राजनीति
मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव- कुछ आँकड़ों के आधार पर शिवराज सिंह चौहान सरकार का प्रदर्शन

आशुचित्र- अगर 2013 के संकल्प-पत्र के अनुसार चलें, तो जनता का शिवराज सिंह चौहान के लिए क्या निर्णय होगा?

चुनावी वादे हमेशा किए जाते हैं लेकिन उनमें से कितने पूरे होते हैं, यह हमेशा एक रहस्य का विषय रहता है। जनता किसी भी सरकार को पुनः तभी चुनती है जब उसे लगता है कि पिछले चुनाव के वादे पूरे हुए हैं। पिछले 13 साल से मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के पद पर शिवराज सिंह चौहान आसीन हैं तो संभवतः उन्होंने अपने पिछले चुनावी वादे पूरे किए होंगे इसलिए उन्हें जनता का प्यार मिला है।

2018 के चुनावों में उन्हें यही प्यार नसीब होगा या नहीं, इस बात का अनुमान इस आधार पर लगाया जा सकता है कि अपने 2013 के संकल्प-पत्र में से उन्होंने कितने वादों को पूरा किया है। यह समझने के लिए 2013 के प्रमुख जनसंकल्पों का बिंदुवार आँकलन करते हैं-

संकल्प 1-
गरीबों, किसानों व भूमिहीनों के लिए 15 लाख आवास।
मूल्यांकन- मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन के तहत सितंबर 2018 तक 10 लाख आवासों का निर्माण हुआ।

संकल्प 2-
पाँच लाख युवाओं को स्वरोजगार योजना के तहत लाभ पहुँचाने का लक्ष्य।
मूल्यांकन- चुनाव के डेढ़ साल बाद 1 अगस्त 2014 को मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना व मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना शुरू की गई। इन योजनाओं की सहायता से युवा उद्यमियों को बैंक से लोन लेने में सरलता व कुछ आर्थिक सहायता भी मिलती है। नवाचार के प्रोत्साहन के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग को 100 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।

संकल्प 3-
सरकारी कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले युवाओं को स्मार्टफोन
मूल्यांकन- मई 2016 से सरकार ने स्मार्टफोन बाँटना शुरू किया गया। 3.75 लाख स्मार्टफोन का ऑर्डर दिया गया था जिसमें से एक साल के भीतर ही 1.3 लाख स्मार्टफोन का वितरण पूर्ण हो गया था।

संकल्प 4-
प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र को 40 लाख हेक्टेयर से अधिक ले जाने का लक्ष्य
मूल्यांकन- 2013 में 25 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा थी। सितंबर 2018 तक यह आँकड़ा 40 लाख हेक्टेयर को पार कर गया।

संकल्प 5-
पृथक कृषि बजट प्रस्तुत किया जाएगा।
मूल्यांकन- कर्नाटका के बाद पृथक कृषि बजट प्रस्तुत करने वाला मध्य प्रदेश दूसरा राज्य बन सकता था लेकिन एक अलग समिति के बनने के बावजूद यह क्रियान्वित नहीं हो पाया। हालाँकि 2018-19 बजट में कृषि के लिए 37,498 करोड़ रुपए रखे गए। पिछले पाँच सालों से मध्य प्रदेश सर्वश्रेष्ठ कृषि उत्पाद का पुरस्कार भी जीतता आया है।

संकल्प 6-
नई फसल बीमा योजना
मूल्यांकन- ज़मीनी स्तर की परेशानियों के कारण कई योजनाओं और घोषणाओं के बावजूद राज्य अपनी फसल बीमा योजना क्रियान्वित नहीं कर पाया। 2017 में मंदसौर किसान आंदोलन के बाद किसानों को राहत पहुँचाने के लिए इसने केंद्र की सहायता ली। 2018 में प्रधानमंत्री बीमा योजना की कुल राशि का एक-तिहाई (5000 करोड़ रुपए) से अधिक का भुगतान मध्य प्रदेश को दिया गया गया। जबकि 2017 खरीफ फसल के लिए कुल राशि का 17.6 प्रतिशत (1.839.45 करोड़) ही मध्य प्रदेश को मिला था।

संकल्प 7-
मुख्यमंत्री खेत सड़क योजना
मूल्यांकन- जिन छोटे-छोटे टोलों और खेत समूहों की सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत नहीं आती हैं, उनका निर्माण इस योजना से होगा। इस योजना पर कार्य दिसंबर 2013 से ही शुरू हो गया था व इस सड़क के गुणवत्ता मानदंड ग्राम सड़क योजना के समतुल्य ही रखे गए हैं।

संकल्प 8-
झुग्गी-पट्टेधारियों को मालिकाना हक़
मूल्यांकन- 2006 के पहले से किसी भूमि पर काबिज 2.16 लाख लोगों को जुलाई 2016 तक मालिकाना हक़ दिया जा चुका था।

संकल्प 9-
प्रतिभाशाली युवाओं के लिए लैपटॉप
मूल्यांकन- वर्ष 2018 से 12वीं कक्षा में सामान्य वर्ग वाले युवाओं को 85 प्रतिशत व अनुसूचित वर्ग के युवाओं को 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर लैपटॉप दिया जा रहा है।

संकल्प 10-
गरीबों को एक रुपए किलो पर चावल
मूल्यांकन- दिसंबर 2013 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही उन्होंने इस योजना की शुरुआत कर दी।

संकल्प 11-
पाँच वर्षों में सभी गाँवों को सड़क सुविधा
मूल्यांकन- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सर्वाधिक सड़कें मध्य प्रदेश में ही बनीं हैं। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत आने वाली 10,000 किलोमीटर सड़कों के सुधार व 510 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण में वर्ल्ड बैंक सहायता कर रहा है।

संकल्प 12-
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा गारंटी योजना
मूल्यांकन- 29 अक्टूबर, 2014 को शिवराज सिंह चौहन ने इस योजना का शुभारंभ किया। इसके अनुसार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को 18 स्वास्थ्य सेवाएँ देना अनिवार्य हो गया है। इन 18 सेवाओं में मुफ्त जाँच, मुफ्त उपचार, दवा का वितरण और भोजन, जननी सुरक्षा कार्यक्रम, गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए पुनर्वास सेवा, शिशुओं का टीकाकरण, टी बी और कुष्ठ रोगों का मुफ्त उपचार जैसी सेवाएँ सम्मिलित हैं।

संकल्प 13-
पशुधन की स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु 109 चलित उपचार सेवा
मूल्यांकन- वादे के अनुसार अधिकांश जिलों में यह सेवा चालू कर दी गई है जो घायल गायों व मवेशियों का उपचार कर उन्हें स्वस्थ बनाने का प्रयास करती है।

इन वादों के अलावा कुछ वादे जिनपर संतोषजनक कार्य नहीं हुआ वे हैं- 10 कृषि पॉलिटेकनिकों की स्थापना, मध्य प्रदेश मध्यम वर्ग आयोग का गठन, सहकारी बैंकों पर महिलाओं के लिए अधिक ब्याज दर, वरिष्ठ जनों के लिए विशेषाधिकार, मेडिकेयर पॉलिसी, गाँवों में लघु एवं कुटीर उद्योगों का जाल, लोक कलाकार कल्याण मंडल का गठन, कृषि कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड व चयनित सरकारी सेवाओं की होम डिलिवरी।

इसके अलावा पहले से चल रही 56 योजनाओं को सरकार ने जारी रखा जैसे कि लाडली लक्ष्मी योजना, दीन दयाल तीर्थ दर्शन योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, बेटी बचाओ अभियान, जननी योजना, आदि।

शिवराज सिंह चौहान के संकल्प पत्र के विभिन्न खंडों में विस्तृत योजनाएँ भी दी हुई हैं। सबसे पहला खंड सुशासन का है जो भाजपा का नारा भी रहा है। इसके अंतर्गत उन्होंने प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन की बात की है। फरवरी 2016 में एक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे जिसके माध्यम से प्रशासनिक संरचना में ज़रूरी बदलाव के सुझाव माँगे गए थे। इस समिति ने अक्टूबर 2016 में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री सचिवालय को जमा कर दी थी और 28 नवंबर 2016 को यह आयोग गठित कर दिया गया। ई-गवर्नेंस, आपदा प्रबंधन, लोक सेवा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा/पुलिस आदि से संबंधित विषयों पर इस आयोग ने प्रशासन को सुधार सुझाव दिए हैं।

संकल्प पत्र का अगला खंड किसानों को समर्पित है। किसानों की आय में वृद्धि के अपने वादे को पूरा करने के लिए चौहान ने मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना शुरू की जिसके अनुसार आठ तय फसलों के एम एस पी से अधिक भाव की राशि को उनके बैंक खातों में जमा कर दिया जाएगा। किसानों के लिए मध्य प्रदेश ऋण राहत आयोग के माध्यम से जून 2017 तक कर्ज चुकाने में असमर्थ 17 लाख से अधिक किसानों को फायदा मिला। 15 जून 2018 तक ऋण की आधी राशि का भुगतान करने से किसानों को ब्याज पर माफी मिली और वे आसान किश्तों के माध्यम से कर्ज़ चुका पाए। मुख्यमंत्री खेत तीर्थ योजना के तहत किसानों को विशेष खेतों का दौरा कराया जाता है जिससे वे तकनीक सीख पाएँ। वादे के अनुसार मालवा में सिंचाई से खेती को प्रोत्साहित करने के लिए शिवराज ने 28 सितंबर 2018 को नर्मदा-मालवा लिंक का उद्घाटन किया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए मेडिकल सीटों की संख्या 1620 से बढ़ाकर 5000 करने का वादा किया गया था परंतु वर्तमान में राज्य में केवल 2914 मेडिकल सीटें हैं। पाँच नए मेडिकल कॉलेज खुलने के वादे में से भी मात्र दो ही नए कॉलेज खुले। शिशु मृत्यु दर 2013 में प्रति 1000 में 59 से घटकर 47 हुई है परंतु फिर भी इसमें प्रदेश सबसे निचले पायदान पर है।

पर्यटन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता देखते बनती है। लगातार तीन वर्षों से मध्य प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन का पुरस्कार मिला है।  इंदौर व भोपाल में मेट्रो की कार्यवाही आगे बढ़ाने का काम भी मामाजी ने किया है। शासकीय महविद्यालयों में शिफ्ट सिस्टम शुरू नहीं हो पाया परंतु तकनीकि क्षेत्र में हिंदी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में अब कई संस्थान ऐसे हैं जो इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम को हिंदी में पढ़ाते हैं।

निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि आधी से अधिक योजनाएँ पूरी करने में शिवराज सरकार सफल हुई है परंतु सभी वादों पर खरा नहीं उतर पाई। हालाँकि यह भी सत्य है कि सभी चुनावी वादे पूरे होने का इतिहास भारत में नहीं रहा है और जनता महसूस कर लेती है कि कितना विकास आवश्यक था और कितना हुआ है और उसी अनुसार मतदान करती है।

कुछ आँकड़ों के आधार पर शिवराज सिंह का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का प्रयास किया गया था लेकिन परिणाम सुनाने का असल अधिकार तो जनता के पास है जिसकी घोषणा 11 दिसंबर को होगी।