राजनीति
कटाक्ष- संविधान की रक्षा के उच्चतम उदाहरण प्रस्तुत करता महागठबंधन

ममता बनर्जी के साथ संविधान की रक्षा में उतरे महागठबंधन का मानना है कि नरेंद्र मोदी एक तानाशाह हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर राफेल सौदे से संबंधित जानकारियाँ देने वाले और राम मंदिर मुद्दे पर किसी दिशा में आगे बढ़ने से पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करने वाले नेता संभवतः संस्थानों की उपेक्षा करने वाले तानाशाह हो सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर सीबीआई जैसी स्वायत्त संस्था के कार्यों में खलल डालने और कथित तौर पर साक्ष्य नष्ट करने वाली पश्चिम बंगाल पुलिस का समर्थन करने वाली ममता बनर्जी संविधान की रक्षा कर रही हैं। बनर्जी किस संविधान की रक्षा कर रही हैं, ये तो वे ही जानें लेकिन आपको बता दें कि किसी भी पुलिस अधिकारी, यहाँ तक कि मंत्री तक से पूछताछ करने का अधिकार सीबीआई के पास सुरक्षित है।

नवंबर माह से स्वराज्य, विशेषकर लेखक जयदीप मजूमदार पूरी स्थिति को स्पष्ट समझाते आए हैं कि शारदा चिट फंड और रोज़ वैली घोटालों में ममता बनर्जी के चहेते माने जाने वाले राजीव कुमार ने इन मामलों की जाँच को कैसे भ्रमित करने का प्रयास किया। ऐसे में सीबीआई के पास उनसे पूछताछ करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यहाँ संविधान की रक्षा के नाम पर अपने हितों की रक्षा हो रही है।

इसके अलावा बनर्जी के समर्थकों ने भी संविधान की रक्षा के विशिष्ट उदाहरण दिए हैं। नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर बाहर चल रहे राहुल गांधी संविधान के सबसे बड़े रक्षक हैं। वहीं आईआरसीटीसी घोटाले में अपने माता-पिता के साथ जमानत पर बाहर होकर तेजस्वी यादव ने न्याय पर अपना भरोसा जताया और फिर ममता बनर्जी की रैली में सम्मिलित होने के लिए रवाना हो गए।

वहीं मायावती के शासन काल में कथित तौर पर 1,400 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले गुरुवार ही उत्तर प्रदेश के छः स्थानों पर छापा मारा। इससे पहले खनन घोटाले में अखिलेश यादव व उनका मंत्रीमंडल जाँच के घेरे में आ चुका था। संविधान की रक्षा के समर्थन में उतरे अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार के मध्य संस्थागत अधिकारों को लेकर चला द्वंद्व कई दिनों तक सुर्खियों में रहा था। इतना ही नहीं उनके मंत्री कैलाश गहलोत का प्रशासनिक अधिकारी से दुर्व्यवहार भी सांस्थानिक संरचना को सुदृढ़ करने का एक उदाहरण ही रहा होगा।

आशा करते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय पहुँचे पश्चिम बंगाल पुलिस के असहयोग मामले को न्यायालय सही दिशा देने में सक्षम होगा, अन्यथा संविधान की रक्षा के ऐसे कई उदाहरण गढ़े जाएँगे जो संस्थानों पर विश्वास का न सिर्फ हनन करेंगे, अन्यथा संविधान को तोड़-मड़ोरकर उपयोग करने वालों को प्रोत्साहित भी करेंगे।