राजनीति
महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव लेकिन उत्तर प्रदेश में गठित हो रही कांग्रेस की समिति

हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव प्रक्रिया के बीच में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपना अध्यक्ष घोषित किया है। विधानसभा चुनाव से ढाई साल पहले हुई इस घोषणा को पार्टी की चुनावी तैयारी का आह्वान माना जा रहा है।

दो राज्यों में हो रहे चुनाव में निष्क्रिय पड़ी कांग्रेस पर इस घोषणा से कई प्रश्न उठ रहे हैं। कई जगह आपसी कलह में उलझी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में नई कार्यकारिणी की घोषणा में युवाओं को महत्त्व देते हुए कुशीनगर जिले के तमकुहिराज से विधायक अजय कुमार लल्लू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

लल्लू के साथ ही पार्टी ने चार उपाध्यक्ष, 12 महासचिव और 24 सचिवों के साथ पहले की तुलना में एक छोटी टीम बनाई है। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारिणी में जगह देने की बजाय सलाहकार समिति में रखा गया है।

पिछले 30 वर्षों से राज्य की सत्ता से कांग्रेस दूर रही है। उत्तर प्रदेश में मंडल-कमंडल की राजनीति ने कांग्रेस की राजनीतिक ज़मीन खत्म कर दी। कांग्रेस का आखिरी झंडा उत्तर प्रदेश विधानसभा पर नारायण दत्त तिवारी ने फहराया था, लेकिन अंतिम समय में वे भी अपने पुत्र के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे।

नई कार्यकारिणी में पार्टी ने जातीय समीकरण का भी ध्यान रखा है। कांग्रेस कमेटी में सबसे अधिक भागीदारी 45 प्रतिशत के साथ पिछड़े समुदाय की है। इसमें यादव और कुर्मी समुदाय के साथ-साथ अतिपिछड़े समुदाय से आने वाले निषाद, कुम्हार और धनगढ़ समुदाय जैसी जाति के लोगों को शामिल किया गया है।

पिछड़े वर्ग के बाद कांग्रेस का सबसे ज्यादा भागीदारी दलित समुदाय को मिली है। पार्टी की नई कार्यकारिणी में 20 प्रतिशत दलित समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिसमें पासी, धोबी, जाटव और बाल्मिकी जैसे समुदायों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा पार्टी संगठन में 19 फीसदी ब्राह्मण समुदाय को जगह मिली है।

पार्टी ने राज्य की राजनीति में हाशिए पर पड़ी जातियों के वोट पर विशेष ध्यान दिया है। स्वंय अजय कुमार लल्लू पिछड़े वर्ग के कानू जाति से आते हैं, जिसका प्रतिनिधित्व राज्य की राजनीति में न के बराबर है।

अजय कुमार लल्लू पार्टी के भीतर एक संघर्षशील नेता कै तौर पर जाने जाते हैं। दो बार से विधायक लल्लू पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के खास माने जाते हैं। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राजनीति में कदम रखने वाले लल्लू उत्तर प्रदेश के राजनीति गलियारों में ‘धरना कुमार’ के नाम से जाने जाते हैं।

हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर में प्रदर्शन और उम्भा गाँव में प्रियंका गांधी के दौरे में लल्लू को उनके साथ हमेशा देखा गया, उसके बाद से ही अनुमान लगाया जाने लगा था कि लल्लू ही पार्टी के अगला अध्यक्ष होंगे।

प्रदेश कार्यकारिणी की सूची आने के बाद पार्टी के अंदर विरोध शुरू हो गया है। सूची में शामिल नहीं होने वाले कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नाराज़ हैं ‌। इन नेताओं का तर्क है कि चुनाव से पहले आने वाले दलबदलुओं को पार्टी ने जगह दी है जबकि पूरी जिंदगी कांग्रेस को देने वाले लोगों को बाहर कर दिया गया है।

कांग्रेस अब इस विरोध से कैसे निपटेगी यह तो प्रियंका गांधी के लखनऊ दौरे के बाद ही पता चलेगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी ढाई साल से अधिक का समय शेष है। भाजपा सरकार में है तो उसकी चुनावी तैयारी चल ही रही है। हाल ही में पार्टी ने संगठन कार्यों में माहिर माने जाने वाले स्वतंत्र देव सिंह को पार्टी अध्यक्ष बनाकर चुनावी तैयारी शुरू कर दी है।

वहीं, बहुजन समाज पार्टी भी पार्टी ने राष्ट्रीय इकाई में फेरबदल कर चुनावी समय में कूदने की तैयारी पूरी कर ली है। समाजवादी पार्टी के बारे में कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव की घरवापसी कराकर चुनावी तैयारी का बिगुल फूँकेंगे।

इसके इतर कांग्रेस ही सबसे मझधार में है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व से लेकर हर राज्य में अंदरुनी गुटबाजी हावी है। इसमें उत्तर प्रदेश राज्य इकाई अगर ठीक से काम करें तो पार्टी को नई संजीवनी मिल सकती है।