असंवेदनशील कांग्रेस शासन ने यूनियन कार्बाइड के पूर्व सीईओ वॉरेन एंडरसन को उस भयावह अपराध के लिए बिना किसी सजा या जवाबदेही के भारत से फरार हो जाने दिया था, लेकिन यह शहर आज एक संपन्न सॉफ्टवेयर और आईटी हब है और साथ ही भोपाल से 46 किलोमीटर दूर साँची स्तूप जैसे आकर्षणों के कारण एक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो रहा है।

एक कम ज्ञात तथ्य यह है कि मध्य प्रदेश ने 2016 में 7.5 करोड़ पर्यटकों को आकर्षित करने के बाद 2017 में 15.05 करोड़ पर्यटकों को आकर्षित किया जिसमें 3.63 लाख विदेशी शामिल थे। चाहे यह ग्वालियर का वार्षिक व्यापार मेला हो या प्राचीन अवन्ती साम्राज्य की राजधानी तथा 16 “महाजनपदों” में से एक जनपद उज्जैन जैसा शहर, या फिर यूनेस्को की एक विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध छतरपुर में खजुराहो के मंदिर हों, मध्य प्रदेश पुरानी दुनिया के आकर्षण को प्रगितिशील आधुनिकता के साथ जोड़ता है और इंदौर इसे सबसे अच्छे तरीके से प्रदर्शित करता है। 2017 में स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर को 434 शहरों के बीच भारत के सबसे ज्यादा स्वच्छ शहर होने का दर्जा मिला था और 2018 में फिर से इस शहर ने 1000 शहरों और कस्बों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

यदि वास्तव में एक परीक्षा हो कि राजनीतिक इच्छाशक्ति एक बीमार आर्थिक संरचना को एक आर्थिक रूप से जीवंत और स्वस्थ राज्य में कैसे परिवर्तित कर सकती है, तो भाजपा शासन के पिछले 15 वर्षों में मध्य प्रदेश इस परीक्षा में विशिष्टता के साथ उत्तीर्ण होगा।

संजू वर्मा एक अर्थशास्त्री एवं मुंबई भाजपा के मुख्य प्रवक्ता हैं।