राजनीति
तमिल नाडु- अन्नाद्रमुक और पमका को अपने पाले में लेकर कैसे एनडीए ने बनाई बढ़त

आशुचित्र- एक महीने पहले जो असंभव दिख रहा था वही आज तमिल नाडु की राजनीतिक सच्चाई है। अगर आम चुनाव की बात की जाए तो भाजपा-अन्नाद्रमुक का गठबंधन फायदे में है।

तमिल नाडु में गठजोड़ बनाने की दौड़ हमेशा से ही खरगोश बनाम कछुए की तरह दिखती है। और जैसा कि खरगोश बनाम कछुए की कहानी में होता है, वैसे ही धीमा दिखने वाले पक्ष ने बढ़त हासिल कर ली है और गठबंधन बनाने की दौड़ जीत ली है।

प्रारंभ में ऐसा लग रहा था कि जब अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम अपने साझेदारों को ढूँढना शुरू करेगी, उससे पहले ही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) कांग्रेस और अन्य दलों के साथ अपना गठजोड़ करेगी मगर यह पारी द्रमुक के विरुद्ध चली गई है। क्रम-परिवर्तन और संयोजनों को देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अन्नाद्रमुक का गठबंधन स्पष्ट रणनीति के तहत हुआ है।

पूरा मुद्दा यह है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अन्नाद्रमुक को शामिल कर लिया है और साथ ही पट्टली मक्कल काची (पमका) को भी इस गठबंधन में शामिल करने के लिए टिका लिया है। पमका को मनाने के लिए ओवरटाइम काम करने करने के बाद अन्नाद्रमुक ने अपने और एनडीए के लिए बढ़त हासिल कर ली है।

एनडीए गठबंधन की घोषणा ने कई दलों खासकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और कांग्रेस को आश्चर्यचकित कर दिया है। द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने पहली बार घोषणा की थी कि उनकी पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए उनका सहयोग करेगी। हालाँकि सीटों पर चर्चा शेष थी जिनपर प्रत्येक पार्टी चुनाव लड़ेगी। तमिल नाडु में भाजपा की नवीनतम चालबाज़ी कांग्रेस और द्रमुक को तमिल नाडु में थोड़ा कमज़ोर और असुरक्षित कर रही है।

द्रमुक ने अपने पोल अंकगणित को सही रखने का महत्त्व महसूस करते हुए पमका को लुभाने की कोशिश की। रविवार शाम तक इसने पमका को लुभाने के लिए बातचीत की लेकिन अंत में अन्नाद्रमुक ने अपनी कूटनीति से पमका को अपनी तरफ खींच लिया। पमका के संस्थापक एस रामदॉस का गठबंधन में हाथ था। उन्होंने अपने अनिच्छुक बेटे अंबुमणि रामदॉस को कांग्रेस-द्रमुक से गठबंधन के मुकाबले एनडीए को चुनने की सलाह दी।

एनडीए ने प्रतिकूल परिस्थिति में गठबंधन की बातचीत शुरू की थी क्योंकि पमका भाजपा के किसी भी सदस्य से बात करने के लिए तैयार नहीं थी जो कि गठबंधन को कठिन बना रहा था। इसके बाद भाजपा ने अन्नाद्रमुक को इस सौदे पर बातचीत करने के लिए कहा। आखिरकार पमका को एक सुनिश्चित राज्यसभा सीट मिलने के अलावा लोकसभा के लिए सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ने का मौका मिला

अन्नाद्रमुक और भाजपा की वार्ता का सबसे समझदारीपूर्ण पक्ष यह है कि उन्होंने एक-दूसरे को सबसे कठिन सहयोगी के साथ बातचीत करने के लिए कहा पड़ा जिससे दूसरा पक्ष सहज तरीके से बातचीत कर सकता था। जिस वजह से अब भाजपा को अभिनेता विजयकांत के देसिया मुरपोकू द्रविड़ कज़गम (देमुद्रक) के साथ एक समझौते पर बातचीत करते हुए देखा जा रहा है जो कथित तौर पर नौ सीटों के लिए चुनाव लड़ना चाह रहे हैं।

एनडीए गठबंधन की एक विशेषता यह है कि यह लेनदेन पर टिका हुआ है। उदाहरण के लिए, भाजपा तमिल नाडु में लोकसभा के लिए केवल पाँच सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह केवल समझदारी नहीं है बल्कि इसे यथार्थवाद के रूप में देखा जाना चाहिए क्योंकि भाजपा राज्य में अपनी कमज़ोरी को स्वीकार करती है।

अन्नाद्रमुक जिसने मई 2014 के संसद चुनावों में तमिल नाडु की 39 सीटों में से 37 सीटें जीती थीं को भी जयललिता की तरह एक सशक्त नेता की अनुपस्थिति में अपने अवसरों और आकांक्षाओं के संबंध में व्यावहारिक माना जा रहा है। यह अब लोकसभा चुनाव में 20-21 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

दोनों प्रमुख दलों के यथार्थवादी होने और अन्य दलों की चिंताओं को समायोजित करने के इच्छुक होने के कारण, यह संभव है कि देमुद्रक अंततः कम सीटों पर लड़ने के लिए समझौता करेगी।

दूसरी ओर पुथिया तामिज़गम, इंदिआ जनानायगा काची, तमिल मानिला कांग्रेस और अन्य छोटे दलों की पार्टियों को चुनाव लड़ने के लिए एकएक सीट मिल सकती है लेकिन साथ ही एनडीए की ताक़त में भी इज़ाफा होगा।

पमका को उसकी ओर से गठबंधन करने से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि एनडीए तमिलनाडु के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में जीत सकता है जिस वजह से राज्य की 39 सीटों में से लगभग आधे सीटों के लिए यह ज़िम्मेदार हो सकता है। वन्नियरों के बीच पमका बहुत प्रभावशाली है जो मोस्ट बैकवर्ड क्लास से ताल्लुक रखता है और सलेम, धर्मपुरी, कृष्णगिरि, कुड्डलोर और विल्लुपुरम में गठबंधन को पर्याप्त प्रतिशत वोट देने में मदद कर सकता है।

मई 2016 के चुनावों में अकेले लड़ते हुए पमका ने पांच प्रतिशत से अधिक वोट शेयर बरकरार रखा। हालाँकि इसे अपना हिस्सा बढ़ाना मुश्किल लग रहा है।

पमका थोड़ी सफलता के साथ अन्य समुदायों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है और इसलिए गठबंधन में शामिल होना चाहती है।

पमका के साथ अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन को तमिल नाडु के पश्चिमी और उत्तरी जिलों में लाभ मिलेगा। तमिल नाडु में पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्र बहुसंख्यकों में वन्नियार और वेलाला गाउंडर हैं और वे एनडीए को ताकत प्रदान कर सकते हैं।

हिंदुत्व कारक को मद्देनज़र रखते हुए पश्चिमी जिले जैसे कोयंबटूर, इरोड, तिरुपुर, नामक्कल और सलेम भाजपा के प्रति थोड़ा झुकाव रखते हैं। इस प्रकार गठबंधन उत्तर और पश्चिम में मज़बूत दिखता है।

भाजपा दक्षिणी क्षेत्र विशेष रूप से कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली और थुथुगुडी जैसे जिलों में अपने गठबंधन की सहायता कर सकती है।दक्षिणी तमिल नाडु में प्रमुख पिछड़े वर्ग के समुदाय नादारों के बीच राष्ट्रीय पार्टी का अच्छा खासा दबदबा है और राज्य नेतृत्व भी इसका वर्चस्व बढ़ाएगा।

ऐतिहासिक रूप से नादार राष्ट्रीय दलों का समर्थन करते रहे हैं। तमिल नाडु के उप-मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के संस्थापक टीटीवी दीनाकरण के बीच छिड़े विवाद के बीच अब नदारों की एक प्रमुख भूमिका होगी।

हालाँकि कई महत्त्वपूर्ण संख्या में नादार जिन्होंने ईसाई धर्म में धर्मांतरण किया है द्रमुककांग्रेस गठबंधन का समर्थन करेंगे।

पुथिया तमीज़गम जैसे दल जो देवेंद्र कुला वेल्लार को अनुसूचित जाति की सूची से बाहर लाने की मांग कर रहे हैं, नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इसपर विचार किया जा रहा है और यह दल तेनकासी, त्रिची और मदुरई जैसे क्षेत्रों में गठबंधन की सहायता कर सकता है। तमिल मैनिला कांग्रेस तंजावुर जिले में गठबंधन को बढ़ावा दे सकती है।

हालाँकि ये सभी घटनाक्रम तमिल नाडु में एनडीए के लिए सकारात्मक दिखते हैं मगर यह गठबंधन किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा और यह तब तक नहीं होगा जब तक कुछ ठोस वजह हो।

यह विकास फिर से द्रमुक और उसके नेताओं को खराब रोशनी में दिखाता है। यह एक स्थायी गठबंधन बनाने में स्टालिन की अयोग्यता भी सिद्ध करता है। यद्यपि उनके पक्ष को कम्युनिस्टों, वाइकों के मारुमरलची द्रमुक, विदुथलाई चिरुथिगाल काची और तो तिरुमावलवन के नेतृत्व वाले पार्टियों के समर्थकों का साथ मिलेगा मगर इन दलों को गठबंधन के लिए कितनी ताकत मिल सकती है ,यह देखना होगा।

कम्युनिस्टों, वाइको के मारुमलारची द्रमुक, तोल तिरुमावलवन के नेतृत्व में विदुथलाई चिरुथिगाल काची को मई 2016 में तमिल नाडु विधानसभा चुनावों में 4 प्रतिशत वोट मिले।

चुनावों में अभिनेता कमल हसन की मक्कल नीधि मैम और एएमएमके की शुरुआत भी हो सकती है और यह अकेले ही चुनाव लड़ेंगे। लोकसभा का चुनाव विधानसभा चुनाव के लिए मात्र एक पूर्वाभ्यास सकता है।

वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम फिर से साबित करते हैं कि तमिल नाडु के मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी अपने प्रमुख विरोधी स्टालिन की तुलना में सामरिक रूप से बेहतर साबित हो रहे हैं।

पिछले हफ्ते कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की हत्या विभिन्न बैठकों में स्टालिन की हिंदूविरोधी बयान और उनकी अनुपस्थति एवं मोदी के प्रति बदलते रुख से भी एनडीए को लोक सभा चुनावों में लाभ मिल सकता है।

अभी के लिए अन्नाद्रमुक और भाजपा ने अपनी तरफ से पमका को शामिल करके तख्तापलट कर दिया है। यह उन्हें कम से कम एक मनोवैज्ञानिक बढ़त अवश्य देगा। अपनी ओर से कांग्रेस और द्रमुक के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को भी लेनदेन की रणनीति अपनानी होगी जो एनडीए की चालबाज़ी के बाद दुर्जेय लगती है।

एमआर सुब्रमणि स्वराज्य के कार्यकारी संपादक हैं। वे @mrsubramani द्वारा ट्वीट करते हैं।