राजनीति
हर चीज़ जो आप जानना चाहते हैं वायनाड़ में होने वाले लोकसभा चुनाव के बारे में

आशुचित्र- कांग्रेस अध्यक्ष वायनाड़ और अमेठी दोनों से क्यों लड़ रहे हैं, केरल राजनीति के लिए इसके क्या मायने हैं? और वामपंथ इस सीट के लिए कितना दम लगा पाएगा?

विरासत के रूप में मिली अमेठी की लोकसभा सीट के अलावा राहुल गांधी ने केरल की वायनाड़ सीट से भी चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इसके बाद से केरल की चुनावी रंगत बदलने के संकेत मिलने लगे हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई एम) के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने राहुल गांधी की आलोचना करनी शुरू कर दी है। सीपीआई (एम) के पिनाराई विजयन ने एके एंटनी द्वारा राहुल गांधी के नाम की घोषणा के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष वायनाड़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर यह जताना चाहते हैं कि उनकी जंग भाजपा से नहीं बल्कि वामदलों के खिलाफ है। बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ से भाजपा चुनाव लड़ रही है, राहुल वहाँ से भी चुनाव लड़ सकते थे लेकिन वो इसके बजाए केरल आए। यह केवल वामपंथियों के खिलाफ चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।

वायनाड़ सीट पर राहुल के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से पीपी सुनीर होंगे, जो वाम लोकतांत्रिक मोर्चे में सीपीएम के कनिष्ठ साझेदार हैं। यह तीसरा मौका है, जब सुनीर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने 1999 और 2004 में पोन्नानी से क्रमशः जीएम बनतवाला और ई अहमद के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

भाजपा ने शुरुआत में यह सीट राज्य में अपने सहयोगी भारत धर्म जन सेना को आवंटित की थी। उसने इस पर पूर्व कांग्रेसी पल्ली वथियातू के नाम की घोषणा की थी। हालाँकि, भारत धर्म जन सेना प्रमुख ने अपने नाम की घोषणा करते हुए कहा था कि अगर राहुल इस सीट से चुनाव लड़ते हैं तो बदलाव किया जाएगा। इसके बाद संभावनाएँ जताई जा रही हैं कि बीडीजेएस केरल के एक वरिष्ठ नेता के लिए सीट खाली कर सकता है जैसे राज्य इकाई के अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई। इसके अलावा, बीडीजेएस थिसार वेल्लापल्ली को थ्रिसूर में जगह खाली करने का विकल्प दे सकते हैं, जो भाजपा में जाएँगे।

वायनाड़ लोकसभा क्षेत्र के बारे में ज़रूरी बातें

वायनाड में तीन जिलों से सात विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें से तीन मानाथावाडी, सुल्तानबथेरी और कल्पेट्टा वायनाड जिले में आते हैं। इसके अलावा एक कोझिकोड जिले का थिरुवंबाडी है और अन्य मलप्पुरम जिले के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र एननाड, नीलांबुर और वांडूर हैं। मलप्पुरम के तीन विधानसभा क्षेत्रों के साथ थिरुवंबाडी भी मुस्लिम बहुल्य क्षेत्र है।

इसमें कोई शक नहीं कि मस्लिम बहुल्य क्षेत्र होने की वजह से राहुल की जीत की संभावनाएं खूब तलाशी जा रही हैं। 2016 के विधानसभा चुनावों में सीपीएम के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे ने चार क्षेत्रों से जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने तीन निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के एमआई शनावास ने सीपीआई के सत्यन मुकरी को 20,870 वोटों से हराया था। पोन्नानी से एलडीएफ के उम्मीदवार और निलाम्बुर के मौजूदा विधायक पीवी अनवर ने 2014 में एलडीएफ के लिए बिगुल बजाते हुए निर्दलीय के रूप में 37,132 वोट हासिल किए थे।

राहुल गांधी बिना किसी संशय के वायनाड़ से एक सुरक्षित सीट की तलाश में हैं। केरल से कांग्रेस 10 से 14 सांसदों को लोकसभा भेजने की संभावनाएं देख रही है। साथ ही राहुल गांधी की उम्मीदवारी को कांग्रेस किसी भी तरह से बदलने पर विचार नहीं कर रही है। मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता की वजह से राहुल गांधी की जीत को निश्चित माना जा रहा है।

हालाँकि, सुनीर की जीत की संभावना यहाँ कम ही है। एक नेता है, जो एलडीएफ की मदद करत सकता है। वो है सामाजिक कल्याण कार्यकर्ता और आदिवासी नेता सीके जानू। उन्होंने 2016 के विधानसभा चुनाव में सुल्तानबथेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) समर्थित निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था। इसमें उन्हें 27920 वोट मिले थे। सीके जानू ने 2018 में राजग छोड़ दिया था और एलडीएफ ने गठबंधन में उसे शामिल करने का प्रयास किया था।

भाजपा इस निर्वाचन क्षेत्र से लगभग गैरहाजिर ही नजर आ रही है, जिसको 2014 में केवल 8.8 प्रतिशत ही वोट मिले थे। 2016 के विधानसभा चुनाव में बामुश्किल एक ही वोट शेयर था। इस बार भी यहाँ भाजपा की किस्मत चमकने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

वायनाड़ से राहुल की उम्मीदवारी राष्ट्रीय स्तर पर वाम दलों के खिलाफ एक संदेश देगी। वहीं सीपीएम की केरल इकाई ने राज्य में अपनी मजबूती साबित करने के लिए राहुल को कड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में मान लिया है। इस तरह से वायनाड़ में एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलने वाला है।

अनंत कृष्ण कोच्चि, केरल में कानून के छात्र हैं।