राजनीति
जनता की प्रतिक्रिया से प्रोत्साहित भाजपा का बंगाल में तूफानी चुनाव अभियान
आशुचित्र- 
  • लोगों की सराहनीय प्रतिक्रिया को देखते हुए भाजपा राज्य के कोने-कोने में  रैली आयोजित करने की तैयारी में है।
  • 300 से अधिक रैलियाँ आयोजित की जाएँगी जिनमें राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेता भी भाग लेंगे।
अगर जनता की प्रतिक्रिया को प्रमाण के तौर पर देखा जाए तो बंगाल सरकार द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनाव अभियान को पटरी से उतारने के लिए लगाई गई सारी अड़चनें उनपर ही उल्टी पड़ती नज़र आ रही हैं। भाजपा को अपनी विस्तृत गणतंत्र बचाओ (लोकतंत्र बचाओ) रथयात्राओं को रोकना पड़ा था क्योंकि राज्य की ममता सरकार ने इसकी अनुमति से इनकार कर दिया था जिसका कारण उन्होंने इन क्षेत्रों में “सांप्रदायिक सद्भाव के संभावित उल्लंघन” की “खुफिया रिपोर्ट” का हवाला दिया। पहली रैली दिसंबर के अंत में उत्तर बंगाल के कूचबिहार से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा हरी झंडी दिखाई जानी थी और पूरे बंगाल में इसी तरह की रैलियों की योजना बनाई गई थी।
यहाँ तक ​​कि कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा भी भाजपा को यात्राओं को अनुमति देने से इनकार कर दिया जिसके बाद पार्टी प्रमुख ने राज्य इकाई को पूरे राज्य में छोटी रैलियाँ और बैठकें आयोजित करने और ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक राय जुटाने का निर्देश दिया। राज्य भर में हुई इन बैठकों और रैलियों से बहुत उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि “हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हमें इसे (राज्य की यात्राओं की अनुमति से इनकार) एक चुनौती के रूप में लेने और अधिकतम लोगों तक पहुँचने के लिए कहा। हमने और हमारे सभी राज्य के नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जनता को जुटाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम किये।”
पिछले कुछ हफ्तों में पार्टी के नेताओं और कैडरों द्वारा शुरू किए गए संपर्क कार्यक्रम का परिणाम पिछले हफ्ते मालदा में अमित शाह की रैली के दौरान साफ नज़र आया। 22 जनवरी को शाह की रैली में एक बड़ी भीड़ शामिल थी जो ‘किराये’ की भीड़ नहीं थी। मुस्लिम बहुल जिले में रैली के लिए हज़ारों लोग उमड़े और ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए भाजपा प्रमुख के आह्वान का बराबर साथ दिया। उन्होंने शाह को बार-बार प्रोत्साहन दिया और जब पार्टी अध्यक्ष ने भाजपा के समर्थन में हाथ उठाने के लिए कहा तो सभी के हाथ उठे हुए थे।
“कोलकाता में तृणमूल द्वारा आयोजित 19 जनवरी की रैली (जिसमें देश भर के कई विपक्षी नेताओं ने भाग लिया था) में भाड़े की भीड़ थी जिसने वक्ताओं को जवाब ही नहीं दिया। किराये की भीड़ वक्ताओं को खुश नहीं करती है और उनके साथ इतनी सहजता से सहमत होती है जैसा कि उन्होंने 22 जनवरी को मालदा में किया था। लोग अमित शाह की मालदा रैली और उसके बाद (केंद्रीय मंत्री) स्मृति ईरानी की रैलियों में शामिल हुए थे क्योंकि वे भाजपा का समर्थन करना शुरू कर चुके हैं।”, घोष ने कहा।
ईरानी ने रैलियों को संबोधित किया जिसमें उन्हें भारी प्रतिक्रिया भी मिली और जब जब उन्होंने ममता बनर्जी और तृणमूल पर हमला बोला तब तब भीड़ ने उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने 23 जनवरी को झारग्राम, 24 जनवरी को जयनगर और 25 जनवरी को कृष्णनगर में रैलियों को संबोधित किया। ईरानी ने बंगाल में प्रचलित ‘सिंडिकेट राज ’(इस पर्दाफाश को पढ़ें) पर प्रकाश डाला और जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर कॉलेज और अस्पताल के प्रवेशों तक सभी चीजों पर ‘अवैध‘ कर लगाने के लिए तृणमूल को आड़े हाथों लिया। और उनकी रैलियों में भीड़ की प्रतिक्रिया जबरदस्त थी भीड़ तृणमूल पर उसके हमलों का समर्थन बराबर कर रही थी। “पिछले हफ्ते अमित शाह और स्मृति ईरानी द्वारा रैलियों में भीड़ की प्रतिक्रिया से यह साफ साबित होता है कि बंगाल के लोग तृणमूल से तंग आ चुके हैं और बदलाव चाहते हैं। और वे भाजपा को तृणमूल के एक अच्छे विकल्प के रूप में देखते हैं”, राज्य के उपाध्यक्ष जोयप्रकाश मजुमदार ने कहा।
जनता से इस तरह की लोकप्रिय प्रतिक्रिया से उत्साहित भाजपा ने अब राज्य के हर गली और नुक्कड़ में बड़ी संख्या में रैलियाँ करने का मन बना लिया है। 300 से अधिक रैलियों की योजना बनाई गई है जिनमें से कई में प्रधानमंत्री मोदी,पार्टी प्रमुख अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों सहित राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेताओं की विशेष उपस्थिति होगी। इससे पता चलता है कि भाजपा 42 लोकसभा सीटों में से 22 को जीतने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गंभीर है।
बंगाल सरकार ने जो बाधाएँ डालीं जैसे कि अमित शाह को ले जाने के लिए हेलीकॉप्टरों की अंतिम क्षण तक अनुमति देने से इनकार करना और फिर स्मृति ईरानी को मैदान में ना उतरने देना या फिर भाजपा के लिए अपनी रैलियों के लिए मैदान किराए पर लेना मुश्किल बना देना ये सभी बातें तृणमूल सरकार ओछी राजनीति को दर्शाती है।दिलीप घोष ने कहा की “उनकी यह रणनीति केवल हमें तृणमूल को लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने और उन्हें हराने के हमारे दृढ़ संकल्प को मज़बूत करती है। इन गंदी चालों से पता चलता है कि तृणमूल डरी हुई है और यह हमें और अधिक दृढ़ बनाती है।और लोग सब कुछ समझते हैं।”
बंगाल में कमल खिलने के भाजपा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के इस चरण की शुरुआत रविवार (27 जनवरी) को बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने हावड़ा में एक रैली को संबोधित करते हुए ही शुरू हुई। इस रैली ने भी भारी भीड़ को आकर्षित किया। राज्य स्तर के नेताओं को केंद्रीय नेताओं और अन्य राज्यों के नेताओं द्वारा रैलियों में बख़ूबी साथ मिल रहा है। और उनके लिए तैयार किया गया कार्यक्रम राज्य के सभी हिस्सों में एक दिन में दो या दो से अधिक रैलियों को संबोधित करने का प्रयोजन है। राज्य की पार्टी के एक नेता ने कहा कि भाजपा की रैलियों के साथ बंगाल को संतृप्त करना और भगवा पार्टी के समर्थन की सुनामी का निर्माण करना है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 29 जनवरी को कोंताई में एक रैली को संबोधित किया और उसी दिन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने क्रमशः सेरामपुर और आरामबाग में रैलियों को संबोधित किया।उम्मीद है कि देब आज (30 जनवरी) मथुरापुर में एक और रैली को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 2 फरवरी को दुर्गापुर और ठाकुरनगर में रैलियों को संबोधित करेंगे। ठाकुरनगर की रैली महत्वपूर्ण होगी क्योंकि शहर में मटुआ महासंघ जो की अनुसूचित जातियों के सामाजिक-धार्मिक आंदोलन का मुख्यालय है उनमें से अधिकांश बांग्लादेश से आए प्रवासी हैं। नागरिकता (संशोधन) विधेयक जो इन प्रवासियों को नागरिकता का वादा करता है उससे मटुआ के साथ देने उम्मीद की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 3 फरवरी को बलुरघाट और रायगंज (दोनों उत्तर बंगाल में) और 5 फरवरी को पुरुलिया और बांकुरा में एक और रैली को संबोधित करने वाले हैं। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा 6 फरवरी को बिष्णुपुर में होंगे जबकि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान क्रमशः 6 और 7 फरवरी को बेरहामपुर और दम दम में रैलियों को संबोधित करेंगे। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 7 फरवरी को खड़गपुर में एक रैली को संबोधित करेंगे और प्रधान मंत्री मोदी 8 फरवरी को सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी में रैलियों को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी सहित ऐसे वरिष्ठ नेताओं द्वारा संबोधित की जाने वाली रैलियाँ भाजपा की राष्ट्रीय इकाई के लिए एक बड़ी तार्किक चुनौती पेश करती हैं। लेकिन यह तथ्य कि बंगाल में भाजपा एक बड़ी चुनौती दे रही है, और यहाँ तक ​​कि चुनाव प्रचार को तेज करने के लिए एक ही दिन में विभिन्न स्थानों पर एक साथ रैलियों को संबोधित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को मिल कर प्रचार को तेज करने की योजना बना रही है ताकि तृणमूल जैसी एक गंभीर चुनौती का सामना कर सके और उसे आड़े हाथों ले सके और यही उसके दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। और बंगाल की आधी से अधिक लोकसभा सीटों को जीतना भी भाजपा की पक्की मंशा है।
भाजपा के नेता यह भी बताते हैं कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा का स्तर और सत्ताधारी दल द्वारा किसी भी व्यक्ति का समर्थन विपक्ष को देने की स्थिति में होने वाले प्रतिशोध को देखते हुए भाजपा की रैलियों में इतनी भारी भीड़ देखी जा रही है यह उल्लेखनीय है।दिलीप घोष ने कहा “तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा की रैलियों से दूर रहने के लिए बंगाल भर के गाँवों और कस्बों में लोगों को सख्त चेतावनी दी है। लेकिन यह तथ्य कि लोग उन चेतावनियों को टाल रहे हैं और हमारी बैठकों के लिए झुंड के झुंड बना कर आ रहे है और यह साबित करता है कि वे तृणमूल से पूरी तरह से मोहभंग कर चुके हैं और उस पार्टी के डर को भी दूर कर चुके हैं। यह दिखाता है कि वे अब इस तरह की चेतावनियों और प्रतिशोध की धमकियों की परवाह नहीं करते हैं।”
जैसा कि आने वाले हफ्तों में लोकसभा के लिए प्रचार अभियान शुरू हो रहा है भाजपा ने पहले ही बंगाल में तृणमूल पर बढ़त बना ली है। भाजपा नेता स्वीकार करते हैं कि बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की रैलियों को बाधित करने, लोगों को धमकाने और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला करने के लिए “हर गंदी कोशिश” करेगी। “लेकिन तृणमूल को पता होना चाहिए कि उसके दिन गिने जा रहे हैं। तृणमूल द्वारा बंगाल में अपने अंतिम दिनों में सीपीआई (एम) द्वारा दिखाए गए हताशा को प्रदर्शित किया जा रहा है”, भाजपा के एक नेता ने कहा।