राजनीति
राफेल सौदे के विषय में कुछ नई जानकारियाँ- डसॉल्ट एविएशन के सी ई ओ एरिक़ ने दिए सवालों के जवाब

आशुचित्रडसॉल्ट के सी ई ओ एरिक़ ट्रेपियर ने राफेल के सौदे में ऑफ़सेट क्लॉज़ के विषय में काफी बातों को साफ किया है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को सीलबंद लिफ़ाफ़े में राफेल सौदे की जानकारी दिए जाने के एक दिन बाद डसॉल्ट एविएशन के सी ई ओ ने 36 विमानों के सौदे के संबंध में नई जानकारी जारी की है।

एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल  को दिए गए एक साक्षात्कार में डसॉल्ट के सी ई ओ एरिक़ ट्रेपियर ने सौदे और इससे संबंधित मामलों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने ऑफ़सेट क्लॉज़, अनिल अंबानी की रिलायंस से संबंध पर विवाद, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एच ए एल) का सौदे से बहिष्कार और बिज़नेस स्टैंडर्ड  की रिपोर्ट के कारण नए मूल्यों पर बहस जैसी सभी बातों पर अपनी राय दी। कुछ प्रमुख बिंदू जो ट्रेपियर ने सामने रखे-

पहला, उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि रिलायंस के अलावा ऑफ़सेट क्लॉज़ के लिए इसने 30 अन्य कंपनियों से सौदे के लिए बात की है। लगभग 30 प्रतिशत ऑफ़सेट इन 30 कंपनियों द्वारा किया जाएगा। जैसा कि दावा किया जा रहा था, उससे विपरित ऑफ़सेट का मूल्य सीधे डसॉल्ट द्वारा चुकाया जाएगा न कि रिलायंस के साथ इसकी संधि- डसॉल्ट रिलायंस एरोस्पेस सिमिटेड द्वारा। कुल ऑफ़सेट मूल्य का मात्र 10 प्रतिशत ही इस संधि को चुकाया जाएगा। आने वाले पाँच सालों में डसॉल्ट मात्र 400 करोड़ रुपए ही इस संधि पर निवेश करेगा, उन्होंने कहा।

दूसरा, ट्रेपियर ने दावा किया है कि 126 लड़ाकू विमान के समझौते के भाग के रूप में यू पी ए सरकार के समय जो 18 विमान बेचे जा रहे थे उनसे इस सौदे के 36 उड़ान के लिए तैयार (शस्त्र-रहित) विमान 9 प्रतिशत सस्ते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों सौदों, जहाँ एक तरफ 36 संपूर्ण विमानों की खरीद है और दूसरी ओर एच ए एल द्वारा बनने वाले 108 विमान, वहाँ उड़ने के लिए तैयार विमानों के मूल्यों में तुलना की जा सकती है। लगता है कि बिज़नेस स्टैंडर्ट  की रिपोर्ट, जिसमें दावा किया गया था कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा खरीदे गए विमान डसॉल्ट के पिछले प्रस्ताव से 40 प्रतिशत महंगे हैं, में संपूर्ण रूप से तैयार विमानों और 126 लड़ाकू विमानों के सौदे जिसके अंतर्गत 108 भारत में तैयार किए जाने वाले थे कि मूल्यों में तुलना की गई है।

तीसरा, उन्होंने कहा कि 126 विमानों के सौदे जिसमें से 108 विमान भारत में एच एल द्वारा जोड़े जाने थे, में दो परेशानियाँ थीं।

पहला यह कि जो काम डसॉल्ट फ्रांस में करता, उसी काम को एच ए एल द्वारा भारत में करने में अधिक समय लग रहा था। जैसा कि पिछली रिपोर्टों में भी उल्लेखित है, एच ए एल को डसॉल्ट की तुलना में 2.7 गुना अधिक समय लगता। एच ए एल और डसॉल्ट इस समझौते के तहत कार्य-विभाजन करने में असमर्थ थे, रिपोर्ट में बताया गया है।

दूसरा एच ए एल द्वारा भारत में 108 विमानों को जोड़ने की ज़िम्मेदारी के संबंध में है। जहाँ डसॉल्ट 18 विमानों को पूर्ण रूप से बनाने की ज़िम्मेदारी ले रहा था, वह बाकि 108 के लिए किसी प्रकार की ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। भारत का समझौता दल जिसमें एच ए एल का प्रतनिधि भी था, चाहता था कि डसॉल्ट सभी 126 विमानों की ज़िम्मेदारी ले।

अन्य बातों के बीच ट्रेपियर ने कहा कि वे इस बात से दुखी हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सौदे पर सवाल उठाते हुए उन्हें “झूठा” कहा।

प्रखर गुप्ता स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @PRAKHARG_1991 द्वारा ट्वीट करते हैं।