राजनीति
आयुष्मान भारत भाजपा को दे सकता है एक मजबूत आधार
आयुष्मान भारत भाजपा को दे सकता है एक मजबूत आधार

प्रसंग
  • आयुष्मान भारत के पैमाने की एक सार्वजनिक नीति राजनीतिक प्रभाव के लिए काफी मायने रखती है। किसी और से ज्यादा प्रधानमंत्री इसको बखूबी जानते हैं

एक ऐसी पार्टी के लिए जिसमें काफी बड़ी उम्मीदों के बीच अपना कार्यकाल संभाला, नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से इसके शासन रिकॉर्ड और  इसकी व्यवस्था से संतुष्टि का जो स्तर है वह लोगों के लिए अलग-अलग है। यह उन लोगों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है जो इसपर काफी उत्साही, कुछ मिलीजुली तो कुछ बिलकुल रूखी प्रतिक्रिया देते हैं। हालांकि, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले चार सालों में बड़ी (रिकॉर्ड) संख्या में योजनाओं को लागू किया गया है। पिछली सरकारों द्वारा शुरू की गई कुछ योजनाओं को ढांचे में लाया गया जिसके अच्छे नतीजे सामने आए। विनिर्माण, बुनियादी ढांचे का विकास, वित्तीय समावेश और डिजिटलीकरण के अलावा अगर मोदी सरकार ने कोई सबसे उल्लेखनीय कार्य किया है तो वह है सामाजिक कल्याण पर ध्यान केन्द्रित करना।

शौचालय, गैस और बिजली कनेक्शन, बैंक खाते और आवास सब्सिडी के साथ – भारत न केवल एक अभूतपूर्व सामाजिक कल्याण से दो चार हो रहा है बल्कि अपनी अक्षमता और भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात बाबूगिरी व्याप्त होने के बावजूद भी इन योजनाओं का वितरण इच्छित लक्ष्यों और देश के कोने-कोने तक हुआ है। इन योजनाओं की सफलता के लिए मुख्य रूप से सामाजिक-आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना (एसईसीसी) के प्रभावी उपयोग को जिम्मेदार ठहारया जा सकता है, जो गरीबी रेखा (बीपीएल) तंत्र के बजाय लाभार्थियों की पहचान करने के लिए यह देखता है कि लोग किस चीज से वंचित हैं। बीपीएल तंत्र को डेटा त्रुटियों के लिए आलोचनीय, डेटा के साथ छेड़छाड़ वाला और भ्रष्टाचार में लिप्त माना जाता है।

उन्हीं एसईसीसी आंकड़ों का उपयोग करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल 15 अगस्त को सभी कल्याणकारी योजनाओं में से सबसे महत्वाकांक्षी योजना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान, जिसे आयुषमान भारत भी कहा जाता है, के शुभारम्भ की घोषणा की है। इसका लक्ष्य 10.76 करोड़ परिवारों के लगभग 50 करोड़ भारतीय लाभार्थियों को कवर करना है। मोदीकेयर के रूप में भी कहा जाना वाला, यह दुनिया में सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है। इस योजना के तहत, लाभार्थियों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये की स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध है, जिसमें उन्हें उनके परिवार के आकार के बावजूद सूचीबद्ध अस्पतालों में प्री और पोस्ट केयर की व्यवस्था मिलती है।

निरंतर बढ़ रही बीमारियों के इलाज के लिए मौजूदा मेडिक्लेम इंश्योरेंस मॉडल में सुधार है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के ग्राहकों को आयुषमान भारत के लाभ का विस्तार करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और श्रम मंत्रालय के बीच बातचीत चल रही है। मोदीकेयर का स्तर इतना बड़ा था कि कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों को इसके कार्यान्वयन के बारे में संदेह था।

प्रति वर्ष 1,65,000 रुपये की औसत घरेलू आय वाले देश के लिए, यदि अप्रत्याशित चिकित्सा बिलों का भुगतान किया जाता है तो बड़ी संख्या में परिवार एक वर्ष या उससे अधिक समय में वापस आ जाते हैं। मेडीकेयर इंडेक्स (दुनिया में 145वां) की क्षमता पर खराब रैंकिंग के साथ, यहां लोगों को अस्पताल के खर्चों की लागत का भार सहन करने के लिए अपनी संपत्ति बेचने या अपनी संपत्तियों को उधार रखते देखना कोई असामान्य बात नहीं है। इसलिए, यह कोई दिमागी कसरत नहीं है, कि एक महान सामाजिक कल्याण पहल के अलावा, मोदीकेयर राजनीति में लाभ को सुनिश्चित कर रही है।

विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं की शुरुआत और सफल क्रियान्वयन ने भाजपा की अपनी पारंपरिक ‘उच्च जाति’ आधार की सीमाओं का उल्लंघन करने में मदद की है। नोटबंदी के साथ, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, सौभाग्य, उजाला और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे सामाजिक उपक्रमों ने भाजपा के समर्थन आधार की जनसांख्यिकी को मूल रूप से बदल दिया है। भाजपा अब तक एक मध्यम वर्गीय, शहरी, ‘उच्च जाति’ वाली पार्टी रही है जिसे अब सामाजिक-आर्थिक विस्तार में समर्थन मिल रहा है। आयुष्मान भारत योजना यदि तेजी से और प्रभावी तरीके से चलती रही तो यह आगामी लोकसभा चुनावों मे एक गेम चेंजर साबित हो सकती है।

भाजपा पूरे भारत में जल्द से जल्द इस योजना को पूर्ण रूप से शुरू करने की इच्छुक है। तथ्य यह है कि पार्टी की 21 राज्यों में सरकार है जो अपने सहयोगियों के साथ इस योजना के लिए सबकुछ आसान बना देगी। शायद इसी डर से, जिन राज्यों में गैर-राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दलों की सरकार है वे इस योजना में सहयोग देने में पीछे हट रहे हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-एनडीए पार्टियों द्वारा शासित सात राज्यों में से किसी ने भी अब तक केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ओडिशा ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया है और इसी तरह की अपनी एक हेल्थकेयर योजना शुरू करने की योजना बना रहा है। कई कारणों का हवाला देते हुए, दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार भी इस योजना से पीछे हट रही है। हालांकि, इसके मुकाबले में पार्टी ने एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए 2011 की जनगणना से डेटा की अपर्याप्तता का हवाला दिया है, उच्च अधिकारियों ने इंडिया टुडे को बताया है कि आम आदमी पार्टी की मुख्य आपत्ति इस योजना के नाम को लेकर है। यह चाहती है कि इस योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री आम आदमी स्वास्थ्य बीमा योजना – आयुष्मान भारत’ होना चाहिए। मांग अनुचित है क्योंकि केंद्र 60:40 के अनुपात में रकम का प्रमुख योगदानकर्ता होगा।

कुछ अन्य राज्यों के मामले में देरी के भिन्न कारण हैं। उदाहरण के लिए, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे कुछ राज्य बीमा कंपनियों के साथ साथ लाभार्थियों को प्रायोजित करने के लिए ट्रस्ट बनाना चाहते हैं। इसका कारण यह चिंता हो सकती है कि बीमा कंपनियां या तो दावों को अस्वीकार कर देती हैं या उनका निपटारा करने में अत्यधिक समय लेती हैं।

आयुष्मान भारत भी मोदी की राजनीति में प्रस्थान का प्रतीक है। गुजरात के मुख्यमंत्री और अब तक प्रधानमंत्री के रूप में, उन्होंने ऐसी नीतियों का पक्ष लिया है जो नागरिकों को सशक्त बनाती हैं। आयुष्मान भारत उनके पात्रता मॉडल को अपनाने को इंगित करता है, भले ही यह अभी तक घटित नहीं हुआ है। सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की दयनीय स्थिति को देखते हुए जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र, बुनियादी ढाँचे की कमी और डॉक्टरों एवं नर्सों की गंभीर कमी से ग्रस्त हैं, यह कार्यक्रम एक बेहतर और तेज़ तरीका हो सकता है।

अनुमानतः, मोदीकेयर निजी अस्पतालों को अत्यधिक लाभ पहुँचा सकता है, इस शोर ने  पहले ही पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में संपादकीय और राय में असाधारण रूप से शामिल होना शुरू कर दिया है। ऐसी मांगें की जा रही हैं कि निजी अस्पतालों को पैसे कमाने की अनुमति देने की बजाय सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, समाजवादी नाराजगी व्यक्त करते हैं कि कम से कम निजी मुनाफा सरकार की चिंता होनी चाहिए। सरकार के लिए असली चुनौती लाभार्थियों तक तेजी से पहुँच, प्रतिस्पर्धी लागत पर गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य देखभाल और प्रणाली का न्यूनतम दुरुपयोग सुनिश्चित करना होगा।