राजनीति
गुजरात में भाजपा कैसे हुई मज़बूत और आम आदमी पार्टी कैसे बना सकी अपना स्थान
धवल पटेल - 23rd February 2021

आज का दिन 23 फरवरी 2021 गुजरात में पिछले रविवार को हुए छह महानगर के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (नगर निगम) के चुनाव का परिणाम का दिन था। इसमें सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद ही शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने पाँच साल पहले के चुनाव परिणामों में सुधार किया है और प्रचंड जीत दर्ज की है।

अगर पिछले चुनावों के परिणाम की बात करें तो वर्ष 2015 में भाजपा ने अहमदाबाद की 192 सीट में से 142 सीट पर जीत हासिल की थी। जबकि सूरत में यह आँकड़ा 80 था। ठीक वैसे ही वडोदरा में यह संख्या 58, राजकोट में 38, भावनगर में 34 और जामनगर में 38 रही थी। यानी कि छह महानगर की कुल 572 सीटों में से भाजपा 390 सीट जीतने में सफल रही थी। जबकि कांग्रेस की सीटें 175 रही थी और अन्य के खाते में सात सीट आई थी।

महानगर कुल वार्ड कुल सीटें भाजपा कांग्रेस अन्य
अहमदाबाद 48 192 142 49 1
सूरत 29 116 80 36 0
वडोदरा 19 76 58 14 4
राजकुट 18 72 38 34 0
भावनगर 13 52 34 18 0
जामनगर 16 64 38 24 2
योग 143 572 390 175 7

आज इस समय तक घोषित हुए परिणामों को देखें तो भाजपा ने अपने पिछले परिणामों का जबरदस्त पुनरावर्तन करते हुए सत्ता में वापसी की है। अहमदाबाद में इस समय तक घोषित परिणामों को देखें तो 190 (कुल 192) सीटों में से भाजपा 165 सीट पर जीत हासिल कर चुकी है जबकि कांग्रेस सिर्फ 16 सीटों तक सीमित रह गई है और अन्य के खाते में 9 सीट आई है।

दूसरी तरफ सूरत शहर की बात करें तो यहाँ कांग्रेस का अपना खाता तक नहीं खोल सकी है और भाजपा ने अपनी तालिका में सुधार करके 79 से 93 के आँकड़े तक पहुँच गई है जबकि आम आदमी पार्टी (आप) 27 सीट जीतने में कामयाब रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के घर में यानी कि राजकोट में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 72 में से 68 सीटों पर जीत हासिल की है जबकि कांग्रेस को मात्र चार सीटों से संतुष्ट होना पड़ रहा है।

अब वडोदरा शहर की बात करें तो वहाँ भी भाजपा ने पिछली बार 58 सीटों के मुकाबले 69 सीटों पर भगवा लहराया है और कांग्रेस सात सीटें जीतने में सफल रही है। जामनगर में भाजपा ने 64 सीटों में से 50 सीटों पर जीत हासिल की है जबकि कांग्रेस 11 और बसपा तीन सीटें जीतने में कामयाब रही है। और रही बात भावनगर की तो वहाँ 52 सीटों में से भाजपा के खाते में 44 सीट आई है जबकि कांग्रेस 8 सीटों पर सिमट चुकी है।

यानी कि भाजपा ने इस बार अभी तक घोषित 574 (576) सीट में से 489 सीट पर का भगवा लहरा दिया है जबकि कांग्रेस केवल और केवल 46 पर सिमटती दिखाई दे रही है और अन्य के खाते में 39 (आप+एआईएमआईएम+अन्य) सीट गई है।

प्रचंड जीत का कारण

भाजपा की इस प्रचंड जीत के कई कारण हैं। उनमें से कुछ की बात करें तो भाजपा के नए बने अध्यक्ष सीआर पाटिल का नाम विशेषकर लेना चाहूँगा जिनके अध्यक्ष बनते ही भाजपा संगठन में मानों नया जीवन आ गया हो। उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद गुजरात में हुए विधानसभा के उप-चुनाव में आठों की आठ सीटें जीतकर अध्यक्ष के तौर पर अहम मुकाम तय किया है।

इसके बाद संगठन में नई नियुक्तियाँ की गईं और चुनावों में युवा चेहरे को तवज्जो दी और चुनाव के परिणाम उस फैसले को सही ठहरा रहे हैं। गुजरात में 27 साल से भाजपा की सरकार के रहने के बाद भी यहाँ एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) जैसा कोई कारक तक देखने को नहीं मिला जो भाजपा सरकार द्वारा किए गए जनता के लिए विकास के कार्यों पर जनता की मुहर है।

पाटिल ने ठंडे बस्ते में पड़े पेज प्रमुख और पेज कमेटी को फिर से सक्रिय करते हुए हर बूथ तक इस अभियान को पहुँचाया जिसकी बदौलत कम मतदान होने के बावजूद भाजपा ने अपने मतदाताओं को मतदान करने को प्रेरित किया और मतदान केंद्र तक लाने में सफल भी रही।

आप का प्रवेश और कांग्रेस का सफाया

गौरतलब है कि जब कांग्रेस विपक्ष हुआ करता था तब उसका वोट प्रतिशत 35-40 के आसपास हुआ करता था और इस बार आप के आने से कांग्रेस के वोटों में कटौती हुई है। चुनाव से पहले पास (पाटीदार अनामत आंदोलन समिति) जो कांग्रेस का समर्थन कर रही थी, वह ऐन वक्त पर अपने मन मुताबिक लोगों को टिकट न मिलने से चुनाव में कांग्रेस के बजाय आप का सहयोग करने लगी और इसी के कारण आप 27 सीटों पर जीतने में सफल रही है।

वहीं कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी है। लेकिन यहाँ पर ध्यान देने जैसी बात यह है कि इन सभी कारकों के बावजूद भाजपा अपनी सीटों की संख्या 79 से 93 तक बढ़ाने में कामयाब रही है।

गुजरात का महत्त्व

जैसा कि सभी को पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह गुजरात से आते हैं तो एक तरह से गुजरात को जीतना भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि गुजरात में भाजपा रहेगी तो देश में भाजपा और मजबूत बनेगी और यह कार्य करने में गुजरात भाजपा का संगठन चुनाव परिणामों को देखते हुए पुरी तरह से सफल रहा है।

धवल पटेल सूरत में रहने वाले प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कन्सलटेन्ट हैं। वे बॉलीवुड, मनोरंन उद्योग, राजनीति और सार्वजनिक नीति में रुचि रखते हैं।