राजनीति
राम मंदिर के लिए संसद है आखिरी विकल्प – यूपी उपमुख्यमंत्री

अयोध्‍या में राम मंदिर बनवाने का बीजेपी का पुराना वादा है। आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले अयोध्या, राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर से परवान चढ़ने लगा है।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने की बात कहने वाले, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथी और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे एक कदम आगे बढ़कर बयान दिया है। मौर्य ने राम मंदिर के निर्माण पर बयान देते हुए कहा कि अगर कोई विकल्प नहीं बचता है, तो केंद्र सरकार इसके लिए सदन में कानून ला सकती है।

केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में कहा, ‘भाजपा के लिए राम जन्‍मभूमि का मामला कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, ये हमारी श्रद्धा, आस्‍था और विश्‍वास का विषय है और देश के करोड़ों रामभक्‍तों की भावनाओं से जुड़ा हुआ भी है साथ ही सरकार उसमें पूर्ण सहयोग देने के लिए भी तैयार है।

मौर्य ने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण विश्व हिंदू परिषद के स्वर्गीय नेता अशोक सिंघल, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व प्रमुख रामचंद्र दास परमहंस और मारे गए कार सेवकों को श्रद्धांजलि होगी।

मुस्लिम संगठनों ने दी तीखी प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के राम मंदिर पर दिए गये बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। मामले में बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने कहा है कि केशव प्रसाद मौर्य इस तरह का बयान देकर कोर्ट की तौहीन कर रहे हैं। इकबाल अंसारी ने कहा कि सरकार को इन पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। चाहे वह डिप्टी सीएम हों या कोई और।

मौर्य के राम मंदिर पर दिए गए बयान को लेकर मुस्लिम संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन संगठनों का कहना है कि राम मंदिर मुद्दे को जानबूझकर उकसाया जा रहा है। इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर बयान देना सही नहीं है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने सोमवार को केशव मौर्य के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि राम मंदिर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बयान देना सही नहीं है।

फिरंगी महली ने यह भी कहा कि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में है तो फिर नेता जानबूझकर ऐसे बयान क्यों देते हैं। उन्होंने आगे कहा, “पार्टियों ने कई चुनाव इसी मुद्दे पर लड़े हैं। जानबूझकर ऐसे मुद्दों को हवा दी जा रही है। जनता भी यह चाहती है कि एक अच्छे माहौल में न्यायालय के फैसले से हल निकले।” नेताओं को इस मामले में बयानबाजी से बचना चाहिए।