राजनीति
जानें क्यों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आवारा पशु की समस्या चुनावी मुद्दा नहीं है

आशुचित्र- पश्चिमी उत्तर प्रदेश से मवेशियों से खतरे की कई रिपोर्टों के सामने आने के पाँच माह बाद राज्य प्रशासन द्वारा बनाई गईं अस्थाई गौशालाएँ इस मुद्दे से लोगों का ध्यान दूर ले जाती हुई दिख रही हैं।

गौतम बुद्ध नगर जिले में दादरी क्षेत्र के बिसाड़ा गाँव में एक अस्थाई गौशाला है। इसके संरक्षक का कहना है कि यह सुविधा लगभग दो माह पूर्व प्राप्त हुई थी जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी उप-जिला मजिस्ट्रेटों (एसडीएम) को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि सभी गायों को आश्रय मिले।

संरक्षक ने स्वराज्य  को बताया कि यह एक निजी भूमि थी और प्रधानों की सहमति से आवारा गायों के लिए यहाँ अस्थाई गौशाला की अनुमति दी गई थी। उन्होंने बताया कि वहाँ लगभग 300 मवेशी रहते हैं व इनके रख-रखाव का खर्च सरकार द्वारा दिया जाता है।

बिसाड़ा गाँव में और आसपास के क्षेत्रों में लोगों का कहना है कि इस अस्थाई गौशाला से उन्हें राहत मिली है।

हालाँकि गौतम बुद्ध नगर जिले के गाँवों के लगभग सभी लोग, जिनसे संवाददाता ने बात की, ने इस बात से इनकार किया कि यह संकट कभी चुनावी मुद्दा भी था। यह एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा था पर इतना बड़ा नहीं जिसपर उनके मत निर्भर करें।

चुनाव के पहले चरण में 11 अप्रैल को गौतम बुद्ध नगर सीट पर मतदान होगा। इस सीट के सबसे प्रबल दावेदार भाजपा के 59 वर्षीय महेश शर्मा माने जा रहे हैं (वे एक केंद्रीय मंत्री भी हैं)। उनके विरुद्ध सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के 37 वर्षीय सतवीर नागर व कांग्रेस के 30 वर्षीय डॉ अरविंद सिंह चौहान (उनके परिवार  द्वारा संचालित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व चांसलर) होंगे।

जनवरी में महावाड़ गाँव की एक घटना ने आवारा मवेशियों की समस्या पर प्रकाश डाला था। इन आवारा पशुओं से उनके खेतों को नुकसान पहुँचने के खतरे से ग्रामीणों ने पड़ोसी शहर गाज़ियाबाद की गौशाला से पशुओं को ले जाने का निवेदन किया था।

हालाँकि, उन्होंने माना कि अस्थाई सुविधा आंशिक समाधान ही है। उन्होंने समाधान ढूंढने के तरीके की भी आलोचना की। “योगी और (नरेंद्र) मोदी के इरादे नेक हैं। लेकिन स्थानीय अधिकारी उन्हें पूरा नहीं कर पाते। ये गौशाला राहत अवश्य है लेकिन इसमें भी कहीं भ्रष्टाचार है। सरकार की बहुत ज़मीन है लेकिन फिर भी वे निजी भूमि का उपयोग क्यों कर रहे हैं?”, वे प्रश्न करते हैं।

बिसाड़ा में एक अस्थाई गौशाला

राज्य सरकार के अनुसार उन्होंने उत्तर प्रदेश में पिछले दो माह में 3,26,701 मवेशियों को 5,701 अस्थाई गौशालाओं में रखा है। यह आँकड़ा गौपालन विभाग के प्रमुख सचिव एसएम बोबदे ने एक समाचार पत्र को बताया था। आपको बता दें कि 2012 के सर्वेक्षण के अनुसार उत्तर प्रदेश में 10 लाख आवारा मवेशी थे। यह आँकड़ बढ़ा ही होगा लेकिन फिर भी जितने पशुओं को रकने का दावा किया जा रहा है, वे अधिक लगते हैं।

राज्य भर में मवेशी समस्या के प्रति योगी का समाधान व चुनावों पर इसके प्रभाव के विषय में लोगों के विचार मिले-जुले हैं। मुज़फ्परनगर के बालहारा गाँव में किसानों, जो भाजपा के सबसे बड़े विरोधी अजीत सिंह का समर्थन कर रहे हैं, का कहना है कि यह एक बड़ी समस्या है।

“पहले किसान पशुओं को बेचकर छोड़े पैसे कमा लेते थे। अब वे खेतों में घूम रहे हैं और फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। हम संतोष कर लेते अगर उनकी हत्या नहीं की जा रही होती तो लोकिन ऐसा भी नहीं है। कसाई उन्हें चुरा लेते हैं और अब उन्हें उसके लिए भुगतान भी नहीं करना होता। मवेशी फसल खा रहे हैं और कसाई पैसे बना रहे हैं।”, उन्होंने स्वराज्य  को बताया।

हालाँकि एक समाचार-पत्र ने कासगंज जिलों के किसानों के विषय में कहा कि वहाँ की समस्या अब समाप्त हो गई है। “आवारा मवेशियों को पकड़कर गौशालाओं में डालने से फसल को खतरे की समस्या और सड़क पर ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म हो गई है।”, लखीमपुर गाँव के किसान महेश वर्मा ने कहा।

इस समस्या पर योगी की प्रतिक्रिया विवादास्पद है क्योंकि विपक्ष के हमले और मीडिया में इसकी रिपोर्टों के बावजूद वे चुनाव अभियान में इसका ज़िक्र तक नहीं कर रहे हैं। विपक्षी नेता दावा करते आए हैं कि अवैध कत्लखानों पर प्रतिबंध से आवारा पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी से यह परेशानी हुई है और इसे सांप्रेदायिक निर्णय का नाम देकर कहा जा रहा है कि ये किसानों और कत्लखाने व्यापार, हिंदुओं और मुस्लिमों दोनों के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ है।

संवाददाता ने पूर्व रिपोर्ट में भी बताया था कि विपक्ष और मीडिया द्वारा इस मुद्दे को जितना भयावह बताया जा रहा था, उतनी परेशानी ज़मीनी स्तर पर नहीं मिली थी। अधिकांश किसानों ने कहा था कि वे खुश हैं कि अवैध कत्लखानों पर प्रतिबंध लगाया गया है और उनकी मांग अधिक गौशालाएँ थीं, न कि कत्लखाने।

इसलिए विस्मय नहीं होता कि चुनाव से एक सप्ताह पूर्व चुनावी सभाओं में ये मुद्दा नहीं उठाया जा रहा है।

बिसाड़ा के निवासी हरे राम सिंह ने स्वराज्य  को बताया कि मवेशी मुद्दा कभी चुनावी मुद्दा था ही नहीं। “हमेशा आवार पशु खेतों और सड़कों में पाए जाते रहे हैं।”, उन्होंने कहा, “असल में हम खुश हैं कि योगी ने अवैध कत्लकानों पर प्रतिबंध लगाया है।”

वे लोग भी जो भाजपा के लिए वोट नहीं करेंगे, उनका कारण पशु मुद्दा नहीं है। बसपा समर्थक बंबावर गांव के निवासी विजय कुमार का कहना है कि वे मोदी के विरुद्ध हैं क्योंकि “वे देश को हिंदू-मुस्लिम में विभाजित कर रहे हैं।”

खानदेरा में जनवरी माह में एक निर्माणाधीन गौशाला

2009 में खुरजा क्षेत्र से कटकर जीबी नगर संसद क्षेत्र बना था। इस संसदीय क्षेत्र के गौतम बुद्ध नगर जिले में तीन विधान सभा क्षेत्र (नोएडा, दादरी और जेवार) हैं और बुलंदशहर जिले के दो क्षेत्र (खुरजा और सिकंदराबाद)। 23 लाख मतदाताओं में से 16 लाख ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और इनमें 4.5 लाख मतदाता ठाकुर, 4 लाख ब्राह्मण, 3.5-4 लाख गुर्जर, 3.5 लाख दलित और 3.5 लाख मुस्लिम हैं। कुल मिलाकर जीबी नगर जिले के मुस्लिम जनसंख्या 84.6 प्रतिशत है।

गुर्जर बहुल महावाड़ जिले के मनीष नागर ने स्वराज्य  को बताया कि गुर्जरों ने मोदी को वोट देने का निर्णय लिया है। “महेश शर्मा नहीं लेकिन मोदी।”, उन्होंने ज़ोर डाला। नागर की तरह इस क्षेत्र के कई लोगों ने स्थानीय मुद्दों से ऊपर राष्ट्रवाद को रखा।

“देश है तो सब है। देश ही नहीं बचेगा तो क्या करेंगे।”, उन्होंने कहा। जब उनसे पूछा गया कि वे किस विषय में कह रहे हैं तो ुन्होंने बालाकोट हवाी हमलों का ज़िक्र किया। “हमने पाकिस्तान में घुसकर बम गिराए। हम अपने अभिनंदन को सुरक्षित वापस लेकर आए। इससे पहले हमें अपने जवानों के क्षत विक्षत शरीर ही मिलते थे।”, उन्होंने कहा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या बालाकोट के कारण वे मोदी को वोट देंगे तो उन्होंने बताया कि यह निर्णय तो उन्होंने काफी पहले ही कर लिया था। “आसपास हो रहा विकास दृष्टिगोचर है। महिलाओं को गैस सिलिंडर और सौचालय मिले हैं। परिवारों को घर मिले हैं। हम सभी को सड़क और बेहतर बिजली आपूर्ति मिली है। महंगाई कम हुई है।”, उन्होंने कहा और जोड़ा, “लेकिन वोट देश की सुरक्षा के लिए।”

नागर की तरह बंबावाड़, महावाड़, दुजाना और कुडी खेरा गाँवों का रुझान भी मोदी के पक्ष में ही है। अधिकांश लोगों का कारण क्रमशः राष्ट्रवाद और विकास ही है।

यह नहीं कहा जा सकता कि किसान आवारा मवेशी की परेशानी से पूर्णतः मुक्त हो चुके हैं। चार अस्थाई गौशालाएँ क्षेत्र के लिए पर्याप्त नहीं हैं। महावाड़ और बंबावाड़ के ग्रामीणों ने बताया कि पाँच किलोमीटर की दूरी तक कोई गौशाला नहीं है। “मवेशियों के झुंड एक जगह से दूसरी जगह जाते देखे जा सकते हैं और किसान उन्हें भगाते रहते हैं।”, बंबावाड़ के देवेंद्र कुमार शर्मा ने बताया।

हालाँकि शर्मा ने यह भी कहा कि चाहे जो हो वे मोदी के लिए वोट करेंगे। “मेरी छह एकड़ ज़मीन है। मैं कहता हूँ कि यदि आवारा मवेशी मेरी पूरी फसल भी खा जाएँ तब भी मैं मोदी के लिए ही वोट करूँगा।”, उन्होंने कहा।

जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों तो शर्मा ने बताया कि इस समस्या के ज़िम्मेदार एक तरह से किसान ही हैं क्योंकि जब गाय दुधारू नहीं रहती तो वे उन्हें खुला छोड़ देते हैं। साथ ही उनका मानना है कि “मोदी भारत का भविष्य सुरक्षित कर रहे हैं।”

स्वाति गोयल शर्मा स्वराज्य में वरिष्ठ संपादक हैं और वे @swati_gs से ट्वीट करती हैं।