राजनीति
कृषि मंत्री से मिलकर सुधारों को समर्थन देने वाले किसान प्रतिनिधियों का क्या कहना है

देश भर के 18 किसान संघों का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिला और नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधारों का समर्थन किया। हालाँकि इस बैठक में उपस्थित कुछ लोगों ने केंद्र को राज्य के साथ विचार-विमर्श करके इन कानूनों में कुछ संशोधन करने को भी कहा है।

तमिलनाडु विवासाईंगल संघम (किसान संघ) के राज्य अध्यक्ष वेत्तवलम मणिकंडन के अनुसार केंद्र ने प्रस्ताव दिया है कि संयुक्त सचिव के नेतृत्व में एक पैनल का गठन होगा जो देश भर से राज्यवार विचार सुनेगा।

यह घटना तब हुई है जब कुछ किसान, विशेषकर पंजाब से, कृषि सुधारों का विरोध करते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। आज (15 दिसंबर) को इस विरोध प्रदर्शन का 20वाँ दिन है।

सितंबर में समाप्त हुए संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि विधेयक पारित हुए थे- कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अधिनियम एवं आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम।

व्यापार और वाणिज्य अधिनियम किसानों को अनुमति देता है कि वे अपना उत्पाद देश में कहीं भी, किसी को भी बेच सकें। मूल्य आश्वासन अधिनियम किसानों को अपनी सहूलियत के अनुसार अनुबंध आधारित खेती करने देता है और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम उन्हें भंडारण सीमाओं की चिंता किए बिना अपने उत्पाद बेचने की अनुमति देता है।

मणिकंडन ने बताया कि जिस बैठक में वे गए थे वहाँ तीन राज्यों के किसान प्रतिनिधि कृषि मंत्री से मिले थे। 11 प्रतिनिधियों को तोमर ने शांति से सुना। आज सात राज्यों- महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रतिनिधिमंडल के साथ तोमर ने बातचीत की।

किसानों और कृषि मंत्री के बीच वार्ता

इससे पहले और भी कई किसान संघ, विशेषकर हरियाणा से, कृषि मंत्री से मिल चुके हैं और मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधारों को समर्थन दिया था। रविवार को उत्तराखंड के किसानों का प्रतिनिधिमंडल तोमर से मिला था और विपक्ष पर आंदोलन के माध्यम से राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का आरोप लगाया था।

सबसे पहले 7 दिसंबर को हरियाणा के 116 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्रगतिशील किसान समूहों के करीब एक लाख से अधिक किसानों ने कृषि मंत्री को पत्र लिखकर इस कानून को बरकरार रखने की बात कही थी।

भारतीय किसान यूनियन (मान) के हरियाणा अध्यक्ष गुनी प्रकाश ठाकुर ने स्वराज्य को बताया कि उन्होंने तोमर से इन कृषि सुधारों को वापस न लेने के लिए कहा है। “26 दिसंबर को दिल्ली में एक सम्मेलन होगा जिसमें 24 क्षेत्रीय किसान संगठन भाग लेंगे और इस बात का निर्णय करेंगे कि अगले दो सालों में किसानों की आय को दोगुना करने के लिए क्या किया जाए।”, उन्होंने कहा।

प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार को कृषि के क्षेत्र में बाज़ारी प्रतिस्पर्धा खोलने व कृषि उपकरणों के आयात पर कस्टम ड्यूटी कम करके तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कहा। उन्होंने यह भी माँग की कि कीटनाशकों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को कम कर दिया जाए और सभी कृषि संबंधित वस्तुओं का जीएसटी न्यूनतम स्तर पर रहे।

इसपर तोमर ने कहा कि इन सुझावों पर आगे बढ़ना किसानों के हाथ में है क्योंकि तीनों अधिनियमों पर सरकार बिंदुवार चर्चा करने के लिए तैयार है। मणिकंडन ने स्वराज्य को बताया कि उन्होंने कृषि मंत्री से कहा कि मूल्य व समझौता आधारित खेती के विवाद जनपद न्यायालय में न लेकर जाए जाएँ।

मणिकंडन (बाएँ से दूसरे)

“मैंने उन्हें एक घटना बताई कि कैसे भूमि विवाद के कारण हमारे गाँव का एक किसान दरिद्रता का शिकार हो गया जबकि उसके वकील ने बहुत पैसे कमाए। न्यायालय में बात लंबी खिंचेगी। ये सब राजस्व के मामले हैं। ऐसे मामलों को राजस्व खंड अधिकारी या जिला कलेक्टर द्वारा निपटाया जाना चाहिए।”, उन्होंने कहा।

तमिलनाडु के किसान संघ के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि कुछ विवादों को जल्दी सुलझाने के लिए केंद्र या राज्य सरकार को भी हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि व्यापार और वाणिज्य अधिनियम में सरकार एक वाक्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का उल्लेख भी कर सकती है।

इसी बीच कल (16 दिसंबर) को सर्वोच्च न्यायालय प्रदर्शनकारी किसानों को एनसीआर क्षेत्र से हटाने की माँग करने वाली एक याचिका सुनने वाला है। कानून के विद्यार्थी ऋषभ शर्मा द्वारा दायर की गई इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश एस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की पीठ सुनेगी।

शर्मा का कहना है कि मार्ग के बाधित हो जाने से आने-जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और इतनी भीड़ के कारण करोविड-19 के प्रसार का भी खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विरोध में शाहीनबाग के प्रदर्शनों को न्यायालय ने अवैध बताया था, ऐसे में ये प्रदर्शन न्यायालय की अवज्ञा हैं।

स्वराज्य के कार्यकारी संपादक एमआर सुब्रमणि  @mrsubramani के माध्यम से ट्वीट करते हैं।