राजनीति
गुजरात के स्थानीय चुनावों में पिछली बार के मुद्दों पर कैसे हावी हुआ भाजपा का विकास

पिछले सप्ताह 23 फरवरी को गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जिस तरह छह महानगर के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में कमल खिलाया था, उसी परिणाम को जारी रखते हुए आज (2 मार्च) को घोषित हुए नगरपालिका, जिला पंचायत एवं तालुका पंचायत के परिणाम ने दिखा दिया है कि क्यों गुजरात भाजपा का गढ़ है।

2015 में हुए स्थानीय चुनाव में पाटीदार आंदोलन के चलते भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुसार नहीं रहा था। 2015 में भाजपा ने 31 जिला पंचायतों में से सिर्फ आठ जिला पंचायतों पर जीत हासिल की थी। जबकि 230 तालुका पंचायतों में से भाजपा के खाते में 77 तालुका पंचायतें आईं थीं। वहीं कांग्रेस ने 151 तालुका पंचायतों पर जीत हासिल की थी। 

हालाँकि की भाजपा ने नगर पालिका चुनाव में जिला पंचायत और तालुका पंचायत के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया था। वहाँ 55 नगर पालिकाओं में से भाजपा ने 41 नगर पालिकाओं पर अपना भगवा फहराया था, जबकि कांग्रेस 12 नगर पालिकाओं पर जीत हासिल कर पाई थी।

अभी इस समय तक घोषित हुए परिणामों की बात करें तो भाजपा ने 2015 के परिणामों के विपरीत शानदार प्रदर्शन करते हुए ज़बरदस्त वापसी की है। भाजपा ने 31 जिला पंचायतों में से सभी 31 जिला पंचायतों को जीतकर इतिहास रच दिया है, जबकि कांग्रेस खाता तक नहीं खोल पाई।

वहीं 81 नगर पालिकाओं में से भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ करते हुए 77 नगर पालिकाओं पर अपनी जीत का परचम लहराया है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ चार नगर पालिकाओं से संतुष्ट होना पड़ रहा है। अगर हम तालुका पंचायत की बात करें तो कुल 231 तालुका पंचायतों में से अब तक 229 के परिणाम घोषित हो चुके हैं जिनमें से 196 तालुका पंचायतों में भाजपा जीत चुकी है या जीत की ओर बढ़ रही है जबकि कांग्रेस के लिए यह आँकड़ा मात्र 33 का है।

प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटील की अध्यक्षता में भाजपा ने इस चुनाव परिणाम में कई अहम पड़ाव हासिल किए हैं। जैसे कि गांधीनगर जिला पंचायत जो स्वतंत्रता से अब तक कांग्रेस के पास थी, वहाँ पहली बार भाजपा का भगवा लहराया है।

2015 के स्थानीय निकाय चुनावों में गुजरात में तीन प्रमुख मुद्दे थे। पहला, पाटीदार आंदोलन का मुद्दा, दूसरा, जीएसटी और तीसरा, आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा से नाराज़गी। इन कारणों से ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया था। 

हालाँकि, आज के घोषित हुए 2021 के स्थानीय निकाय के परिणामों को देखें तो यह नज़र आता है कि सौराष्ट्र जो पाटीदार आंदोलन का गढ़ समान था, वहाँ भाजपा ने अपनी स्थिति में काफी सुधार किया है। सौराष्ट्र की गोंडल नगर पालिका में सारी की सारी सीटें (44) जीतकर भाजपा ने इतिहास रच दिया है।

ठीक वैसे ही मोरबी जहाँ पिछले चुनाव में जीएसटी का मुद्दा प्रमुख था, वहीं आज भाजपा ने 52 में से 52 सीटें जीत ली हैं। दक्षिण गुजरात के आदिवासी क्षेत्र जैसे कि वलसाड़, व्यारा और डांग में भी इस बार कमल बढ़-चढ़कर खिला है। इस परिणाम से साफ व्यक्त होता है कि 2015 के प्रमुख तीन मुद्दे 2021 में भुलाए जा चुके हैं और जनता ने बढ़-चढ़कर भाजपा और भाजपा के विकास को वोट दिया है।

भाजपा की इस प्रचंड जीत के प्रमुख कारणों में से एक नवनियुक्त गुजरात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पाटील एवं उनके द्वारा किए गए संगठन में बदलाव और उम्मीदवारों के लिए बनाए गए नियमों को बताया जा रहा है। पाटील ने अध्यक्ष बनते ही हुए विधानसभा के उप-चुनाव में आठों सीटों पर विजय दिलाकर विधानसभा में भाजपा को मजबूत किया था।

इसी के साथ पिछले सप्ताह हुए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में छह में से छह महानगर निगमों में भाजपा की विक्रमी जीत हुई है। कुल मिलाकर इन परिणामों से यह साफ हो गया है कि गुजरात की जनता हमेशा विकास का साथ देती है, राष्ट्रवाद का साथ देती है, यानी कि भाजपा का साथ देती है।

शायद यही वजह है कि दो दशक से अधिक समय तक भाजपा की सरकार प्रदेश में होने के बावजूद एंटी-इनकंबेंसी यानि की सत्ता-विरोधी लहर का नामोनिशान तक नहीं है। गुजरात और गुजरात की जनता का भरोसा आज भी भाजपा पर कायम है।

धवल पटेल सूरत में रहने वाले प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कन्सलटेन्ट हैं। वे बॉलीवुड, मनोरंन उद्योग, राजनीति और सार्वजनिक नीति में रुचि रखते हैं।